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सदानीरा गंगा मेले से पहले मैली

पानी गंदा होने से श्रद्धालु दुखी हैं
इलाहाबाद में संगम के तट पर अर्धकुंभ मेला पौष पूर्णिमा के स्नान से प्रारंभ हो रहा है लेकिन संगम पर गंगाजी में पानी की कमी और प्रदूषण को लेकर लोगों में व्यापक असंतोष है.

स्वच्छ और निर्मल कहा जाने वाला अमृततुल्य गंगाजल इस समय फैक्ट्रियों के प्रदूषण से भूरा हो गया है.

मेले की व्यवस्था का संचालन कर रहे इलाहाबाद के कमिश्नर रवींद्रनाथ त्रिपाठी का अनुमान है कि पौष पूर्णिमा पर साठ से लेकर अस्सी लाख लोग गंगा स्नान करेंगे.

पुलिस प्रशासन ने चारों ओर से आने वाले वाहनों और तीर्थयात्रियों का आवागमन निर्बाध कराने के लिए अगल-बगल के ज़िलों से लंबी दूरी के वाहन इलाहाबाद के बाहर से ही मोड़ने का इंतज़ाम किया है.

राम तेरी गंगा मैली...
 नहाने के बाद तो शरीर तो ठीक हो गया लेकिन मन ठीक नहीं हुआ, जल बहुत गंदा है. जब आस्था का केंद्र हैं गंगाजी तो ऐसे में क्या कहा जा सकता है
एक श्रद्धालु

मेले के मुख्य पुलिस अधिकारी राजीव सब्बरवाल ने बताया कि पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

संगम तट पर चिरपरिचित भजन कीर्तन की धुन सुनाई दे रही है. बिजली की चकाचौंध कर देने वाली चमक है.

सड़कें, पुल, तंबू, शामियाने और बड़े पैमाने पर पुलिस बल सब कुछ बंदोबस्त कमोबेश अपने मुकाम पर है मगर जिस गंगा में लोग स्नान करने आ रहे हैं वही संकट में है.

असंतोष

गंगा स्नान के बाद एक तीर्थयात्री ने कहा, "नहाने के बाद तो शरीर तो ठीक हो गया लेकिन मन ठीक नहीं हुआ, जल बहुत गंदा है. जब आस्था का केंद्र हैं गंगाजी तो ऐसे में क्या कहा जा सकता है."

गंदगी
 पानी बहुत अशुद्ध है. गंगाजी के प्रदूषण वाली समस्या बहुत ज्यादा है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए
एक तीर्थयात्री

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, "संगम तट पर आकर हमें तो बहुत आनंद मिला लेकिन पानी लाल रंग का है. अच्छा तो लग ही रहा है लेकिन पानी बहुत अशुद्ध है. गंगाजी के प्रदूषण वाली समस्या बहुत ज्यादा है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए."

गंगा जी के भक्त और संत-महात्मा गंगाजी में पानी का बहाव बढ़ाने और प्रदूषण रोकने के लिए अदालत तक गए. हाईकोर्ट ने आदेश दिए और प्रशासन उस पर अमल का दावा भी कर रहा है लेकिन सब आँख के सामने ही है, घाट पर तो पानी भूरा ही है.

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव सीएस भट्ट का कहना है कि जो फैक्ट्रियाँ अपना कचरा गंगा में छोड़ना बंद नहीं करेंगी उन्हें बंद करा दिया जाएगा.

गंगा के पानी को ठीक करने के लिए एसी डिस्टिलरी और पेपर मिल को निर्देश दिए गए हैं कि वे करीब दो महीने अपना कचरा किसी भी दशा में गंगा या उसकी सहायक नदियों में न छोड़े. इस बीच उनके पास जो जगह है उसमें वे अपना गंदा पानी जमा करें वर्ना तो उन्हें बंद कर दिया जाएगा.

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