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बुधवार, 03 जनवरी, 2007 को 03:13 GMT तक के समाचार
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पौष पूर्णिमा स्नान के साथ अर्धकुंभ शुरू

साधु
अर्धकुंभ पौष पूर्णिमा से शुरू होकर 16 फरवरी तक चलेगा
इलाहाबाद में पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ ही अर्धकुंभ मेला शुरू हो गया है. हर छह साल पर होने वाले अर्धकुंभ में लाखों लोगों के आने की संभावना है.

पिछले चौबीस घंटों के दौरान प्रशासन ने कुछ आपात क़दम उठाए हैं जिससे संगम तट पर गंगा का जलस्तर थोड़ा बढ़ा है और पानी की गंदगी भी कुछ कम हुई है.

अर्धकुंभ की शुरुआत बुधवार सुबह लगभग साढ़े सात बज़े पौष पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त के साथ हुई. हालाँकि हज़ारों की संख्या में कल्पवासी और श्रद्धालु तड़के तीन बजे से ही गंगा तट पर पहुँचने लगे थे.

संगम तट पर चिरपरिचित भजन कीर्तन की धुन सुनाई दे रही है. बिजली की चकाचौंध कर देने वाली चमक है.

स्थानीय प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए वाहनों को काफ़ी दूर पर ही रोकने की व्यवस्था की है जिससे लोगों को मीलों पैदल चल कर घाट पर आना पड़ रहा है.

मेले में यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 10 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.

प्रशासन की कोशिश है कि एक ही समय में तट पर ज़्यादा भीड़ जमा नहीं हो, ताकि व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिल सके. सुचारू रुप से स्नान संपन्न कराने के लिए इस बार 30 घाट बनाए गए हैं.

गंगा की धारा भी इस तरह है कि घाटों पर स्नान के लिए पर्याप्त जगह दिख रही है.

सावधानी

लाउडस्पीकर के ज़रिए मंत्रोच्चार और भजन के साथ साथ लोगों से अपने सामान की सुरक्षा करने को कहा जा रहा है.

बुधवार तड़के से ही घाटों पर भीड़ जमा होने लगी

सुरक्षा इंतज़ामों को बावजूद कुछ लोगों ने सामान चोरी होने की शिकायत की है.

प्रशासन ने 60 से 70 लाख लोगों के स्नान की व्यवस्था की है. लेकिन पहले दिन इतने लोगों के आने की संभावना कम है.

पौष पूर्णिमा के बाद अब मुख्य स्नान 14 जनवरी (मकर संक्रांति), 19 जनवरी (माघी पूर्णिमा), 23 जनवरी (बसंत पंचमी) को है.

इन्हीं तीनों दिन शाही स्नान होता है जिसमें पारंपरिक रूप से सशस्त्र नगा साधु स्नान के लिए जुलूस की शक्ल में आते हैं.

16 फरवरी को शिवरात्रि के दिन अर्धकुंभ का समापन हो जाएगा.

असंतोष

पिछले कुछ दिनों से यहाँ स्नान के लिए आए श्रद्धालुओं ने गंगा का पानी गंदा होने की शिकायत की है.

गंगा स्नान के बाद एक तीर्थयात्री ने कहा, "नहाने के बाद तो शरीर तो ठीक हो गया लेकिन मन ठीक नहीं हुआ, जल बहुत गंदा है. जब आस्था का केंद्र हैं गंगाजी तो ऐसे में क्या कहा जा सकता है."

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, "संगम तट पर आकर हमें तो बहुत आनंद मिला लेकिन पानी लाल रंग का है. अच्छा तो लग ही रहा है लेकिन पानी बहुत अशुद्ध है. गंगाजी के प्रदूषण वाली समस्या बहुत ज्यादा है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए."

गंगा के पानी को ठीक करने के लिए एसी डिस्टिलरी और पेपर मिल को निर्देश दिए गए हैं कि वे करीब दो महीने अपना कचरा किसी भी दशा में गंगा या उसकी सहायक नदियों में न छोड़ें.

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