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फ़िल्म की कामयाबी के लिए चुंबन ज़रूरी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नई फ़िल्म धूम-2 में ऋतिक रौशन और ऐश्वर्या के चुंबन के बारे में विवाद लगातार जारी है. जानकारों का कहना है कि फ़िल्म की कामयाबी के लिए इस बहस को जारी रखना बहुत लाभकारी है. फ़िल्म देखने वालों को याद होगा कि ढ़ाई वर्ष पूर्व ऐश्वर्या ने जेम्स बॉंड श्रृंखला की एक फ़िल्म में काम करने से मना कर दिया था क्योंकि इसमें चुंबन के दृश्य थे और ऐश्वर्या अपने करोड़ों चाहने वलों को नाराज़ नहीं करना चाहती थीं. 'ब्राइड ऐंड प्रिजूडिस' में भी उन्होंने हीरो को 'किस' नहीं किया और न ही फ़िल्म की निर्देशिका ने उन्हें इसके लिए मजबूर किया. क्या कहता है क़ानून भारत और पाकिस्तान में एक धारणा यह है कि मुंबई की फ़िल्मों में चुंबन पर पाबंदी है और कभी कभार चुंबन के जो दृश्य देखने में आ जाते हैं वह क़ानून का उल्लंघन करके डाले जाते हैं. इस संदर्भ में स्थिति यह है कि 1969 की खोसला कमेटी रिपोर्ट के बाद यह पाबंदी व्यावाहरिक रूप से ख़त्म हो गई है. जस्टिस खोसला ने कहा था कि किसी दृश्य को अश्लील कह कर ख़ारिज कर देना सेंसर बोर्ड का काम नहीं क्योंकि किसी दृश्य में नग्नता या चुंबन के सीन पर उस वक़्त तक पाबंदी नहीं लगाई जा सकती है जब तक उस ख़ास दृश्य को ही अश्लील न करार दिया जाए.
37 वर्ष पहले के इस अदालती फ़ैसले के बाद फ़िल्म निर्माताओं को चुंबन के दृश्यों को दिखाने की छूट मिल गई थी लेकिन उन्होंने इसका पर्याप्त लाभ नहीं उठाया. समाज के रूढ़िवादी रवैये के साथ-साथ एक कारण यह भी था कि फ़िल्मकारों ने 22 वर्ष तक सेंसर की पाबंदियों में काम किया था और अब वे ख़ुद भी उसके बहुत आदी हो चुके थेः इतने मानूस सय्याद से हो गए सेंसर की कैंची 1947 में स्वतंत्रता के फ़ौरन बाद फ़िल्मों में चुंबन के दृश्य पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. न केवल भारतीय फ़िल्मों में बल्कि अमरीका, ब्रिटेन, और दूसरे देशों से आने वाली फ़िल्मों में भी चुंबन के दृश्य दिखाने की इजाज़त नहीं थी. इसलिए अंग्रेज़ी फ़िल्मों में प्रायः यह स्थिति पैदा हो जाती की अभिनेता या हीरो भावुकता के अंदाज़ में अपने होंठ हीरोइन के होंठों की ओर ले जाता लेकिन इससे पहले कि होंठ अपनी प्यास बुझाएँ, एक झटके से दोनों के चेहरे पीछे की ओर हट जाते. ज़ाहिर है कि यह झटका सेंसर की क़ैंची का पैदा किया हुआ था. इस स्थिति की तुलना ज़िया-उल-हक़ के युग की पाकिस्तानी फ़िल्मों से की जा सकती है जब शराब पीने के दृश्यों पर पाबंदी लगा दी गई थी. पाबंदी संबंधी नियमों में कहा गया कि होंठों से जाम लगाकर पेय को हलक़ में उडे़लते नहीं दिखा सकते.
उदाहरण के लिए, जिन फ़िल्मों की शूटिंग इस पाबंदी से पहले हो चुकी थी उन में इस प्रकार के दृश्य आम तौर पर देखे जाते थे कि खलनायक और उनके दोस्तों ने जाम उठाकर मुँह की ओर बढ़ाया लेकिन होंठों को छूने से पहले ही सेंसर के झटके ने जाम ख़ाली कर दिया और सिर्फ़ खलनायकों के ठहाके से लगा कि जाम अंदर जा चुका है. शायद इस बात का उल्लेख बे-मौक़ा न हो कि बँटवारे से पहले फ़िल्मों में चुंबन पर कोई पाबंदी नहीं थी. उदाहरण के लिए, 'लाईट ऑफ़ एशिया' और 'कर्मा' जैसी क्लासिक फ़िल्मों में और पीसी बरुआ, हिमांशु राय, देविका रानी और सुलोचना की दूसरी फ़िल्मों में किसिंग या चुंबन के दृश्य देखे जा सकते हैं. बाद के अभिनेताओं में अशोक कुमार और नज़मुल हसन भरपूर चुंबन के लिए बहुत मश्हूर हुए थे. नज़मुल हसन वही हीरो हैं जो बाद में पाकिस्तान आ गए और चरित्र भूमिकाएँ करने लगे. वे रंगीन फ़िल्म 'हीर' में फ़िरदौस के पिता बने थे. जब बना पाकिस्तान पाकिस्तान की स्थापना के बाद लाहौर में बनने वाली फ़िल्मों से भी चुंबन के दृश्य ख़त्म हो गए. 1952 की फ़िल्म 'दुपट्टा' के एक दृश्य में अचानक बिजली चली जाती है तो चरित्र अभिनेता ग़ुलाम मोहम्मद खिसक कर अपनी बीवी के पास आ जाते है और अंधेरे में उसे चूम लेते हैं. बस अधिक से अधिक इतने ही स्वतंत्र विचारों का प्रदर्शन संभव था. 1956 की पाकिस्तानी फ़िल्म 'सोसाईटी' में लाला सुधीर ने मुसर्रत नज़ीर की गर्दन से अपने होंठ छुए थे जिसपर सेंसर बोर्ड के सदस्यों में गरमा गरम बहस हो गई थी और अंततः इस दलील पर यह दृश्य बच गया कि यह समाज के एक ख़ास तबक़े का प्रतिनिधित्व करता है.
पाकिस्तान में न तो कभी फ़िल्म निर्माताओं ने चुंबन के दृश्य दिखाने की कोशिश की और न ही इस संदर्भ में किसी कमी या महरूमी की अभिव्यक्ति की. अलबत्ता पिछले साल एक पाकिस्तानी अभिनेत्री के चुंबन का दृश्य सारे उपमहाद्वीप में सुर्ख़ियों में बना रहा. मीरा और अस्मित पटेल के चुंबन के यह दृश्य महेश भट्ट की फ़िल्म नज़र में फ़िल्माए गए थे और इनकी बदौलत एक फ़्लॉप फ़िल्म को थोड़ा सा आर्थिक सहारा मिल गया था. अब ऐश्वर्या दक्षिण भारत के फ़िल्मों में आजकल अभिनेत्री रक्षिता की भी बहुत चर्चा है जिसने एक कन्नड़ फ़िल्म में अपने हीरो के होंठ चूम कर दर्शकों को हैरान कर दिया है. लेकिन अख़बार में दिए गए बयान में उनका कहना है कि उसने यह सीन अपनी मंगनी से पहले फ़िल्माया था और अब जब वह प्रेम नाम के एक नौजवान के साथ हैं तो एसे दृश्य कभी नहीं देंगी. प्रेम को अपनी मंगेतर का यह बयान पढ़कर वास्तव में बहुत ख़ुशी हुई होगी लेकिन अभिषेक बच्चन के सामने से अभी तक ऐश्वर्या का ऐसा कोई बयान नहीं गुजरा है. | इससे जुड़ी ख़बरें प्रेम कीजिए घंटों के हिसाब से25 दिसंबर, 2003 | पत्रिका सेक्स को समझने की एक और कोशिश27 सितंबर, 2004 | पत्रिका करीना-शाहिद के चित्रों को लेकर बवाल16 दिसंबर, 2004 | पत्रिका चुंबन मामले में अख़बार ने खेद जताया18 दिसंबर, 2004 | पत्रिका भोजपुरी फ़िल्में - मेड इन लंदन27 अगस्त, 2005 | पत्रिका राखी सावंत को चुंबन पर आपत्ति12 जून, 2006 | पत्रिका राखी मामले में मीका को अग्रिम ज़मानत 17 जून, 2006 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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