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भोजपुरी फ़िल्में - मेड इन लंदन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भोजपुर- यानी बिहार-यूपी का वह इलाक़ा जहाँ भोजपुरी बोली जाती है. भोजपुरवासी ताल ठोककर दावा करते हैं - दुनिया के किसी कोने में चले जाइए, भोजपुरी बोलनेवाला एक-ना-एक आदमी ज़रूर मिल जाएगा. दुनिया के हर कोने का हाल तो नहीं मालूम लेकिन इन दिनों ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भोजपुरी गाने ज़रूर सुनाई दे रहे हैं. दरअसल इन दिनों लंदन में तीन-तीन भोजपुरी फ़िल्मों की शूटिंग चल रही है. इनमें से दो फ़िल्मों में अभिनेत्री हैं नगमा तो एक में हृषिता भट्ट. तीनों के हीरो हैं रवि किशन जिन्होंने 'तेरे नाम' और 'क़ुदरत' जैसी कुछ हिंदी फ़िल्मों में अभिनय के बाद भोजपुरी फ़िल्मों की ओर रूख़ किया. और हाँ एक ख़ास बात. एक फ़िल्म का निर्देशन कर रही हैं सरोज ख़ान. नाम है - दिल दीवाना तोहार हो गईल. फ़राह ख़ान के बाद सरोज ख़ान हाल के वर्षों में नृत्य निर्देशन से फ़िल्म निर्देशन में उतरनेवाली दूसरी नृत्य निर्देशिका हैं. भोजपुरी क्यों?
नगमा ने बाग़ी, यलग़ार, धड़कन, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो जैसी लगभग 15-20 हिंदी फ़िल्मों में काम किया और उसके बाद दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में भी अपना अलग स्थान बनाया. मगर अब भोजपुरी क्यों, इस पर वे कहती हैं,"मैंने दक्षिण भारत में चार भाषाओं में काम करते हुए पाया कि मुझमें भाषा सीखने की एक रूचि है, इसलिए मैंने पंजाबी में काम किया है, बांग्ला में किया और अब भोजपुरी में भी काम कर रही हूँ". वहीं सरोज ख़ान कर्मा, तेज़ाब, चांदनी से लेकर देवदास और मंगल पांडे जैसी अनेक हिट फ़िल्मों में नृत्य निर्देशन कर अपना एक अलग स्थान बना चुकी हैं. फिर भोजपुरी क्यों, इसपर वे कहती हैं,"ये ख़ुशकिस्मती है मेरी कि निर्देशन में हाथ साफ़ करने के लिए मुझे भोजपुरी मिल गई है जहाँ मैं अनुभव कर सकती हूँ कि सामाजिक फ़िल्में कैसे बनती हैं". लंदन में भोजपुरी लेकिन लंदन की खुशनुमा और रंगीन बयार को भोजपुर की माटी में कैसे बहा रहे हैं फ़िल्मवाले, कहीं ये भी वही जाना-पहचाना फ़ॉर्मूला तो नहीं कि हीरो-हीरोईन कटिदोलक नृत्य के लिए देश से बाहर निकल पड़े. फ़िल्म से जुड़े सारे लोग इससे सीधे इनकार करते हैं. फ़िल्म 'दिल दीवाना...' के निर्देशक राजेश भट्ट कहते हैं,"हम बिना मतलब के लंदन नहीं आए हैं .हमारी कहानी की कुछ पृष्ठभूमि लंदन पर आधारित है तो इसलिए हम यहाँ आए". हीरो रवि किशन बताते हैं,"कहानी ये है कि लंदन में भोजपुरी ख़ानदान में एक लड़की है, एक लड़का बिहार के गाँव से लंदन आता है, उस लड़की से इश्क होता है, उसे वह अपने संस्कारों का महत्व बताता है और गाँव ले जाता है". फ़िल्म 'बाबुल प्यारे' और 'दिल दीवाना...' दोनों ही के लिए कहानी लिखनेवाले और फ़िल्म के निर्माण और वितरण से जुड़े महमूद अली ने साथ ही बताया कि उनकी फ़िल्में ना केवल यूरोप में शूटिंग करनेवाली पहली भोजपुरी फ़िल्में हैं बल्कि वे विदेशों में दिखाई जानेवाली भी पहली भोजपुरी फ़िल्में होंगी. |
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