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भारतीय शिल्पकला की न्यूयॉर्क में धूम | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के मशहूर शिल्पकार नेक चंद की कला की प्रदर्शनी न्यूयॉर्क में धूम मचा रही है. यह पहली बार है कि न्यूयॉर्क के लोक कला संग्रहालय में भारतीय शिल्पकार की कोई प्रदर्शनी लगाई गई है. ‘कंक्रीट किंगडम’ नामक इस प्रदर्शनी में नेक चंद साहनी की 30 से ज़्यादा शिल्पकलाओं को प्रदर्शन के लिए रखा गया है. इसका आयोजन संग्रहालय की निदेशिका ब्रुक एंडर्सन ने किया है. न्यूयॉर्क के कलाप्रेमी सैंकड़ों की तादाद में अनोखी शिल्पकला के नमूनों को देखने आ रहे हैं. इस प्रदर्शनी में नेक चंद की बनाई गई विभिन्न प्रकार की मूर्तियों को ‘रॉक गार्डन’ की तरह ही सजा कर रखा गया है. नेक चंद भारत के चंडीगढ़ स्थित मशहूर रॉक गार्डेन की शिल्पकारी के लिए जाने जाते हैं लेकिन भारत से बाहर भी उनकी प्रसिद्धी है और अमरीका के कई शहरों में उनके बनाए हुए शिल्पकला के नमूने संग्राहलयों में मौजूद हैं. विस्कॉंसिन के संग्रहालय के लिए ख़ास तौर पर नेक चंद ने 100 से ज़्यादा मूर्तियाँ बनाई हैं. इसी तरह 1980 के दशक से वाशिंगटन के संग्रहालय में भी 100 के क़रीब नेक चंद की शिल्पकला के नमूने, जिसे छोटा रॉक गार्डेन कहा जाता है, प्रदर्शन के लिए रखे हुए हैं. इनमें बहुत सी मूर्तियों को ऐसे सामानों से बनाया गया है जिनका इस्तेमाल किया जा चुका है. जैसे टूटी हुई चीनी की प्लेटें, प्यालियाँ, टूटी चूड़ियों के टुकड़ों और पत्थरों के टुकड़ों को भी मिलाकर मूर्तियाँ बनाई गई हैं. असर न्यूयॉर्क में इस प्रदर्शनी की निदेशिका ब्रुक एंडर्सन नेक चंद से बहुत प्रभावित हैं. उनका कहना है कि वह रॉक गार्डेन देखने भारत एक बार ज़रूर जाएँगी. इस प्रदर्शनी के बारे में वो कहती हैं, “हम लोग बहुत उत्साहित हैं कि पहली बार भारत की कोई प्रदर्शनी इस म्यूज़ियम में लगी है और पहल करने के लिए नेक चंद से बेहतर कोई शिल्पकला की प्रदर्शनी नहीं हो सकती थी.” वाशिंगटन के संग्रहालय ने हाल में फ़ैसला किया कि नेक चंद की सैंकड़ों मूर्तिकलाओं में से कुछ को कला म्यूज़ियम में प्रदर्शनी के लिए रखा जाना चाहिए औऱ इस तरह न्यूयॉर्क के लोक कला संग्रहालय को नेक चंद की 34 मूर्तिकला हासिल हो गईं.
नेक चंद के बारे में ब्रुक एंडर्सन का कहना है, “पिछले 50 सालों से शिल्पकला में लिप्त नेक चंद बीसवीं सदी के जाने माने शिल्पकार हैं औऱ उनकी इस तरह की शिल्पकला के नमूनों को पाकर इस संग्रहालय में जान आ गई है. हम तो नेक चंद की औऱ मूर्तियों को हासिल करने की कोशिश भी कर रहे हैं.” कुछ शिल्पकलाओं को कला म्यूज़ियम में प्रदर्शनी के लिए रखने से पहले मरम्मत की भी ज़रूरत थी, उसके लिए संग्रहालय के कर्मचारी ख़ासकर चंडीगढ़ गए और नेक चंद की इन मूर्तियों की मरम्मत किए जाने के सही तरीकों के बारे में जानकारी हासिल की ताकि इन शिल्पकलाओं को ठीक नेक चंद की शैली के मुताबिक ही बनाया जाए. प्रदर्शनी में नेक चंद की कला को उसी प्रकार से रखा गया है जैसे रॉक गार्डन में उन्हे सजाया गया है. हर मूर्ति को और मूर्ति के समूह को ख़ास तरीके से एक पायदान पर रखा गया है और उनमे सही तालमेल का भी ध्यान रखा गया है. संदेश इन मूर्तियों में समकालीन भारत की राजनीतिक-सांस्कृतिक हालात का असर भी दिखता है. कुछ मूर्तियों में सारी पहने हुए स्त्रियों को पानी भरते दिखाया गया है तो कुछ जानवरों पर आधारित हैं. आम तौर पर इन मूर्तियों में भारतीय समाज की रोजमर्रा के जीवन को दर्शाया गया है. एक मूर्ति तो ऐसे आदमी की है जिसने पुलिस की वर्दी पहनी हुई है औऱ सिर पर टोपी भी लगाई हुई है और वह सैलूट मारने की मुद्रा में खड़ा है. इन मूर्तियों की लंबाई डेढ़ फुट से छह फुट तक की है. इनको आकार देने के लिए इनमें सीमेंट और लोहे का भी इस्तेमाल किया गया है औऱ अलग अलग रंग भी भरे गए हैं.
प्रदर्शनी के ख़त्म होने के बाद इस संग्रहालय में इन शिल्पकला के नमूनों को बड़ी हिफ़ाजत से रखने का भी इंतज़ाम किया जा रहा है. इसकी नज़ाकत को देखते हुए ख़ास तरह की तैयारी की जा रही है. ब्रुक एंडर्सन कहती हैं कि वह नेक चंद को भारत से अमरीका इस प्रदर्शनी को देखने के लिए बुलाना चाहती थीं लेकिन 82 वर्ष के शिल्पकार नेक चंद के साथ दो लोगों को उनकी देखरेख के लिए भी यहां आना पड़ता. इतना ज़्यादा खर्चा उठाने के लिए संग्रहालय के बजट में गुंजाइश नहीं थी. एंडरसन कहती हैं कि वो नेक चंद को यहां बुलाकर सम्मानित करना चाहती थीं औऱ इसके लिए उन्होंने भारतीय दूतावास से मदद लेने की भी कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली. सराहना बहरहाल नेक चंद का काम तो यहाँ खूब सराहा जा रहा है. एक अमरीकी महिला बारबरा अपने पूरे परिवार के साथ इस प्रदर्शनी को देखने आई थीं. वह कहती हैं, “मुझे तो बड़ी हैरत है कि इस तरह की मूर्तियाँ किसी एक आदमी द्वारा बनाई गई हैं. खास कर मुझे जानवरों की मूर्तियाँ ज़्यादा पसंद आईं. ख़ास बात यह भी है कि उन्होने प्राकृतिक चीज़ो का प्रयोग किया है और किसी चीज़ को नष्ट नहीं किया.” पास खड़ी उनकी 12 साल की पोती कैरोलाईन ने तो भारत जाने का मन बना लिया है. वह बोलीं, “मुझे लगता है कि यह बहुत ही अच्छी प्रदर्शनी है, ख़ास बात यह है कि एक कलाकार ने अपनी कला का ऐसा प्रदर्शन किया जिसे वह नहीं जानते थे कि कोई देखेगा, यह बहुत कमाल की बात है.” चंडीगढ़ में 25 एकड़ के इलाके में बने रॉक गार्डन में नेक चंद की दो हज़ार से ज़्यादा मूर्तियाँ प्रदर्शन के लिए रखी हुई हैं. भारत में नेक चंद की ही देखरेख में शिल्पकला का एक और संग्रहालय बन रहा है. चंडीगढ़ के अलावा अब एक रॉक गार्डन केरल में भी बनाया जा रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें एक विकलाँग लड़की का कारनामा21 अगस्त, 2006 | मनोरंजन विवादों के बीच कला की नुमाइश22 जुलाई, 2006 | मनोरंजन 'संगीत सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता'11 अप्रैल, 2006 | मनोरंजन आदिवासी कला के कलाकार ग़ैर आदिवासी27 फ़रवरी, 2006 | मनोरंजन दो टन वज़नी बहुमूल्य मूर्ति चोरी गई17 दिसंबर, 2005 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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