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'मिल्क पुराण' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
(बिंदास बाबू की डायरी) कलयुग में कल्कि अवतार होना था. भक्त लोग पाँच हज़ार साल से इंतजार करते रहे. थकहार कर भक्तों ने कल्कि अवतार की जगह 'मिल्कावतार' कर डाला. देखते-देखते 'मिल्काईडिया' छा गया. सारे भगवान मंदिरों में भक्तों के चम्मचों से दूध पीने लगे. मिल्कावतार की कई विशेषताएँ हैं. मसलन बच्चों को दूध मिले न मिले मिल्कावतार को भेंट करना ज़रूरी होता है. शोधकर्ता कहते हैं कि मिल्कावतार का सीजन होता है. कहते हैं यह पुण्यकाल सावन, भादों से शुरू होकर यों तो कार्तिक तक चलता है. लेकिन सावन भादों का खास महात्म्य होता है. बाढ़ आती हैं. बीमारी फैलती हैं. इंफेक्शन होता है. सब्जी, दाल, गेहूँ, चावल महँगे होते हैं. जनता त्राहि-त्राहि करने लगती है. वह भगवान को सुबह शाम स्मरण करने लगती है. फिर अचानक एक दिन सुबह एक भक्त को मिल्क में भगवान नज़र आते हैं. मिल्क प्रसाद तो नित्य बनता था लेकिन भगवान जी पीते नहीं दिखते थे. वे किसी एक दिन पीने लगते हैं. चम्मच से पिलाते हैं तो पूरा पी जाते हैं. बाद में दूध नीचे बहता होता है. यही तो प्रसाद होता है. ग्यारह साल पहले मिल्कावतार हो चुका है. वह ग्लोबल मिल्कावतार था. दिल्ली से लेकर टोरंटो तक. तब सिर्फ गणेश जी की मार्फत हुआ था. मिल्क पुराण में लिखा है कि कलयुग में भगवान भक्त के सौ फ़ीसदी अधीन होंगे. 'भगवान भक्त के वश में' वाली उक्ति इसी तरह चरितार्थ होगी. वह जिस भावना से देखेगा भगवान को उसी रूप में प्रकट होना होगा. कंडीशन्स एप्लाई. मिल्कावतार शास्त्रानुसार ही हुआ. इस बार कई देवताओं ने मिल्कावतार का रूप धारण किया. गणेश जी ने अपना प्रिय मोदक त्याग कर मिल्क पिया. शंकर जी ने बेलपत्र धतूरा छोड़कर मिल्क का आचमन किया. विष्णु भगवान क्षीर सागर में रहते हुए भी मिल्क पीने को विवश हुए. दुर्गा तक दुग्धपान करती दिखी. शास्त्रों में तो दूध दही माखन के सिर्फ़ कृष्ण ही शौकीन कहे गए. अब ये सारे देवता शौकीन हो गए. इस बार दो दिन तक पिया. अगली बार के सीज़न में जब मिल्कावतार होंगे तो चायावतार, कॉफ़ी अवतार होगा. एक दिन भगवान भक्तों की कृपा से पेप्सी कोका भी पी लेंगे. अभी थोड़ा 'रिज़र्वेशन' है उन्हें. पुराण कहता है कि कलयुग में मिल्क बहुत होगा. इंपोर्टेड भी होगा. पहले नदियाँ बहती थीं. अब नदियों में दूध की बाढ़ आया करेगी. माहिम की खाड़ी कोक की तरह मीठा पानी देगी. बच्चे पूर्वजन्म की फ़िल्म बनाया करेंगे. मिल्क भगवान के अनेक रूप होंगे. वे रोटी में, पानी में, पीपल के पेड़ में, गौ माता के तीसरे सींग में होंगे. भावना से भरकर भक्त कभी राधा कभी कृष्ण कभी विष्णु बना करेंगे. एक दिन धरती पर सब भगवान रूप ले लेंगे. ‘कण कण में भगवान’ नामक ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ फ़िल्म की कलर रीमिक्स बनेगा, करोड़ों बार बनेगा, मिल्कावतार तो एक 'आइटम' है. मिल्क पुराण यह कहते-कहते क्लोज़ होता है - कलयुग में मिल्कावतार देख-देख समस्त देवतागण पुष्प वर्षा किया करेंगे. वे कलयुगी भक्तों को तिलक लगाएँगे. 21 वीं सदी में भक्त स्वयं भगवान बनेंगे. तो हे भक्तों, जो भी हुआ वह नानापुराण निगमागम सम्मत हुआ है. बाबा तुलसी दास ने मानस में बहुत पहले कलजुग के भक्तों-संतों के बारे में लिखा था. "मारग सोई जा कहूं जोई भावा, पंडित सोह जो गाल बजावा." "मिथ्यरंभ दंभ रत जोई, ताकहुँ संत कहहिं सब कोई. सोई सयान कोई पर धनहारी, जो कर दंभ सो बड़ आचारी. जो कह झूठ मसखरी जाना, कलजुग सोई गुणवंत बखाना." भक्तो, बाबा तुलसी दास की ये लाइने इन दिनों बैन कर दी गई. (बिंदास बाबू की डायरी का यह पन्ना आपको कैसा लगा लिखिए [email protected] पर) |
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