|
सरकारों से ज़्यादा भरोसा मीडिया पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के दस चुनिंदा देशों में हुए सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि अपनी सरकारों की तुलना में अपने देश की मीडिया पर ज़्यादा लोग भरोसा करते हैं. यह सर्वेक्षण बीबीसी और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मिलकर किया. सर्वक्षण में अमरीका, ब्रिटेन, ब्राज़ील, जर्मनी, मिस्र, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, रूस, दक्षिण कोरिया और भारत में दस हज़ार से ज़्यादा लोगों से उनकी राय पूछी गई. इस अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि सभी उम्र के लोगों में ख़बरों को लेकर गहरी उत्सुकता है और दस में से सात लोग हर दिन ख़बरों पर नज़र रखते हैं. हालांकि न्यूज़ एजेंसियों पर भरोसे को लेकर हर जगह की तस्वीर अलग है. सरकार बनाम मीडिया दुनिया के दो बड़े देशों अमरीका और ब्रिटेन के लोगों का कहना है कि वे अपने देश की सरकारों पर ज़्यादा भरोसा करते हैं मीडिया पर कम. लेकिन दूसरे देशों में तस्वीर एकदम उलट है और लोगों का भरोसा मीडिया पर ज़्यादा है. उदाहरण के तौर पर नाइजीरिया में 90 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे पत्रकारों पर भरोसा करते हैं जबकि एक तिहाई लोगों ने ही कहा कि वे सरकार पर भरोसा करते हैं. भारत, इंडोनेशिया और मिस्र भी ऐसे देश हैं जहाँ मीडिया पर ज़्यादा लोग भरोसा करते हैं. लोगों को सबसे ज़्यादा भरोसा अपने राष्ट्रीय टेलीविज़न चैनल पर होता है, इसके बाद राष्ट्रीय अख़बारों पर, फिर स्थानीय अख़बारों पर, इसके बाद जनता के पैसे से चलने वाले टीवी चैनल पर और फिर अंतरराष्ट्रीय चैनलों पर. लोगों का कहना था कि टेलीविज़न उनके लिए विश्वसनीय ख़बरों का मुख्य स्रोत है, जबकि अख़बार इसके बाद आता है फिर रेडियो और इंटरनेट का नंबर आता है. भारतीयों को पत्रकारों पर भरोसा सर्वेक्षण में शामिल दस देशों की तुलना में भारत के लोग अपने देश के मीडिया पर ज़्यादा भरोसा करते हैं.
पाँच में से चार लोगों ने कहा कि वे अपनी सरकारों की तुलना में अपने देश के पत्रकारों पर ज़्यादा भरोसा करते हैं. यह आंकड़ा दूसरों देशों की तुलना में सबसे ज़्यादा था. जब भारतीयों से पूछा गया कि वे किस समाचार माध्यम पर ज़्यादा भरोसा करते हैं तो उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया की तुलना में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अख़बारों और राष्ट्रीय टीवी चैनलों को ज़्यादा अंक दिए. सार्वजनिक रेडियो सेवा पर भी लोगों ने भरोसा जताया. दुनिया के दूसरे हिस्सों की तरह ही भारत में भी टेलीविज़न सूचना का मुख्य स्रोत बन गया है. भारत में लोगों की शिकायत है कि मीडिया पर विदेशी प्रभाव बहुत अधिक है और वे पाश्चात्य संस्कारों को बहुत महत्व देते हैं. लेकिन इस शिकायत से मीडिया पर उनका भरोसा कम नहीं होता. अमरीका-ब्रिटेन उधर अमरीकियों का कहना है कि वे अपने मीडिया से बहुत ख़ुश नहीं हैं.
अमरीकियों का मानना है कि उनका मीडिया किसी भी ख़बर के विभिन्न पहलुओं को कवर नहीं करता और ख़राब ख़बरों पर ज़्यादा ध्यान देता है. सर्वेक्षण से पता चला है कि हालांकि अमरीकी मीडिया की तुलना में सरकार पर ज़्यादा भरोसा करते हैं लेकिन हाल के बरसों में मीडिया पर उनका भरोसा थोड़ा बढ़ा है. कोई 72 प्रतिशत अमरीकी हर दिन की ख़बरों पर नज़र रखते हैं. हालांकि दुनिया के दूसरे हिस्सों में 63 प्रतिशत लोग अपने मीडिया पर भरोसा करते हैं लेकिन इसकी तुलना में सिर्फ़ 47 प्रतिशत ब्रितानी ही मीडिया पर भरोसा करते हैं. वे भी अमरीकियों की तरह मानते हैं कि ब्रिटिश मीडिया ख़बर के सभी पहलुओं को नहीं दिखाता. ज़्यादातर ब्रितानी नागरिकों ने कहा कि वे किसी एक स्रोत से मिली ख़बरों पर भरोसा करना छोड़ चुके हैं. ब्रिटेन में बीबीसी सबसे विश्वसनीय ब्रांड के रुप में उभरकर सामने आया. ब्रिटेन के लोग समाचार के नए माध्यम को लेकर बहुत उत्सुक नहीं हैं और वे दक्षिण कोरियाई और ब्राज़ील के लोगों की तुलना में इंटरनेट माध्यम का कम ही उपयोग करते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन में सेंसरशिप को लेकर छिड़ी बहस14 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना नेपाल में मीडिया क़ानून का विरोध28 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस देशी और विदेशी मीडिया का फ़र्क25 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना कार्डिनल मीडिया से बात नहीं करेंगे09 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना टेलीविज़न और खोजी पत्रकारिता 17 मार्च, 2005 | मनोरंजन मीडिया की भूमिका और कुछ सवाल06 जनवरी, 2005 | पहला पन्ना समाचारों का फ़ुटपाथीकरण22 दिसंबर, 2004 | मनोरंजन लाइव, एक्सक्लूसिव की होड़ लगी है14 नवंबर, 2004 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||