|
न्यूयॉर्क में भी छाईं भारतीय फ़िल्में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय मूल के फ़िल्मकारों और कलाकारों की कई फ़िल्मों के साथ भारत से जुड़े विषयों पर आधारित फ़िल्मों ने भी न्यूयॉर्क में चल रहे ट्राईबेका फ़िल्म समारोह में धूम मचा दी है. क़रीब एक दर्जन भारतीय मूल की फ़िल्में इस फ़िल्म महोत्सव में दिखाई जा रही हैं. इस फ़िल्म समारोह को रॉबर्ट डी नीरो ने 11 सितंबर के हमलों के बाद निचले मैनहटन के व्यापारिक और मनोरंजन के माहौल को फिर से जीवंत करने के मक़सद से शुरू किया था. दो हफ़्ते तक चलने वाले इस समारोह में कुल 4000 फ़िल्मों में से चुनी गईं 275 फ़िल्में ही दिखाई जा रही हैं जिनमें फीचर फ़िल्मों के साथ-साथ वृतचित्र और लधु फ़िल्में भी शामिल हैं. इस बार पांचवे ट्राईबेका फ़िल्म समारोह में भारतीय मूल के फ़िल्मकारों और कलाकारों की कई फ़िल्में भी ख़ासी चर्चा में हैं. भारतीय फ़िल्में भारत से जुड़े विषयों पर आधारित फ़िल्मों में एक पुरानी अनोखी फ़िल्म भी चर्चा में है. वर्ष 1951 में भारत में एक फ़्रांसीसी निर्देशक जॉं गेनोआ द्वारा बनाई गई फ़िल्म, 'द रिवर' को 55 वर्षों के बाद तकनीकी मदद के सहारे मरम्मत करके फिर से दिखाए जाने की भी चर्चा है. 'द रिवर' इसलिए भी अहम है क्योंकि यह भारत में बनने वाली पहली रंगीन फ़िल्म थी. एक घंटा 40 मिनट लंबी इस फ़िल्म में अंग्रेज़ी और बंगाली भाषाओं का प्रयोग किया गया है. इस फ़िल्म की कहानी ब्रिटिश राज के दौर के बंगाल में रहने वाले एक ब्रिटिश परिवार के बारे में है. फ़िल्म में गंगा किनारे बसे इस परिवार की तीन जवान लड़कियों की ज़िंदगियों में आने वाले उतार-चढ़ाव का चित्रण किया गया है. पश्चिम और पूरब के बीच सांस्कृतिक मूल्यों के मिश्रण को भी इस फ़िल्म में शायद पहली बार दिखाया गया है. कहा जाता है कि भारत के मशहूर फ़िल्मकार सत्यजीत रे ने निर्देशक जॉं गेनोआ से इस फ़िल्म की शूटिंग के दौरान दोस्ती कर ली थी और इनसे फ़िल्म बनाने के कई गुर भी सीखे थे. न्यूयॉर्क में इस वार्षिक समारोह में फ़िल्मों के शौकीन बड़ी तादाद में शामिल हो रहे हैं. समारोह के आयोजक क्रेग हैटक्रॉफ़ कहते हैं, "न्यूयॉर्क के लोग किसी भी फ़िल्मकार और किसी भी फ़िल्म को सहर्ष गले से लगा लेते हैं. हज़ारों की संख्या में लोग फ़िल्मों का आनंद ले रहे हैं. हमें तो टिकटों की खिड़कियां भी बढ़ानी पड़ गई हैं." देशी भी, विदेशी भी अन्य भारतीय फ़िल्मों में जो ज़्यादा चर्चा में है, वह है नंदा आनंद की 'रिटर्न टू राजापुर' जिसमें बॉलीवुड सितारे मनोज बाजपई ने मुख्य भूमिका निभाई है.
अपनी फ़िल्म की दो देशों की मिली-जुली कहानी के बारे में नंदा आनंद कहती हैं, "मेरे पास क़रीब 20 स्क्रिप्ट थीं लेकिन मैने अपनी जन्मभूमि भारत में ही स्थित कहानी पर आधारित फ़िल्म बनाने का फ़ैसला किया. मैं यह भी चाहती थी कि अमरीका की संस्कृति की भी झलक इस फ़िल्म में आए. ख़ासकर उन अमरीकियों के बारे में जो भारतीय संस्कृति को जानना चाहते हैं." एक और भारतीय मूल के निर्देशक तनुज चोपड़ा की 'पंचिंग एट द सन' की भी चर्चा हो रही है. न्यूयॉर्क शहर पर ही आधारित उनकी फ़िल्म में 11 सितंबर के हमलों के बाद लोगों में पैदा होने वाली विभिन्न भावनाओं को दर्शाया गया है. इस कहानी में एक 17 वर्षीय भारतीय मूल के लड़के को उसके भाई की हत्या हो जाने के बाद उसके गुस्से, उसमें उपजी हिंसात्मक भावनाएं और साथ ही उसकी उम्मीद भरी ज़िंदगी को दर्शाया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें न्यूयॉर्क में 'मुस्लिम फ़िल्मोत्सव'20 अप्रैल, 2006 | मनोरंजन न्यूयॉर्क में देसी फ़िल्मों का फेस्टिवल05 नवंबर, 2005 | मनोरंजन अमिताभ का जादू सर चढ़कर बोला17 अप्रैल, 2005 | मनोरंजन भारत के बाहर का भारत31 अक्तूबर, 2003 | मनोरंजन न्यूयॉर्क में भांगड़ा की धूम20 अक्तूबर, 2003 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||