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पाक अभिनेता मोहम्मद अली नहीं रहे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के लोकप्रिय अभिनेता मोहम्मद अली का लाहौर में 72 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया है. उनके गुर्दों ने काम करना बंद कर दिया था. मोहम्मद अली पाकिस्तानी सिनेमा में काफ़ी जानी-मानी हस्ती थीं और मूल रूप से उनका संबंध उत्तर प्रदेश के रामपुर से था. 1947 में विभाजन के बाद पाकिस्तान बनने पर भारत से आकर वहाँ बस गए थे. मोहम्मद अली ने सिंध प्रांत के हैदराबाद शहर में 'रेडियो पाकिस्तान' के लिए काम करने के साथ अपना करियर शुरू किया था. उनकी भारी-भरकम और विश्वास से भरी आवाज़ और एक मंजा हुआ प्रसारक होने की बदौलत 1962 में फ़िल्मी दुनिया में उनके पैर जमाने में कामयाब हुए. मोहम्मद अली की बहुत मशहूर फ़िल्मों में आग का दरिया, आग, इंसान और आदमी, जैसे जानते नहीं, 'चिराग़ जलता रहा' थीं जिसने उन्हें लोकप्रियता के आसमान पर बिठा दिया. 'फ़िल्म ख़ामोश रहो' में उनकी कुछ नकारात्मक भूमिका थी लेकिन फिर भी उन्हें बहुत पसंद किया गया था. उसके बाद तो लगभग दो दशकों तक वह पाकिस्तानी सिनेमा की दुनिया पर छाए रहे और उन्होंने कई दर्जन लोकप्रिय फ़िल्मों में मुख्य भूमिका निभाई. इनमें से ज़्यादातर फ़िल्में उनकी पत्नी ज़ेबा के साथ थीं. मोहम्मद अली ने अपने जीवन के अंतिम 15 साल एक दान संस्था चलाने के लिए दिए. मोहम्मद अली पिछले लगभग आठ वर्षों से गुर्दों की समस्या से जूझ रहे थे और रविवार, 19 मार्च को सुबह लाहौर में दम तोड़ दिया. | इससे जुड़ी ख़बरें 'नौजवानों को गुमराह कर रही हैं फ़िल्में'08 मार्च, 2006 | मनोरंजन आख़िरी दम तक स्टार रहीं नूरजहाँ28 दिसंबर, 2005 | मनोरंजन चला गया 'आधुनिक रामायण' का रचयिता 13 दिसंबर, 2005 | मनोरंजन पाकिस्तानी हास्य अभिनेता का निधन24 मई, 2005 | मनोरंजन संघर्ष और सचाई से भरा मंटो का जीवन14 मई, 2005 | मनोरंजन एक जनगीत का होना सौ बरस का21 अप्रैल, 2005 | मनोरंजन 'मोहब्बत सबसे बड़ा मज़हब है’15 अप्रैल, 2005 | मनोरंजन मीरा की 'नज़र' पर क्यों है ऐतराज़?28 फ़रवरी, 2005 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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