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विदेशी अभिनेत्री के साथ गोविंदा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गोविंदा फिर आला रे. राजनीति की भागमभाग के बीच समय निकालकर गोविंदा एक बार फिर रूपहले पर्दे पर दर्शकों को गुदगुदाने की तैयारी कर रहे हैं. जल्द ही वो ‘कल हो न हो’ से प्रसिद्ध हुए निखिल आडवाणी की फ़िल्म ‘सलाम-ए-इश्क़’ में नज़र आएंगे. उनके साथ इस फ़िल्म में कई जाने माने चेहरों के अलावा एक नया चेहरा भी है. ये चेहरा है दक्षिण अफ्रीका की अभिनेत्री सेशिन का जो गोविंदा के साथ इस फिल्म में लीड रोल कर रही हैं. और इस फिल्म की शूटिंग चल रही है उत्तरांचल की तीर्थनगरी कहे जाने वाले ऋषिकेश में. “अरे ओ मैडम टाइम खोटी हो रहा है. दिल्ली तीन घंटा है, हरी अप...हरी हरी....” टैक्सी ड्राइवर बने गोविंदा अपनी टिपिकल स्टाइल में विदेशी युवती को अपनी टैक्सी में बैठने को बुलाते हैं. लेकिन वो नहीं आती फिर गोविंदा उसके पीछे पीछे लक्ष्मण झूला तक जाते हैं. रिझाते हैं मनाते हैं. गोविंदा फिर एक डॉयलाग बोलते हैं, “अरे मैडम नाराज़ हो गईं. मैडम मैडम सुनो तो....” शॉट ओके हो जाता है. और चिरपरिचित अंदाज़ में मुस्कराते हुए गोविंदा मेकअप वैन में लौट आते हैं. वहीं से अपने प्रशंसकों की भीड़ का हाथ हिलाकर अभिवादन भी करते हैं. गोविंदा को इस फिल्म से काफ़ी उम्मीदें हैं. वो कहते हैं,“ मेरी हर फिल्म की तरह ये मस्ती भरी फ़िल्म होगी जिसे देखकर लोग सारी टेंशन भूल जाएंगे.” उत्तरांचल में शूटिंग ऋषिकेश के बारे में उनका कहना है,“फिल्म शूटिंग के लिहाज से ये इलाक़ा बहुत समृद्ध है. मैं यहाँ के लोगों और अपने चाहने वालों को प्रणाम करता हूँ.”
बॉलीवुड के शोमैन सुभाष घई की फ़िल्म किसना का ज्यादातर हिस्सा यहीं फ़िल्माया गया था. उस फिल्म में किसना बने थे विवेक ओबेरॉय. वर्ष 2005 की एक हिट फिल्म बंटी और बबली की शूटिंग भी यहीं हुई थी. दो दशक से भी ज्यादा के अपने फिल्मी कैरियर में गोविंदा ने हत्या, शोला और शबनम, आँखें, कुली नंबर वन, हीरो नंबर वन, जोड़ी नंबर वन, हसीना मान जाएगी, राजाबाबू, बड़े मियां छोटे मियां जैसी चर्चित और कामयाब फ़िल्में की. अपनी कॉमिकल किरदारों की वजह से गोविंदा का एक खास दर्शक वर्ग रहा है और उन्हें चाहने वालों की उनके प्रति दीवानगी बेतहाशा है. जिसकी एक झलक ऋषिकेश में भी देखने को मिली जहां दर्शकों की भीड़ उनको देखने और ऑटोग्राफ़ लेने के लिए उमड़ पड़ी. गोविंदा का कहना है कि हालांकि उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड या राष्ट्रीय पुरस्कार नहीं मिले लेकिन जनता का प्यार ही उनके लिए बड़ा पुरस्कार है. उनका कहना है कि इसी प्यार ने उन्हें संसद तक पहुंचाया है. लेकिन वो ये कहना नहीं भूलते हैं कि “राजनीति में आने की क़ीमत भी चुकानी पड़ती है. आरोप और लांछन लगना यहां आम बात है. अभिनेता होने के कारण उनसे अन्य दलों के लोग भी मिलते हैं मगर इन मुलाक़ातों का दूसरा मतलब निकाल लिया जाता है.” अपनी कॉमेडी से लोगों को हंसा हंसाकर लोटपोट कर देने वाले गोविंदा अब लीक से हटकर भी कुछ फ़िल्में करना चाहते हैं. कोई हैरानी नहीं कि राजनीति में कुशलता से अपनी पारी खेल रहे गोविंदा हिंदी सिनेमा के रूपहले पर्दे पर एक नई पारी खेलते दिखाईं दें. बिल्कुल जुदा अंदाज़ में. फिलहाल तो उनका ध्यान साइन की हुई फिल्में निपटाने में हैं. सलामे इश्क़ के अलावा डेविड धवन की फिल्म- पार्टनर में भी वो जल्द ही दिखाई देंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'चापलूसी, जोड़तोड़ पार्टी का हिस्सा'28 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस गोविंदा-दाऊद के टेप पर विवाद20 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस लीक से हट कर बनी एक और फ़िल्म05 दिसंबर, 2003 | मनोरंजन नाइक के विरुद्ध 'छोटे मियाँ' उतरे मैदान में25 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस गोविंदा का ठुमका काँग्रेस के नाम21 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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