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अदूर फाल्के पुरस्कार से सम्मानित हुए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने मलयाली फ़िल्मकार अदूर गोपालकृष्णन को भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया है. दिल्ली में शुक्रवार को उन्होंने वर्ष 2004 के लिए घोषित राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार भी वितरित किए. मधु भंडारकर की 'पेज 3' को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार मिला. सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार सैफ़ अली ख़ान को 'हम तुम' में उनकी भूमिका के लिए मिला, जबकि सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला तारा को कन्नड़ फ़िल्म 'हसीना' में अभिनय के लिए. हिंदी फ़िल्म 'वीर ज़ारा' और तमिल फ़िल्म 'ऑटोग्राफ़' को सर्वश्रेष्ठ मनोरंजन प्रधान फ़िल्म का पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया गया है. अदूर की पहचान अदूर गोपालाकृष्णन को फ़िल्म निर्माण की उनकी ख़ास शैली और बहुत ही प्रभावशाली कथानक के चुनाव के लिए जाना जाता है. अदूर ने फ़िल्म निर्माण की शुरूआत 1972 में 'स्वयंवरम' से की थी. इसके बाद उन्होंने 'कोडियट्टम', 'इलियापत्थम', 'मुखामुखम' और 'कथापुरूषन' जैसी कई चर्चित फ़िल्में बनाई. अदूर अपनी फ़िल्मों की पटकथा ख़ुद लिखने के लिए भी जाने जाते हैं. इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति कलाम ने फ़िल्मकारों से अपने काम के ज़रिए सकारात्मक सामाजिक संदेश फैलाने का आह्वान किया. | इससे जुड़ी ख़बरें अदूर को दादा साहब फाल्के सम्मान05 सितंबर, 2005 | मनोरंजन मृणाल सेन को फाल्के पुरस्कार10 जनवरी, 2005 | मनोरंजन देवानंद को मिला दादा साहब फाल्के सम्मान30 दिसंबर, 2003 | मनोरंजन देवानंद : एक सदाबहार अभिनेता30 दिसंबर, 2003 | मनोरंजन इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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