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मृणाल सेन को फाल्के पुरस्कार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मशहूर फ़िल्मकार मृणाल सेन को वर्ष 2003 के प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए चुना गया है. भारत सरकार सिनेमा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए यह पुरस्कार देती है. राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम दो फरवरी को आयोजित 51वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार समारोह में उन्हें ये पुरस्कार देंगे. बंगाली और हिंदी की कई मशहूर फ़िल्मों के कारण मृणाल सेन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति हासिल हुई. उनकी मशहूर फ़िल्मों में शामिल हैं- नील आकाशेर नीचे, पदातिक, इंटरव्यू, कोलकाता इकेतोर, ओका उड़ी कथा, जेनेसिस (हिंदी), महापृथ्वी, ख़ारिज, एक दिन प्रोतिदिन, भुवन शोम (हिंदी), अकालेर संधान, खंडहर(हिंदी), एक दिन अचानक (हिंदी), मृगया और अंतरीन (हिंदी). अंतरराष्ट्रीय ख्याति 1969 में बनी भुवन शोम के निर्देशक के रूप में मृणाल सेन को अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल हुई. उनकी फ़िल्म ख़ारिज को 1983 में कान, वेनिस, बर्लिन और कार्लोवी वैरी फ़िल्म समाहोर में जूरी पुरस्कार मिला. 1976 में मृणाल सेन के निर्देशन में बनी मृगया के लिए मिथुन चक्रवर्ती को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. मृगया मिथुन चक्रवर्ती की पहली फ़िल्म थी. पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित मृणाल सेन 1998 से 2003 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे. मृणाल सेन का जन्म 14 मई 1923 को फ़रीदपुर में हुआ था, जो अब बांग्लादेश में है. उनकी पहली फ़िल्म रातभोर थी, जो 1955 में बनी थी. उनकी फ़िल्मों के पुनरावलोकन कई देशों में आयोजित किए गए हैं. मृणाल सेन मुंबई स्थित राष्ट्रीय फ़िल्म विकास निगम के सदस्य रहे हैं और पुणे स्थित भारतीय फ़िल्म और टेलिविज़न संस्थान के अध्यक्ष भी रहे हैं. |
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