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मुस्लिम युवती बनीं मिस इंग्लैंड | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उज़्बेकिस्तान में पैदा हुई 18 वर्षीया हमासा कोहिस्तानी मिस इंग्लैंड बनने वाली पहली मुस्लिम महिला हैं. लिवरपूल के ओलंपिया थियटर में 40 युवतियों की बीच हुए मुक़ाबले में हमासा को मिस इंग्लैंड चुना गया. हमासा का कहना था कि वे इतिहास रचकर ख़ुश हैं और दिसंबर में चीन में होने वाली मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने का इंतज़ार कर रही हैं. उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में पैदा हुई हमासा रूसी और फ़ारसी समेत छह भाषाएँ जानती हैं. मिस इंग्लैंड बनने के बाद हमासा का कहना था, "जब मेरे जीतने की घोषणा हुई तो मुझे लगा कि मुझे ग़लती हुई है. मुझे इस ख़बर को पचाने में कुछ देर लगी." मिस इंग्लैंड बनने वाली पहली मुस्लिम महिला होने के बारे में उनका कहना था, "मैं इतिहास रचकर ख़ुश हूँ और आशा करती हूँ कि मिस इंग्लैंड खिताब जीतने वाली मैं आख़िरी मुस्लिम महिला नहीं बन जाऊँगी." हमासा छात्र हैं और एक एशियाई फ़ैशन हाउस ने उन्हें स्पॉंसर किया था जिसके कारण लोग उन्हें 'मिस माया' भी कहते हैं. बताया गया है कि उन्हें एक बॉलीवुड फ़िल्म में अभिनय करने की भी पेशकश आई है. |
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