|
करिश्मा से बेटी की ज़िम्मेदारी माँगी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैवाहिक जीवन में संकट का सामना कर रही फ़िल्म अभिनेत्री करिश्मा कपूर के पति संजय कपूर ने हाई कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में बेटी समायरा को एक पक्ष बनाने की माँग की है. साथ ही कहा है कि बेटी की परवरिश की ज़िम्मेदारी उन्हें दी जाए. हालाँकि नाबालिग़ बच्चे पर पहला अधिकार माँ का माना गया है. अपनी वकील मनीषा सिंघल के जरिए संजय कपूर ने कहा कि वो बच्ची के प्राकृतिक अभिभावक हैं. केवल बच्ची के करिश्मा के पास होने से वह प्राकृतिक अभिभावक नहीं बन जातीं हैं. बेटी के जन्म के बाद से ही करिश्मा और उनके पति संजय कपूर के बीच तनाव बढ़ा था और अब यह मामला क़ानूनी दाँवपेंच में उलझ गया है. इसके पहले करिश्मा कपूर ने अदालत से कहा था कि उन्हें उनके 'नाराज़' पति संजय कपूर ने छोड़ा है और उन्होंने ही वैवाहिक संकट को अदालत में घसीटा. करिश्मा की ओर से एक हलफ़नामा में लिखा था कि संजय कपूर ने बेटी समायरा का इस्तेमाल कर दांपत्य मुद्दे को अदालत में सुलझाने का एक 'असभ्य प्रयास' किया है. रोक की माँग करिश्मा ने अपना हलफ़नामा संजय कपूर की एक याचिका के जवाब में पेश किया जिसमें ये कहा गया था कि करिश्मा को अपनी बेटी को विदेश ले जाने से रोका जाए. करिश्मा ने कहा था कि उनके पति ने सोच-समझकर उनको छोड़ा और उनके पति को पता था कि वे क्यों मुंबई में रहने के लिए मजबूर हुईं. लेकिन संजय कपूर ने अपनी याचिका में ये नहीं बताया कि उन्होंने समझ-बूझकर उन्हें छोड़ दिया जिसके बाद करिश्मा के पास जनवरी 2005 में दिल्ली छोड़ने और अपने पति से अलग मुंबई में रहने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा था. करिश्मा ने अपने हलफ़नामे में ये भी आरोप लगाया था कि सिवाए कुछ बार अपनी बेटी को देखने के संजय कपूर ने समायरा के लालन-पालन में कोई भूमिका नहीं निभाई. करिश्मा ने आरोप लगाया था कि उनके पति की याचिका का सारा ज़ोर इस बात पर था कि कैसे वे करिश्मा के प्रति अपने व्यक्तिगत वैमनस्य का हिसाब बराबर करें और समायरा को हमेशा के लिए उनसे अलग कर दें. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||