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अमिताभ बच्चन बने हैं 'सरकार' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मारियो पूज़ो के चर्चित उपन्यास दी 'गॉडफ़ादर' से प्रेरित रामगोपाल वर्मा की नई फ़िल्म 'सरकार' में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं अमिताभ बच्चन. इस उपन्यास पर ही फ्रांसिस फ़ोर्ड कोपोला की फ़िल्म हॉलीवुड की सबसे सफल फ़िल्मों में गिनी जाती है. लेकिन इस फ़िल्म में विशेष रूचि इस वजह से भी जगी है क्योंकि अमिताभ इस फ़िल्म में जिस मुख्य किरदार की भूमिका निभा रहे हैं उसमें शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की छवि साफ़ दिखाई देती है. उसी तरह के कपड़े और गले में वही रुद्राक्ष की माला. 'सरकार' में अमिताभ बच्चन के किरदार का नाम है सुभाष नागरे. नागरे और ठाकरे... सोचने की बात है. तो क्या सरकार बाल ठाकरे पर आधारित है? राम गोपाल वर्मा कहते हैं, 'यक़ीनन यह बाल ठाकरे के व्यक्तित्व से प्रभावित है, उन पर आधारित नहीं है.' राम गोपाल वर्मा कहते हैं कि यह किसी डॉन का किरदार नहीं है बल्कि एक ऐसे आदमी का किरदार है जो अपने नियम ख़ुद बनाता है और लोग उसे सिर आँखों पर लेते हैं. इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन के साथ हैं उनके बेटे अभिषेक बच्चन, कैटरीना कैफ़, सुप्रिया पाठक और केके मेनन. 'सरकार' भारत में शुक्रवार 1 जुलाई से रिलीज़ हो रही है. बाप बेटे एक साथ
हाल में 'बंटी और बबली' में अमिताभ बच्चन अपने बेटे अभिषेक के साथ थे लेकिन यह पहला मौका है जब बाप बेटे फ़िल्म में भी बाप और बेटे की भूमिका निभा रहे हैं. 'सरकार' बाप और बेटे के उसूलों के टकराव की कहानी है. राम गोपाल वर्मा इस फ़िल्म में अभिषेक बच्चन की प्रतिभा की तारीफ़ के पुल बांधते नहीं थकते. उनका कहना है कि अभिषेक में कुछ ऐसे गुण हैं जो उनके पिता से भी बेहतर हैं. अभिषेक हालांकि इससे इनकार करते हुए कहते हैं कि अमिताभ कोई मुकाबला नहीं, वो अपने आप में अभिनय की एक संस्था हैं. राम गोपाल वर्मा कहते हैं कि 'सत्या' और 'कंपनी' के बाद 'सरकार' गुनाह और सज़ा के विषय पर उनकी ट्रिलॉजी को पूरा कर देगी. |
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