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प्रकाशनों के लिए विदेशी निवेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने ग़ैर समाचार प्रकाशनों के लिए विदेशी निवेश की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी है. इसके बाद विदेशी पत्रिकाएँ और जर्नल के प्रकाशन के लिए विदेशी प्रकाशकों को भारतीय भागीदार की ज़रुरत नहीं होगी. यानी विज्ञान, तकनीक और विशेष विषयों पर प्रकाशित होने वाली पत्रिकाएँ भारत से ही अपना प्रकाशन शुरु कर सकेंगी. गुरुवार को भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी. जो भी विदेशी निवेशक इस क्षेत्र में आना चाहेगा उसे पहले भारत में रिज़र्व बैंक सहित कई वित्तीय संस्थानों से स्वीकृति लेनी होगी. इसके बाद उन्हें सूचना एवं प्रसारण विभाग से स्वीकृति लेनी होगी. पत्रिका के रजिस्ट्रेशन के लिए वर्तमान व्यवस्था के अनुरुप ही रजिस्ट्रार ऑफ़ न्यूज़पेपर ऑफ़ इंडिया (आरएनआई) के पास जाना होगा. तेज़ी से बढ़ते भारतीय बाज़ार में यह विदेशी प्रकाशकों के लिए अच्छा अवसर हो सकता है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ़ न्यूज़पेपर्स के हवाले से रहा है कि 2004 में विभिन्न प्रकाशनों में विज्ञापनों में 15 प्रतिशत यानी 54 अरब रुपयों की बढ़ोत्तरी हुई थी जो टेलीविज़न के 13 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी से अधिक था. |
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