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मोनालिसा को मिली नई जगह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लियोनार्दो दा विंची की प्रख्यात कृति मोनालिसा को पेरिस की लूव्र आर्ट गैलरी में एक नई जगह मिल गई है और अब दर्शक तस्वीर को बेहतर तरीक़े से देख सकते हैं. 500 साल पुरानी मोनालिसा की तस्वीर अब लूव्र म्यूज़ियम की एक छद्म दीवार पर अकेली नज़र आएगी. नई जगह से पहले मोनालिसा का चित्र एक छोटी जगह में अन्य कृतियों के साथ रखी गई थी और इसे देखने के लिए हरदम भीड़ लगी रहती थी. म्यूज़ियम के इस क्षेत्र में 16वीं शताब्दी की इतालवी चित्रकला की कृतियाँ रखी गई हैं. मोनालिसा के लिए नई जगह का प्रबंध करने के लिए चार साल तक काम चला जिसपर लगभग 48 लाख यूरो की लागत बैठी. मोनालिसा की असल पेंटिंग केवल 21 इंच लंबी और 30 इंच चौड़ी है. तस्वीर को बचाए रखने के लिए एक ख़ास किस्म के शीशे के पीछे रखी गई है जो ना तो चमकता है और ना टूटता है. मोनालिसा ऐसा माना जाता है कि इतालवी चित्रकार लियोनार्दो दा विंची ने मोनालिसा की तस्वीर 1503 से 1506 के बीच बनाई थी. समझा जाता है कि ये तस्वीर फ़्लोरेंस के एक गुमनाम से व्यापारी फ़्रांसेस्को देल जियोकॉन्डो की पत्नी लिसा गेरार्दिनि को देखकर आंकी गई है. लूव्र म्यूज़ियम के क्यूरेटर कहते हैं,"इस तस्वीर में मॉडल और दर्शक के बीच दूरी का पता नहीं चलता जो कि उस वक़्त के चित्रों में होता था". उन्होंने मोनालिसा की ख़ासियत पर और कहा,"दूसरी ओर इस चित्र में मॉडल हमारी ओर देख रही है जबकि उस समय तस्वीरों में अक्सर लोग दूर कहीं देखते रहते थे और उसपर से वह मुस्कुरा भी रही है". पिछले वर्ष क्यूरेटरों ने मोनालिसा की तस्वीर की वैज्ञानिक जाँच करवाने का फ़ैसला किया था क्योंकि तस्वीर के चारों ओर लगी लकड़ी मुड़ने लगी थी. |
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