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ब्रिटेन के स्टेज पर भारतीय संगीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन के स्टेज पर शुरू नई नृत्य-नाटिका 'द फ़ार पैविलियन्स' में भारत के पारंपरिक संगीत को प्रमुखता से जगह दी गई है. यह 1983 में प्रकाशित एक किताब पर आधारित है. 'द फ़ार पैविलियन्स' में भारत में ब्रितानी राज के दौरान एक ब्रितानी सैनिक अधिकारी और एक भारतीय राजकुमारी के बीच प्यार की कहानी है. इस नृत्य-नाटिका या म्यूज़िकल का निर्देशन गेल एडवर्ड्स ने किया है. दो संस्कृतियों के अंतर को दिखाने के लिए उन्होंने इसमें दो संगीत निर्देशकों की सेवाएँ ली हैं. इनमें से फ़िलिप हेंडरसन ब्रितानी और कुलजीत भामरा भारतीय हैं. भामरा ने बीबीसी को बताया कि सटीक संगीत देने के लिए उन्होंने उत्तरी भारत की कत्थक शैली को अपनाया है और विशेषकर सारंगी का उपयोग किया है.
उन्होंने कहा, "आप इसमें ऐसा संगीत सुनेंगे जोकि आप आमतौर पर नहीं सुनते होंगे. हमने कुछ ऐसे साजों का इस्तेमाल किया है जो उस ज़माने के अनुरूप हैं." भामरा के अनुसार 'द फ़ार पैविलियन्स' में तबला, सितार, सारंगी और ढोल जैसे भारतीय साज पश्चिमी साजों से प्रतियोगिता करते दिखते हैं. निर्देशक गेल एडवर्ड्स के अनुसार म्यूज़िकल में आधे पात्र भारतीय मूल के हैं और उनका चयन आसान नहीं था. प्रमुख पात्र राजकुमारी अंजली की भूमिका गायत्री अय्यर ने की है. |
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