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वे फ़िल्में जिन्होंने कीर्तिमान बनाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी फ़िल्म विश्लेषकों ने ‘फ़ॉरनहाइट 9/11’ और ‘द पैशन ऑफ द क्राइस्ट’ फ़िल्मों को वर्ष 2004 के सांस्कृतिक पटल के दो महत्वपूर्ण मील के पत्थर कहा है. अमरीकी फ़िल्म संस्थान ने मेल गिब्सन की बाइबल से संम्बधित महागाथा और माइकल मूर निर्दशित राजनीतिक वृत चित्र, फ़ॉरनहाइट 9/11 को ऐसी फ़िल्में बताया जिन्होंने अमरीका को एक बहस का मुद्दा दिया. संस्थान का कहना है कि दोनों फ़िल्म निर्माताओं ने हॉलीवुड की परम्परागत मान्यताओं को कूड़े के ढ़ेर में फेंक दिया. मार्लन ब्रांडो का योगदान अमरीकी फ़िल्म संस्थान ने अभिनेता मार्लन ब्रॉडों और अमरीका में टीवी समाचारों के बदलते परिदृश्य पर भी विचार व्यक्त किए हैं. मार्लन ब्रॉडों के 1 जुलाई 2004 को अस्सी वर्ष की आयु में हुए निधन पर संस्थान की तेरह सदस्यीय जूरी का कहना था कि रुपहले पर्दे पर अभिनय के अब तक के दो अध्याय हैं, जिन्हें मार्लन ब्रॉडों की मृत्यु के पहले और बाद के भागों में बाँटा जा सकता है. शायद यह किसी अभिनेता को दी जाने वाली सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है. जूरी के सदस्यों ने मार्लन ब्रॉडों की सम्मोहित कर लेने वाली शक्ति की प्रशंसा की और कहा कि उनके द्वारा पर्दे पर साकार किये गए स्टेनले कोवालस्की और टैरी मॉलॉए के चरित्र फ़िल्मी इतिहास में हमेशा जीवित रहेंगें. जूरी ने फ़िल्म और प्रसारण जगत पर पड़ रहे विशेष प्रभावों की भी चर्चा की. वर्तमान दौर की बात करते हुए उन्होंने अनुभवी समाचारवाचकों टॉम ब्रोकॉ, बारबरा वाल्टर्स के अंतिम प्रसारणों और सी.बी.एस. के शीघ्र ही रिटायर होने वाले समाचार वाचक डान रादर के बारे में भी विशेष रुप से ज़िक्र किया है. लेकिन उन्होंने इस बात पर भी चिंता ज़ाहिर की कि एक नया दौर आ गया है जहाँ समाचार वाचक पत्रकारों की जगह विशिष्ट व्यक्ति बन गए हैं और समाचारों में संतुलन और विश्वसनीयता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. अमरीकी फ़िल्म संस्थान ने इंटरनेट और चौबीस घंटे चलने वाले समाचार चैनलों के होते हुए सांध्यकालीन समाचार प्रसारण की व्यवहारिकता पर प्रश्नचिन्ह खड़े किए हैं. संस्थान ने अमरीका के प्रसारण नियामक, संघीय संचार आयोग, के बढ़ते प्रभाव की तरफ भी ध्यान खींचा है. अमरीकी फ़िल्म संस्थान का यह भी मानना है कि फ़रवरी 2004 में जेनेट जैकसन के एक कार्यक्रम के सीधे प्रसारण के दौरान उनके अंगवस्त्र खुलने की घटना के बाद, कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी का टीवी कार्यक्रमों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा. संस्थान की जूरी का कहना है कि “ हमें मालूम नहीं कि ऐसे मुद्दों पर संघीय संचार आयोग किस तरह का निर्णय लेगा, लेकिन रचनाकारों ने अपने कार्यक्रमों पर ख़ुद ही अंकुश लगाना शुरु कर दिया है, जो कि एक ऐसे देश के लिए ठीक चलन नहीं है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बुनियाद पर खड़ा है. अपने विचारों को बल देने के लिए अमरीकी फ़िल्म संस्थान ने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में संभावित जुर्माने के डर से कई टेलीविज़न चैनलों ने स्टीवन स्पीलबर्ग की फ़िल्म ‘सेविंग प्राईवेट रेयान’ को बिना काट-छाँट के प्रदर्शित करने से मना कर दिया था. |
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