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सोमवार, 08 नवंबर, 2004 को 11:31 GMT तक के समाचार
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मेरी पहली अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म...

अंजना शर्मा
आफ़ताब के साथ काम करना अंजना शर्मा के लिए एक अच्छा अनुभव रहा
हम सब के जीवन में कोई न कोई आश्चर्य की बात होती है.मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

पिछले वर्ष पंकज खरबंदा की फिल्म 'मातृभूमि' लंदन फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई थी और उसी के दौरान हमारी मुलाक़ात तो हुई थी पर उसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं था.

हाल में जब अचानक उनका फोन आया तो मैं काफी आश्चर्य में पड़ गई और जब उन्होंने मुझ से ये पूछा कि क्या मैं उनकी फिल्म 'दोस्त-माई बेस्टफ्रैंड' जो इस समय रोमानिया में बन रही है उसमे काम करना पसंद करूँगी तो मैं और भी आश्चर्य में पड गई.

मैने लंदन में फिल्मो और नाटको में तो काम किया है पर हिंदी फिल्मे जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की होती है, जिन्हें हिंदी समझने और न समझने वाले दोनो ही बड़े शौक से देखते है उसमें काम करने का मौक़ा अब तक नहीं मिला था.

रोमानिया में बन रही पहली हिंदी फिल्म का हिस्सा बनना साथ में संजय दत्त और आफताब शिवदसानी जैसे प्रसिद्ध कलाकारो के साथ काम करना और शूटिंग के लिए रोमानिया जाना ......एक साथ कई गुदगुदाने वाले एहसास ऐसे निकल रहे थे जैसे लकड़ी की रूसी गुड़िया के अंदर से एक के बाद एक कई गुड़ियाँ निकल रहीं हो.

मैने पंकज खरबंदा की फिल्म 'मातृभूमि' तो देख ही रखी थी और मैं जानती थी कि वे काफी साहसी और मंजे हुए प्रोडूसर है क्योंकि 'मातृभूमि' में उन्होने जो विषय उठाया था वो हर एक के बस की बात नहीं. यह फ़िल्म कन्या भ्रूण हत्या पर आधारित थी.

पंकज ने बताया कि मुझे उनकी नई फिल्म में आफ़ताब शिवदसानी की माँ का रोल करना है.ये चरित्र मुझे काफी चुनैतीपूर्ण लगा. एक तरफ ये महिला बहुत धर्मभीरू और मीठे स्वभाव की है और दूसरी तरफ काफी कठोर ह्रदय की है.

बहरहाल इस भूमिका को न करना मेरे बस की बात नहीं थी. फिर फटाफट तैयारियाँ होने लगी. मुंबई में रातोंरात मेरे कपड़े सिलने शुरू हो गए. उनको बनाने का बीड़ा उठाया नेशनल एवार्ड विनर नीता लूला ने. उन्होने ताल और देवदास में ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित को अपने बनाए कपड़ो से सजाया था.

इधर मेरे हवाई जहाज के टिकट का प्रबंध होने लगा.मैने अब तक संसार के चौदह देश देखे हैं और अब भी कई देश है जो मुझे अपनी ओर खीचते है पर रोमानिया उनमें से क़तई नहीं है. पर फिर कहते है न कि जहाँ इंसान का दाना पानी लिखा होता है वहाँ वो अपने आप ही खिंचा चला आता है.

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