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पाकिस्तान में शोले और देवदास | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय फ़िल्मों की पायरेटेड यानी नकल करके तैयार की गई डीवीडी और सीडी तो बाज़ार में 10-15 रुपए के किराए पर पहले ही उपलब्ध थीं और केबल टीवी पर दिखाई जाती थीं. लेकिन अब इन फ़िल्मों का पाकिस्तानी संस्करण तैयार होने लगा है जिसे वहाँ 'रीमिक्स' या 'पार्ट टू' का नाम दिया जा रहा है. इस तरह अब वहाँ में शोले, तेरे नाम, डर, मुन्नाभाई एमबीबीएस, खलनायक और देवदास जैसी फ़िल्मों के पाकिस्तानी संस्करण उपलब्ध हैं. ज़्यादातर फ़िल्मों को पैरोडी या हास्यसंस्करण के रुप में तैयार किया गया है. रंगमंच के कलाकार इन फ़िल्मों में रंगमंच के कलाकारों को लिया जा रहा है और मूल फ़िल्म की ज्यों के त्यों नकल उतार कर बनाया जाता है.
यानी इसमें कहानी, किरदार, जगहों के नाम और नाच गाने तक सब कुछ मूल फ़िल्मों की तरह होते हैं. सिर्फ़ उनकी गुणवत्ता ख़राब होती है. लोग मानते हैं कि चूँकि पाकिस्तान में रंगमंच का स्तर गिर रहा है इसलिए उसके कलाकार इस तरह के काम करने को तैयार हो रहे हैं जिससे वे कुछ पैसे कमा सकें और पाकिस्तान में इसी बहाने उनकी कुछ पहचान बन सके. कम ख़र्च में एक तो ये फ़िल्में मूल फ़िल्मों के हास्य संस्करण के रुप में पेश की जाती हैं दूसरे इसके संवाद का स्तर बहुत ख़राब और फूहड़ होता है. आमतौर पर ये नकल वाली फ़िल्में एक महीने में तैयार हो जाती हैं दूसरे इस पर खर्च दो से तीन लाख तक ही आता है. हाल ही में वहाँ भारत में हिट हो चुकी फ़िल्म 'तेरे नाम' का पाकिस्तान संस्करण 'तेरे नाम- पार्ट टू' जारी हुआ है. सलमान ख़ान और भूमिका चावला की इस फ़िल्म के पाकिस्तानी संस्करण में कराची के थिएटर कलाकार सिकंदर सनम ने मुख्य भूमिका निभाई है. वे इस तरह की नकल वाली फ़िल्मों में काम करने को स्टेज ड्रामे के रुप में देखते हैं. वे कहते हैं, "भारतीय फ़िल्मों की पैरोडी की शुरुआत हास्य दृश्यों से हुई और अब तो पूरी फ़िल्म ही बनने लगी है." ऐसा नहीं है कि यह मामला सिर्फ़ कराची तक सीमित है. लाहौर में भी यह सिलसिला चल रहा है. लाहौर में 'देवदास- पार्ट टू' बना ली गई है. लोग इसे संजय लीला भंसाली की बेहद मंहगी फ़िल्म की 'घटिया पैरोडी' बताते हैं. ज़ाहिर है हास्य व्यंग्य और पैरोडी के नाम पर कॉपीराइट का उल्लंघन तो हो ही रहा है. |
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