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तमिलनाडु में वीडियो चोरी पर गाज गिरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में फ़िल्मों की वीडियो चोरी के लिए कड़े दंड की घोषणा की गई है. राज्य के फ़िल्म उद्योग ने सरकार से फ़िल्मों की चोरी से वीडियो कॉपी बनाए जाने के धंधे पर रोक लगाने के लिए सख़्त क़ानून बनाने की माँग की थी. फ़िल्म उद्योग का कहना था कि फ़िल्मो की चोरी करके वीडियो कॉपी बनाकर बेचने से उद्योग की आमदनी पर बुरा असर पड़ता है. राज्य की मुख्यमंत्री जे जयललिता भी ख़ुद एक अभिनेत्री रह चुकी हैं और उन्होंने कहा है कि जो भी कोई फ़िल्मों की चोरी से वीडियो कॉपी बनाने का दोषी पाया गया तो उस पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि गुंडा एक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की क़ैद हो सकती है और वीडियो चोरी को रोकने के लिए इस क़ानून में और असरदार संशोधन किए जाएंगे. जयललिता ने कहा कि उनकी सरकार ने इस बुराई को रोकने के लिए पहले की क़दम उठाने शुरू कर दिए हैं और अकेले 2004 में वीडियो चोरी के एक हज़ार से ज़्यादा मामले पकड़े गए हैं. उन्होंने बताया कि फ़िल्मों की चोरी से बनाई गई बहुत सी वीडियो बरामद की गई हैं जिनकी क़ीमत दस करोड़ रुपए से भी ज़्यादा आँकी गई है. रियायत तमिलनाडु सरकार ने राज्य के फ़िल्मोद्योग को कुछ रियायतें भी दी हैं जिनमें मनोरंजन कर में कमी, सार्वजनिक स्थानों पर फ़िल्मों की शूटिंग करने पर दिए जाने वाले शुल्क में कमी और कम बजट की फ़िल्मों पर अनुदान देने की व्यवस्था शामिल है. राज्य के निर्माता-निर्देशकों, वितरकों और अभिनेता-अभिनेत्रियों ने इसी महीने की 23 तारीख़ के एक रैली निकालकर सरकार से कुछ रियायतें देने और वीडियो चोरी पर रोक लगाए जाने की अपील की थी. फ़िल्म वितरकों का कहना है कि तमिल फ़िल्मों के निर्माण में चालीस प्रतिशत की कमी आई है और 1600 से ज़्यादा सिनेमाघर बंद हो गए हैं. वितरकों की चिंता है कि फ़िल्मों की चोरी करके वीडियो बनाने के धंधे से फ़िल्म वितरकों की संख्या एक हज़ार से घटकर आज के दिन सिर्फ़ 150 के आसपास रह गई है. |
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