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दस्युसुंदरी की भूमिका में असली डाकू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सच्ची घटना पर आधारित होने का दावा करने के बावजूद अमूमन फ़िल्म और 'रियल लाइफ़' यानी फ़िल्म की कहानी और सच्ची घटना में काफ़ी अंतर होता है. लेकिन 'वुंडेड' ऐसी फ़िल्म है जिसकी पटकथा और असली कहानी में आश्चर्य की हद तक समानता है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस फ़िल्म में डाकू की भूमिका निभा रही अभिनेत्री असल ज़िंदगी में भी डाकू रही हैं और फ़िल्म में काम करने के लिए जेल से ज़मानत लेकर बाहर आई हैं. फ़िल्मी कहानी के लगभग सारे रोमांच असली कहानी में भी मौजूद हैं. शायद इसीलिए फ़िल्म की शूटिंग पूरी हो जाने के बावजूद फ़िल्मी लहजे में दी जाने वाली धमकियाँ निर्देशक का पीछा नहीं छोड़ रही हैं. लेकिन एक पूर्व पति और चंबल के ख़तरनाक डकैत की धमकी भी ना तो इस फ़िल्म के निर्देशक को अपने रास्ते से डिगा सकी हैं और ना ही इसमें दस्युरानी की भूमिका निभा रही चंबल की असली डाकू सीमा परिहार को. निर्देशक कृष्णा मिश्रा की हिन्दी और अंग्रेज़ी में बनने वाली फिल्म 'वुंडेड' में बॉलीवुड का तमाम मसाला भी मौजूद है. असली चरित्र इस साल अक्टूबर में रिलीज़ होने वाली यह फ़िल्म फ़िलहाल संपादन के दौर से गुज़र रही है.
इसमें मुख्य भूमिका निभा रही दस्युरानी सीमा परिहार ने खुद भूमिका निभाई है. जो इटावा, उत्तरप्रदेश की जेल से ज़मानत पर बाहर आई थीं. सीमा पर हत्या, अपहरण और हिंसा के 15 मामलों में शामिल होने का आरोप है. फ़िल्म में उनकी इस भूमिका ने उसके पूर्व पति और चंबल के डकैत निर्भय गुज्जर को नाराज़ कर दिया है. इसकी वजह फ़िल्म का हो हिस्सा है जिसमें दिखाया गया है कि सीमा ने एक डकैत लालाराम से दूसरी शादी की है जो उसकी पिता के उम्र का है. असली जीवन में लालाराम ने ही सीमा का अपहरण कर उसे दस्युरानी बनाया था. लालाराम से सीमा को एक पुत्र भी है जो अब 5 साल का है. ग़ुज्जर ने एक बयान में कहा है कि अगर फ़िल्म को इसके मौजूदा स्वरूप में रिलीज़ किया गया तो वो सैकड़ों गांव को श्मसान में बदल देगा. इस धमकी के बाद निर्देशक मिश्रा ने फ़िल्म की रिलीज़ के समय पुलिस की सुरक्षा मांगी है. शादी का सच लेकिन सीमा इससे जरा भी चिंतित नहीं हैं. वो कहती हैं, "मैंने दो बार शादी की है मंदिर में. और यह सच है इस तथ्य की पुष्टि या खंडन सिर्फ मैं ही कर सकती हूँ.यह फ़िल्म मेरे जीवन पर आधारित है." लेकिन उसके पूर्व पति गुज्जर का कहना है कि लालाराम ने तो उसका कन्यादान किया था. कन्यादान करने वाला पिता के समान होता है. ऐसे में कोई अपने पिता जैसे व्यक्ति से शादी कैसे कर सकता है? उसका कहना है कि फ़िल्म को मसालेदार बनाने के लिए उसमें यह कहानी थोपी गई है. वो सीमा की दूसरी शादी को सफ़ेद झूठ बताते हैं. निर्देशक मिश्रा कहते हैं कि यह विषय चुनने और चंबल में शूटिंग शुरू करने के बाद वे डरना भूल गए हैं. वे कहते हैं, "गुज्जर खोखली धमकी दे रहा है और सच को झुठलाया नहीं जा सकता. जब सीमा अपने दूसरे विवाह और पुत्र की बात मानती हैं तो उसका अविश्वास कैसे किया जाए?" इस फ़िल्म में भूमिका के लिए सीमा को साइन करने की खातिर मिश्रा को 2 साल काफ़ी पसीना बहाना पड़ा. तब जाकर सरकार से इसकी अनुमति मिल सकी. राजनीति में आने की इच्छा इस फ़िल्म में सीमा के चंबल इलाके के बेहमई गांव से लेकर उसके दस्युरानी बनने और इस बीच पहले निर्भय गुज्जर और फिर लालाराम से उसकी शादी की दास्तान है.
लालाराम की बाद में हत्या हो गई थी. ढ़ाई घंटे की इस फिल्म में खूंखार अपराधियों के बीच अपनों के हाथों सीमा के छले जाने की दास्तान का ज़िक्र किया गया है. परिहार भी फूलन देवी की तरह समय आने पर राजनीति में जाना चाहती हैं. वो बताती हैं कि बाल ठाकरे से लेकर मुलायम सिंह और कांग्रेस तक ने अपने दूत भेजे थे उनके पास चुनाव लड़ने के लिए. लेकिन वो चाहती है उसका हश्र फूलन की तरह न हो. वो कहती है कि तथाकथित सभ्य समाज और जंगल के समाज में ज्यादा अंतर नहीं है. इसलिए जेल से छूटने के बाद अब उसे एक नये सिरे से अपनी लड़ाई शुरू करनी होगी. उनका कहना है की उसके जैसे किसी व्यक्ति के लिए मुख्यधारा में जाने की राह में काफी बाधाएं हैं. सीमा इस मामले में फूलन के हश्र का हवाला देती है. लेकिन साथ ही सवाल करती हैं की एक डकैत के लिए ज़िंदगी आसान ही कब होती है. अगर दर्शकों ने पसंद किया तो वो फिल्मों में भी आ सकती हैं. सीमा कहती हैं कि वो इस फिल्म के ज़रिए दुनिया को यह बताना चाहती थीं कि मजबूरी या विकल्प के अभाव में अपराधी जीवन चुनने वाली महिलाओं का जीवन कैसा होता है. और इसलिए उन्होंने इस फ़िल्म में काम करना मंज़ूर किया. |
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