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'गाइड' का निर्देशक चला गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वरिष्ठ फ़िल्मकार और अभिनेता विजय आनंद का सोमवार सुबह मुंबई के लीलावती अस्तपाल में निधन हो गया. 'गोल्डी' के रूप में मशहूर विजय आनंद 71 वर्ष के थे. दो दिन पहले विजय आनंद को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद गंभीर स्थिति में उन्हें लीलावती अस्तपाल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने पहले ही उन्हें हृदय की बाई पास सर्जरी की सलाह दी गई थी. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं कराया. चारों आनंद भाइयों में सबसे छोटे विजय आनंद ने अपने भाई देवानंद और चेतन आनंद की तरह अपना करियर फ़िल्म को ही चुना. लेकिन अभिनेता से ज़्यादा फ़िल्म निर्देशक के रूप में मशहूर थे. चर्चित विजय आनंद ने 1957 में फ़िल्म 'नौ दो ग्यारह' का निर्देशन किया था जो हिट रही थी.
उसके बाद उनके ख़ाते में कई हिट फ़िल्में आईं. इनमें प्रमुख थीं- काला बाज़ार, तेरे घर के सामने, गाइड, तीसरी मंज़िल, ज्वेल थीफ़, कहीं और चल, जॉनी मेरा नाम, तेरे मेरे सपने. गाइड उनकी निर्देशक के रूप में सबसे चर्चित फ़िल्म थी. 1965 में उन्होंने इस फ़िल्म का निर्देशन उस समय किया था, जब वे सिर्फ़ 32 साल के थे. इसके साथ-साथ उन्होंने छुपा रूस्तम, ब्लैकमैल, बुलेट, राम बलराम और राजपूत का भी निर्देशन किया. विजय आनंद ने कई फ़िल्मों में अभिनय भी किया. जिनमें प्रमुख थीं- काला बाज़ार, डबल क्रॉस, हक़ीक़त, बारूद रोड, मैं तुलसी तेरे आंगन की, हम रहे ना तुम. फ़िल्म निर्देशक के साथ-साथ बॉलीवुड के लिए उन्होंने कई भूमिकाएँ निभाईं. वे सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे लेकिन सरकार के साथ मतभेद के कारण उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया. विजय आनंद अपने भाई चेतन आनंद की याद में एक फ़िल्म जाना न दिल से दूर पर काम कर रहे थे. जिसमें देव आनंद प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं. यह फ़िल्म अगले महीने रिलीज़ होने वाली थी. |
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