फिल्म जैसे-जैसे बढ़ेगी, सिर दर्द तेज़ होगा

- Author, मयंक शेखर
- पदनाम, फ़िल्म समीक्षक
फिल्म: वेलकम बैक
निर्देशक: अनीस बज़्मी
कलाकार: जॉन अब्राहम, अनिल कपूर, नाना पाटेकर
रेटिंग: *
वेलकम बैक देखना है तो दिमाग़ का इस्तेमाल न करें.
फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे आपके सिर में दर्द हो सकता है.
फिल्म में लगेगा जैसे सब अस्त-व्यस्त है.
वेलकम बैक देखने से अच्छा है आप शीना बोरा हत्याकांड को सुलझाने में अपना दिमाग़ लगाएं.
फिर भी मैं आपको बताता हूं इस फिल्म में क्या है ताकि मेरे सिर का दर्द आपके सिर तक पहुंच सके.

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फिल्म में तीन महिलाएं हैं. पहली पीस के नाम से मशहूर है क्योंकि वो टू-पीस यानी बिकिनी में ही नज़र आती है.
उम्र से परे निकल चुके दो मर्दों पर उसकी नज़र है.
एक है अनिल कपूर उम्र 58 साल और दूसरा नाना पाटेकर जो 64 पर नॉट आउट हैं.
आगे की कहानी सुनिए. नाना की एक जवान सौतेली बहन है जो फिल्म की दूसरी हीरोइन है.
किरदार अदा किया है श्रुति हसन ने. नाना उसकी शादी करना चाहते हैं.

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फिल्म में विलेन भी हैं. पहले विलेन नसरुद्दीन शाह बने हैं जो फिल्म के पहले पार्ट वेलकम के खलनायक फ़िरोज़ ख़ान के जूते में पांव डालने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्हें वॉन्टेड भाई के नाम से जाना जाता है. पहली हीरोइन की मां डिम्पल कपाडिया पर उसकी नज़र है.
शाइनी आहूजा उसका बेटा है जो दूसरी हीरोइन श्रुति को चाहता है. हालांकि कभी मिला नहीं है उससे. बस कल्पनालोक में मुलाक़ात होती है उसकी.
अब कुछ समझ में आ रहा है आपको. नहीं ना...ये फ़िल्म बस ऐसी ही है.
एक गीत है - 'मैं बबली हूं, तू बंटी. बंद कमरे में हुआ ट्वेंटी20. लूट ले लूट ले...'

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सुनकर पहचान लेंगे आप कि इसके पीछे अनु मलिक हैं.
संवाद सुनिए, राजपाल यादव एक जगह कहते हैं, ''नदीम श्रवण के म्यूज़िक की तरह मेरी दिनभर बजा रहे हो''
फिल्म में जॉन अब्राहम भी हैं. उनके इर्दगिर्द ऐसे दोस्त हैं जिनकी ज़िंदगी इस 'भाई' की लव-लाइफ़ के उतार-चढ़ाव पर निर्भर है.
लेकिन 'भाई' का सीधा फंडा है औरतों को लुभाने के मामले में - 'छेड़ो, पीछे जाओ और लव लेटर लिखो.'
'भाई' सिनेमाघर में लड़की के हाथ से थप्पड़ खाता है, लड़की के होठों को चूमता है और लड़की लड़के की हो जाती है.

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अस्सी और नब्बे के दशक में आप इस तरह की न जाने कितनी फिल्में देख चुके होंगे जो छोटे-बड़े शहरों में ख़ूब चलती थीं.
मैंने पहले दिन पहले शो में यह फिल्म भोपाल के एक महंगे मल्टीप्लेक्स में देखी जो एक मॉल के भीतर है जहां हर फ्लोर पर सारी दुनिया के टॉप ब्रांड आपको मिल जाएंगे.
ठीक उसी तरह यह फिल्म भी मोटे बजट से बनी है सितारों से सजी है. इसमें महंगी कारें, ड्रोन, हेलीकॉप्टर और दुबई आपको दिखेगा.
भारत में बीते कुछ दशकों में लोगों की आमदनी बढ़ी है, ख़र्च करने की हैसियत बढ़ी है.
लेकिन क्या दुनिया को देखने का उनका नज़रिया भी बदला है, कहना मुश्किल है.
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