बॉलीवुड में गायकों की भीड़: नक्काश

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- Author, श्राबंती चक्रवर्ती
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी के लिए
सलमान ख़ान की फ़िल्म 'बजरंगी भाईजान' जितनी लोकप्रिय हुई है उतना ही लोकप्रिय हुआ है इस फ़िल्म का गाना 'सेल्फ़ी ले ले रे'.
इस गाने के गायक नक्काश अजीज़ ख़ुद को अभी न्यूकमर मानते हैं लेकिन अगर आप नक्काश के गानों पर नज़र डाले तो उन्होंने 'साड़ी के फ़ॉल सा', 'गंदी बात', 'धतिंग नाच' और मीका के साथ 'पुंगी' जैसे सुुपरहिट गाने गाए हैं.
छोटे पर्दे के लोकप्रिय रिएलिटी सिंगिंग शो 'इंडियन आइडल 2' और 'सारेगामापा' में आकर बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने वाले नक्काश ने बीबीसी हिंदी से लंबी बातचीत में अपने संगीतमय सफ़र और बॉलीवुड में जमा टैलेंट की भीड़ पर बात की.
जीन में गाना

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नक्काश ने बताया कि गाना गाने की कला उन्हें पिता से विरासत में मिली है.
वो कहते हैं, "कर्नाटक के मैंगलौर ज़िले में मेरे पिता किशोर कुमार के नाम से जाने जाते थे. वो स्टेज पर कमाल का परफ़ॉर्म करते थे और उन्हीं को देखकर मैं भी इस ओर आकर्षित हो गया. सही मायनों में वो मेरे गायक होने का कारण हैं."
नक्काश को गायक बनना है, इस बात का अहसास उन्हें बहुत बाद में हुआ और बचपन से गाने को शौक की तरह लेने वाले नक्काश ने कॉलेज के समय संगीत की तालीम लेनी शुरू की.
पहला ब्रेक 'आयशा'

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साल 2004 में इंडियन आइडल में शिरकत करने वाले नक्काश को पहला बॉलीवुड ब्रेक साल 2010 में मिला, जब संयोग से उनकी मुलाक़ात संगीतकार अमित त्रिवेदी से हुई.
नक्काश बताते हैं, "मैं घर पर सो रहा था कि मेरे एक दोस्त का फ़ोन आया कि उसके स्टूडियो पर अमित त्रिवेदी आए हुए हैं और उन्हें किसी नई आवाज़ की तलाश है."
नक्काश दौड़ते भागते अमित से मिले और उनका पहला गाना 'सुनो आयशा' नक्काश को मिल गया.
नक्काश बताते हैं, "मैं इस फ़िल्म की ऑडियो सीडी का कवर अपने साथ लेकर घूमता था क्योंकि इस पर मेरा नाम था, भले ही गाने में मेरा पार्ट छोटा था, लेकिन वो गाना मेरा था."
काम को न नहीं

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मुंबई में काम करने की एक ख़ासियत बताते हुए नक्काश बताते हैं कि उन्होंने कभी किसी काम को न नहीं कहा और इसी के चलते उन्हें कई लोगों ने जान लिया.
वो कहते हैं, "आमतौर पर गायक सिर्फ़ गाने तक ख़ुद को सीमित रखते हैं लेकिन मैंने एड के लिए ज़िंगल बनाना, संगीत बनाना, लिरिक्स लिखने से लेकर सभी काम मैंने किए."
नक्काश का मानना है कि आज गायकों की इतनी भीड़ है कि नया गाना मुश्किल से मिलता है, ऐसे में दूसरे काम करने से आप कभी ख़ाली नहीं रहते और नया काम भी सीख जाते हैं जो बुरे वक़्त में हमेशा काम आता है.
उदाहरण के लिए नक्काश ने एआर रहमान के लिए मुंबई के एक ऑर्टिस्ट का सरोद तक रिकॉर्ड किया है जिसे रहमान ने 'दिल्ली 6' में इस्तेमाल किया था.
वैसे 'सेल्फ़ी ले ले रे' गाने वाले नक्काश ने कहा कि इस गाने को उन्होंने सलमान के लिए गाया तो है लेकिन वो सलमान से मिल नहीं पाए थे और यह गाना हिट हुआ इसका मतलब ये नहीं है कि आप हिट हुए.
नक्काश कहते हैं, "आज इंडस्ट्री में एक ही गाने को दो तीन गायकों से गवा लिया जाता है और कई बार ऐसा होता है कि आप फ़िल्म में किसी और की आवाज़ में गाना सुनते हो. इससे कंपीटीशन बढ़ गया है लेकिन आज की यही सच्चाई है."
फ़िलहाल अपने आप को सुरक्षित मानते हुए नक्काश ने बताया कि वो गाने के साथ साथ मराठी फ़िल्मों में संगीतकार की भूमिका भी निभा रहे हैं, क्योंकि ख़ाली बैठने पर आप भीड़ का हिस्सा बन गुम हो सकते हैं.
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