अभिनेत्रियां जो अपनी फ़ीस घटाने को हैं मजबूर

- Author, मनीष शुक्ला
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
बीते कुछ वक्त से बॉलीवुड की अधिकांश फ़िल्में घाटे में ही रही हैं. बड़े सितारों को लेकर बनी फ़िल्में जैसे 'गुलाब गैंग', 'हंसी तो फ़ंसी', 'घनचक्कर', 'बॉबी जासूस', 'रिवॉल्वर रानी' नुकसान में रही हैं.
इनमें से अधिकांश फ़िल्में ऐसी हैं जिनमें मुख्य किरदार अभिनेत्रियों का था. लेकिन फिल्मों के फ्लॉप होने के चलते अभिनेत्रियों पर ये दबाव बन रहा है कि वे अपनी फ़ीस थोड़ी घटाएं
हम आपको बताते हैं पांच ऐसी ही अभिनेत्रियों के बारे में जिन्होनें कई सफल फ़िल्में दी हैं लेकिन अपनी पिछली कुछ फ़िल्में फ़्लॉप होने के कारण उन्हें अपनी फ़ीस में कटौती करनी पड़ी.
परिणीति चोपड़ा

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फ़्लॉप फ़िल्मों के चलते अपनी फ़ीस कम करने वाली अभिनेत्रियों की सूची में सबसे ऊपर नाम आता है परिणीति चोपड़ा का.
परिणीति ने अपना करियर यशराज फिल्म्स की 'लेडीज वर्सेज़ रिकी बहल' से शुरू किया था. इसके बाद 'हंसी तो फंसी', 'दावत ए इश्क़' और ‘किल दिल’ के फ्लॉप होने के बाद परिणीति ने फ़िल्मों से ब्रेक लिया है.
ऐसा माना जा रहा है कि वो सिल्वर स्क्रीन पर वापसी किसी और फ़िल्म से नहीं बल्कि अपनी बहन प्रियंका के प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनने वाली फ़िल्म से करेंगी.
परिणीति ने एक प्रेस कांफ़्रेंस में कहा था, “प्रियंका और मेरे बीच में करियर संबंधी बातचीत होती रहती है और अक्सर मैं स्क्रिप्ट को लेकर उनसे बातचीत कर लेती हूं.” वैसे किल-दिल के बाद से परिणीति फ़िलहाल ब्रेक पर हैं.
करीना कपूर

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करीना कपूर कुछ वक्त से ऐसी फ़िल्मों में नज़र आने लगी हैं जिनमें हीरो का रोल उनके रोल से कहीं ज़्यादा बड़ा होता है.
पिछले साल रिलीज़ हुई फ़िल्म 'सिंघम रिटर्न्स' में भी वो अजय देवगन के साथ कुछ सीन में नज़र आई थीं.
हाल ही में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘गब्बर इज़ बैक’ में भी करीना सिर्फ़ एक गाने में ही नज़र आई थीं
अगर करीना की मुख्य फ़िल्मों कि बात करें तो इमरान खान के साथ आई उनकी फ़िल्म 'गोरी तेरे प्यार में' फ्लॉप रही थी ऐसे में ये चर्चा का विषय है कि करीना कपूर ने भी निर्माताओं को कम फ़ीस में काम करने के लिए ‘हां’ कहा है या ना.
रानी मुखर्जी

रानी मुख़र्जी की आखिरी फ़िल्म 'मर्दानी' उनके होम प्रोडक्शन के तहत बनी थी लेकिन इस फ़िल्म से पहले रानी के पास ख़ास काम नहीं रह गया था.
साल 2007 में चार, 2008 में दो और 2009 में दो फ़िल्में करने वाली रानी को साल 2010 में कोई फ़िल्म नहीं मिली और साल 2011 में भी वो सिर्फ़ 'नो वन किल्ड जेसिका' में नज़र आई थीं.
साल 2012 में रानी मुख़र्जी ने ‘अईय्या’ और 2013 में आई फ़िल्म ‘तलाश’ के लिए अपनी नियमित फ़ीस से काफ़ी कम में काम किया था और अब वो यशराज फ़िल्मस के लिए ही एक बार फिर से मर्दानी का सीक्वल बनाने की तैयारी में हैं जिसमें ज़ाहिर तौर पर वो मेहनताना नहीं लेंगी.
विद्या बालन

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तीन बार लगातार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए फ़िल्मफेयर अवार्ड जीतने वाली विद्या ने बॉक्स ऑफ़िस पर तीन लगातार फ्लॉप भी देखी हैं.
साल 2013 में आई उनकी फ़िल्में ‘घनचक्कर’ और 2014 की ‘शादी के साईड इफ़ेक्टस’ बॉक्स ऑफ़िस पर कोई ख़ास नहीं चली.
हालांकि विद्या ने यूटीवी के मालिक सिद्धार्थ रॉय कपूर से शादी की है लेकिन इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है कि वो सारी फ़िल्में यूटीवी के बैनर तले ही करेंगी.
फ़्लॉप फ़िल्मों का ख़ामियाज़ा तो उनको भी भुगतना पड़ा है और आने वाली फ़िल्म 'हमारी अधूरी कहानी' में वो इमरान हाशमी के साथ नज़र आएंगी लेकिन कम फ़ीस के साथ ये तय है.
वैसे बॉलीवुड विश्लेषक मंयक शेखर ये बताते हैं, “बड़े प्रॉडक्शन हाउस से जुड़ी अभिनेत्रियों जैसे रानी मुखर्जी और विद्या बालन के फ़ीस कम करने को आप प्राईस कम करना नहीं कह सकते क्योंकि वो दरअसल फ़िल्म की निर्माता भी होती हैं.”
माधुरी दीक्षित

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करियर में पांच साल का ब्रेक लेने के बाद जब माधुरी ने यशराज बैनर की फ़िल्म 'आ जा नच ले' के लिए हां किया तो यशराज फ़िल्म उन्हें एक अच्छा ख़ासी फ़ीस देने को राजी हो गई थी. लेकिन ये फ़िल्म दर्शकों की अपेक्षा पर खरी नहीं उतरी.
इस फ़िल्म की असफ़लता के साथ ये मान लिया गया कि माधुरी का वक्त अब बीत चुका है क्योंकि इसके बाद माधुरी दीक्षित की बतौर नायिका 'डेढ़ इश्क़िया' और 'गुलाब गैंग' भी आई लेकिन इन फ़िल्मों के लिए माधुरी ने काफ़ी कम फ़ीस ली.
'गुलाब गैंग' के निर्देशक शौमिक सेन ने एक प्रेस कांफ़्रेंस में बताया था, “माधुरी और जूही दोनों ने ही हमारी बहुत मदद की और फ़िल्म की कहानी सुनने के बाद उन्होंने कम बजट होते हुए भी हमारी फ़िल्म के लिए हां कर दी.”
इन दोनों फ़िल्मों के फ़्लॉप होने के बाद अब ये बात ज़ाहिर हो चुकी है कि माधुरी दीक्षित की कटीली मुस्कान अब दर्शकों के दिलों की धक-धक नहीं बन पा रही है और शायद इसलिए ही माधुरी दीक्षित बड़े पर्दे पर कम और छोटे पर्दे और विज्ञापनों में ज़्यादा नज़र आ रहीं हैं.
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