'संगीत से किसी नशे की याद नहीं रहेगी'

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- Author, आयुष देशपाण्डे
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
युवाओं में नशे के बढ़ते चलन को देखते हुए मुंबई पुलिस ने एक अनोखी पहल की है. नशे के आदी युवाओं की लत छुड़ाने के लिए पुलिस संगीत का सहारा ले रही है.
मुंबई पुलिस की 'एंटी-नार्कोटिक्स' टीम ने मुंबई में रहने वाले डीजे रोशन मनसुखानी के साथ मिलकर युवाओं को नशे से दूर करने की मुहिम शुरू की है.
नार्कोटिक्स सेल के सीनियर इंस्पेक्टर सुहास गोखले ने इस मुहिम के बारे में बीबीसी को बताया, "डीजे और रेव पार्टियों को नशे का अड्डा कहा जाता है इसलिए हमने एक डीजे की मदद से इस मुहिम की शुरुआत की है."
संगीत की मदद से युवकों को नशे से दूर रखने में डीजे रोशन मनसुखानी पुलिस की मदद कर रहे हैं.
रोशन ने बीबीसी को बताया, "डीजे बनना अपने आप में एक नशा है. जब आप अपने हुनर से लोगों को थिरकते देखेंगे तो आपको आपने आप में एक खुशी मिलेगी. इसके बाद किसी नशे की याद नहीं आएगी."
'उसके हाथ कांपते थे'

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रोशन नशे के आदी अपने एक 14 वर्षीय छात्र के बारे में बताते हैं, "उसका शरीर एक माचिस की तीली की तरह हो गया था, हाथ कांपते थे जब डीजे कंसोल छूता था. ये सब ड्रग्स का असर था "
इस छात्र को रोशन ने संगीत से जोड़ा जिससे कुछ ही दिनों में उसकी हालात में सुधार दिखने लगा.
सीनियर इंस्पेक्टर सुहास गोखले कहते हैं, "अक्सर युवा पार्टियों में किसी अंजान व्यक्ति की बातो में आकर नशे का सेवन कर लेते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता कि कब वो इस नशे के आदी हो जाते हैं. "
रोशन ख़ुद एक पिता हैं. वो कहते हैं, "जब बच्चों को इतनी कम उम्र में नशे की लत से जूझता देखता हूं और उनके माता-पिता से उनके बारे में सुनता हूं तो दिल दुखता है."
पिता की पीड़ा

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नशे के आदी के एक युवा के पिता ने बीबीसी से कहा, "हमारा बेटा रात-रात भर जगा रहता था. खाना खाने से उसे अरुचि हो गई थी, जिसके कारण वो शारीरिक रूप से कमज़ोर हो गया था. चिड़चिड़ापन और छोटी-छोटी बातों पर ग़ुस्सा करना उसकी आदत हो गई थी."
रोशन कहते हैं कि अगर आप अपने बच्चों में ऐसे लक्षण देखते हैं उन्हें डांटने-फटकारने की बजाय उनसे दोस्त की तरह बात करनी चाहिए.

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जो नौजवान संगीत की मदद से नशे से छुटकारा पा चुके हैं उनके साथ मिलकर रोशन अब विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में जाकर युवाओं तक नशे से मुक्ति के लिए संगीत का सहारा लेने का संदेश पहुंचाएंगे.
सीनियर इंस्पेक्टर सूहास गोखले मानते हैं कि जब कोई नौजवान सैकड़ों लोगों को अपनी धुनों पर थिरकते देखेगा तो उसमें आत्मविश्वास आएगा और फिर धीरे-धीरे वो नशे की लत से भी छुटकारा पा लेगा.
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