प्रीतम आए नई धुनों के साथ

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- Author, श्राबंती चक्रवर्ती
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
संगीतकार प्रीतम जितने मशहूर अपनी धुनों के लिए हैं, उतना ही उनपर धुनों को कॉपी का इल्ज़ाम भी लगता रहा है.
पिछले एक साल से प्रीतम छुट्टी पर थे और अब इस छुट्टी से वापसी के लिए प्रीतम ने ‘एमटीवी कोक स्टूडियो’ का मंच चुना.
प्रीतम ने अपनी वापसी का ऐलान करते हुए बीबीसी को बताया कि इस बार वो अपनी नैसर्गिक धुनों के साथ वापसी करने वाले हैं.
वक्त की कमी थी

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ये पहला मौक़ा है जब प्रीतम कोक स्टूडियो के लिए काम करेंगे.
अगर इस कार्यक्रम के फ़ार्मेट की बात करें तो इसमें एक संगीतकार को मौका दिया जाता है कि वो अपनी ऐसी धुनें लोगों के सामने लाए जिन्हें पहले नहीं सुना गया है या फिर जिन्हें वो किसी फ़िल्म में इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.
इससे पहले राम सम्पत, विशाल शेखर, अमित त्रिवेदी और एआर रहमान जैसे जाने माने संगीतकार कोक स्टूडियो में अपना जलवा बिखेर चुके हैं. प्रीतम को इस मंच पर आने के लिए चार सीज़न लग गए.
जब प्रीतम से बारे में पूछा गया तो वे बोले, ''इससे पहले भी मैं कई बार कोक स्टूडियो आने के लिए तैयार था, लेकिन वक़्त की कमी की वजह से अबतक दूर रहा."
वो कहते हैं, "इस बार इसका कॉन्सेप्ट कुछ हटकर है और इसी वजह से मैं इसका हिस्सा बना. इस दफ़े यह 12 महीने तक चलने वाला है तो मेरे पास काफ़ी वक्त है बाकी काम करने के लिए.''
नई और अलग होंगी धुनें

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कोक स्टूडियो का मंच हो तो नई धुनों की बात आ ही जाती है. एक संगीतकार के लिए कोक स्टूडियो किसी चैलेंज से कम नहीं है, क्योंकि पूरे विश्व में कोक स्टूडियो का संचालन अलग अलग संस्थाओं द्वारा किया जाता है.
हर संगीतकार के सामने ये चुनौती होती है कि वो किसी विदेशी संगीत से प्रेरणा नहीं लेगा.
प्रीतम पर कई बार विदेशी धुनें कॉपी करने के आरोप लगे हैं. ऐसे में कोक स्टूडियो के मंच पर वो क्या लाएंगे, इस सवाल का जवाब देते प्रीतम कहते हैं, "फ़िलहाल तो कुछ ज़मीनी करूंगा, जिसमें फ़्यूज़न भी हो सकता है.''
वे आगे जोड़ते हुए कहते हैं कि फ़िल्मों में संगीत देते वक़्त आप स्क्रिप्ट से बंधे रहते हैं, जबकि कोक स्टूडियो में इस प्रकार का बंधन नहीं होगा. इसके बड़े फ़ार्मेट की वजह से हमें अपनी रचनात्मकता की आज़ादी मिलेगी.
छोटी-सी छुट्टी

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फ़िल्म ‘हॉलीडे’ के बाद से प्रीतम जैसे बॉलीवुड से गायब हो गए थे. आखिर वो कहां रहे इस सवाल के जवाब में वो कहते हैं, ''मुझे एक ब्रेक चाहिए था, हालांकि मैं वर्कहॉलिक हूं. लेकिन लगातार काम करने से बोरियत होने लगी थी, तो परिवार के साथ लंदन चला गया था.''
लंदन प्रवास के दौरान प्रीतम ने कोई भी गाना कंपोज़ नहीं किया. उन्होंने बताया,''इतने दिनों तक बिना काम किए रहने की वजह से मुझे डिप्रेशन महसूस होने लगा, तब मुझे अहसास हुआ कि मैं संगीत को मिस कर रहा हूं. उसके बाद मैंने फ़िल्में साइन करनी शुरू कर दीं.''
एक फ़िल्म में एक ही कंपोजर

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आजकल फ़िल्मों में एक नया ट्रेंड चल पड़ा है, जहां एक ही फ़िल्म में 3-4 संगीत निर्देशक काम कर रहे हैं.
प्रीतम कहते हैं, ''मुझे काफ़ी समय से पता था कि ऐसा दौर आएगा. इसकी वजह यह है कि इन दिनों निर्देशकों को सिर्फ़ हिट गाने चाहिए और जब एक ही फ़िल्म में इतने संगीत निर्देशक काम करते हैं, तो इसकी संभावना बढ़ जाती है. लेकिन जो अच्छे निर्देशक होंगे, वो ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उनको फ़िल्म में एक समान संगीत चाहिए."
वो कहते हैं, "यदि सिद्धांत की बात की जाए, तो संगीत निर्देशक को पहले से ही पता होना चाहिए कि फ़िल्म में कितने संगीत निर्देशक हैं."
प्रीतम ने यह भी साफ़ किया कि वो अपनी फ़िल्म में किसी और कंपोजर को लेना पसंद नहीं करते, लेकिन दोस्ती की ख़ातिर कई बार मेहमान संगीत निर्देशक के तौर पर किसी को साथ में ले लेना पड़ता है.
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