शादीशुदा हीरोइनें क्यों मंज़ूर नहीं: प्रियंका

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- Author, मधु पाल
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
हिंदी फ़िल्मों में 40 और 50 साल पार कर चुके हीरो को अपने से आधी उम्र की लड़कियों के साथ रोमांस करते तो बख़ूबी स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन उम्रदराज़ हीरोइनों से कैसा गुरेज़?
प्रियंका चोपड़ा बॉलीवुड के इसी चलन से नाराज़ हैं और इसमें बदलाव भी चाहती हैं.
लेकिन इसके लिए वह भारतीय दर्शकों की 'मानसिकता' को भी ज़िम्मेदार ठहराती हैं.
'समय के मुताबिक रोल'

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साल 2014 बॉक्स ऑफ़िस के लिहाज़ से प्रियंका के लिए अच्छा रहा.
उनकी फ़िल्म 'गुंडे' हिट रही तो 'मैरी कॉम' में उनके अभिनय की सराहना हुई. इसके साथ ही इस फ़िल्म ने अच्छा कारोबार भी किया.
बीबीसी से बात करते हुए प्रियंका ने कहा, "हमें ऐसी फ़िल्में स्वीकार करनी होगी जिसमें 30 या 40 पार हीरोइन भी रोमांस करे. शादीशुदा अभिनेत्रियों को स्वीकारना होगा."
"इसके अलावा अभिनेत्रियों को भी बदलते समय के हिसाब से अपने रोल चुनने चाहिए. जैसे 'डर्टी पिक्चर' में विद्या, 'क्वीन' में कंगना 'बर्फी' में मैं या 'चेन्नई एक्सप्रेस ' में दीपिका."
'स्टार पावर में पीछे'

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लेकिन प्रियंका यह भी मानती हैं कि स्टार पावर के मामले में हीरोइनें, हीरो से ख़ासी पीछे हैं.
वह कहती हैं, "बॉक्स ऑफिस पर हीरो की तुलना में हीरोइन को फ़िल्म चलाने में ज्यादा दिक्कत होती है. टॉप हीरो की फ़िल्में सप्ताहांत में ही 100 करोड़ रुपये बना लेती हैं, जबकि महिला प्रधान फ़िल्मों को लंबे समय तक हर क्षेत्र में प्रदर्शित करना पड़ता है, तब कहीं जाकर अच्छे नतीजे मिलते हैं."
"हालांकि अब बदलाव हो रहा है. मेरी फ़िल्म मैरी कॉम का शुरुआती व्यवसाय अन्य मेल सितारों की फ़िल्मों के बराबर ही था."
प्रियंका मशहूर अमरीकी टीवी नेटवर्क एबीसी टेलीविजन स्टूडियो से भी हाल ही में जुड़ी हैं.

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उन्होंने बताया, "जनवरी में मैं इसके लिए जा रही हूं . मुझे एक टैलेंट के रूप में साइन किया गया है. मेरे इर्द-गिर्द एक शो लिखा जाएगा, जिसका जॉनर फिलहाल तय नहीं है."
"कई लेखक निर्माता अपने आइडियाज़ मुझे बताएंगे. कुछ पसंद आया तो मैं 2015 में शो शुरू करूंगी."
निर्माता बनेंगी

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प्रियंका आने वाले समय में निर्माता बनने जा रही हैं. उनकी पहली फ़िल्म होगी 'मैडम जी'.
वह कहती हैं, "मैं नए कलाकारों को मौक़ा देना चाहती हूं. मेरी बहनें फ़िल्मों में आ रही हैं, लेकिन उनके लिए ये सब आसान है. मैं जब फ़िल्मों में आई तो मेरे आगे पीछे बॉलीवुड में कोई नहीं था. इस वजह से मैं युवा टैलेंट को मौक़ा देना चाहती हूं."
प्रियंका निर्माता के तौर पर लेखकों को बेहतर मौक़े और पैसे देने के हक़ में हैं.
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