'पीके'... हंगामा है क्यों बरपा?

आमिर ख़ान पीके

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    • Author, विकास पांडे
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

आमिर ख़ान अभिनीत हालिया रिलीज़ 'पीके' की तारीफ़ के साथ ही विरोध के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं. क्यों?

क्योंकि यह फ़िल्म ऐसे देश में लोगों की सामाजिक चेतना पर सवाल उठाती है जहां धर्म की जड़ें बेहद गहरी हैं.

इसमें आमिर ख़ान एक एलियन (दूसरे ग्रह का प्राणी) बने हैं जो धरती पर आता है और यहां उसका, 'रिमोट कंट्रोल'- एक ऐसा उपकरण जिसके बिना वह अपने ग्रह पर वापस नहीं जा सकता- चोरी हो जाता है.

काफ़ी मेहनत के बाद उसे पता चलता है कि लोगों का मानना है कि भगवान ही रिमोट ढूंढने में उसकी मदद कर सकते हैं.

आमिर ख़ान, अनुष्का शर्मा, पीके

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वह दूर-दराज़ के मंदिरों, मस्जिदों और चर्चों में जाता है. लेकिन उसे पता चलता है कि स्वयंभू गुरु या 'बाबा' लोगों को धोखा देने के लिए अंधविश्वास और 'ढोंग' का सहारा लेते हैं.

फ़र्क़

'पीके' ऐसी पहली फ़िल्म नहीं है जो भारत की धार्मिक आस्थाओं को आलोचना की दृष्टि से देखती है लेकिन फिर इसका इतना विरोध क्यों हो रहा है?

जवाब है इसकी सीधी-सादी कहानी. यह धर्म के अस्तित्व को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं देती बल्कि अंधविश्वासों पर सवाल उठाती है.

फ़िल्म को आलोचकों की मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है. ज़्यादातर ने ऐसे संवेदनशील मुद्दे को उठाने के लिए आमिर ख़ान और निर्देशक राजकुमार हिरानी की तारीफ़ की है.

फ़िल्म समीक्षक नम्रता जोशी कहती हैं कि इतने संवेदनशील मुद्दे को मुख्यधारा के सिनेमा में लाने का श्रेय इन दोनों को दिया जाना चाहिए.

आमिर ख़ान, राजकुमार हिरानी, पीके

वह कहती हैं, "आमिर एक सुपरस्टार हैं और इसलिए यह फ़िल्म लाखों लोगों तक पहुंच पाई है. इसने लोगों को सोचने पर मजबूर किया है. धर्म पर कई क्षेत्रीय फ़िल्में और पहले कुछ बॉलीवुड फ़िल्में बनाई गई हैं लेकिन फ़र्क़ आमिर खान के होने से पड़ा है."

समय

कई लोगों को रिलीज़ का समय भी महत्वपूर्ण लग रहा है. फ़िल्म ऐसे समय में रिलीज़ हुई है जब धर्मपरिवर्तन जैसे मुद्दों पर संसद में बहस हो रही है और कई धर्मगुरु बलात्कार और हत्या के आरोप में गिरफ़्तार हुए हैं.

जोशी कहती हैं कि बड़ी संख्या में लोग फ़िल्म देख रहे हैं और इससे पता चलता है कि लोग धार्मिक परंपराओं जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी बात और बहस करना चाहते हैं.

आमिर ख़ान पीके

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लेकिन सब इससे सहमत नहीं हैं. कई लोगों ने 'हिंदुत्व' और अन्य धर्मों को 'बदनाम करने' के लिए फ़िल्म की निंदा की है.

फ़िल्म रिलीज़ होते ही एक हैशटैग #बॉयकॉटपीके ने ट्रेंड करना शुरू कर दिया था.

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