यूट्यूब से कैसे होती है कमाई?

एक्शन जैकसन

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    • Author, श्वेता पांडेय
    • पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

नब्बे के दशक और 2000 के दशक के शुरुआती दौर में नई फ़िल्मों का ट्रेलर देखने के लिए लोग टीवी पर चैनल बदलते नज़र आते थे.

लेकिन अब ज़माना बदल गया है. छोटी बड़ी सभी तरह की फ़िल्मों के ट्रेलर सीधे यूट्यूब पर ही लॉन्च हो रहे हैं.

यहीं नहीं एआईबी, द वायरल फ़ीवर, द प्रीटेन्शस मूवी रिव्यू जैसे कार्यक्रम तो ख़ासतौर पर यूट्यूब पर ही प्रसारित होते हैं और इन्हें देखने वालों की भी तादाद कम नहीं है.

टीवीएफ़

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यहां तक कि पूरी की पूरी फ़िल्म ही इस प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध होती है.

लोग इस पर व्‍यक्तिगत चैनल बनाकर वीडियो ब्रॉडकास्‍ट कर रहे हैं इसके बदले में उन्‍हें यूट्यूब पैसा दे रहा है.

लेकिन सवाल है कि यूट्यूब पर अपना वीडियो या कार्यक्रम डालकर लोग पैसा कैसे कमाते हैं?

पढ़िए पूरी रिपोर्ट

पूरी की पूरी फ़िल्में यूट्यूब पर उपलब्ध होने से क्या निर्माता को नुक़सान नहीं होता?

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क्या इससे पायरेसी का ख़तरा नहीं पैदा होता?

एक आम व्यक्ति इस प्लेटफ़ॉर्म से कैसे पैसे कमा सकता है?

यूट्यूब के कंटेंट ऑपरेशंस प्रमुख सत्या राघवन के मुताबिक़ वीडियो बनाने वाले से लेकर विज्ञापन देने वाले भी यूट्यूब से अच्‍छी आमदनी कर रहे हैं.

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सत्या बताते हैं, "बीते एक साल में लोगों का रुझान इस ओर काफ़ी हुआ है. इस बात को बॉलीवुड ने भी काफ़ी अच्छी तरह से समझा और फ़िल्म निर्माता भी अपनी फिल्मों के प्रमोशन तक के लिए यूट्यूब के चैनल पर आने लगे हैं."

'नहीं होती पायरेसी'

'हैप्पी न्यू ईयर'

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पायरेसी के सवाल पर सत्या ने कहा, "पायरेसी का ख़तरा इससे नहीं हो सकता है, क्योंकि फ़िल्म बनने के बाद निर्माता-निर्देशक यूट्यूब से संपर्क कर लेते हैं, साथ ही 29 से 60 दिन का क़रार भी होता है. फिल्म सिनेमाहॉल से उतरने के बाद ही यूट्यूब पर आती है."

पैसा, यूट्यूब के वीडियो पर आने वाले विज्ञापनों से आता है.

सत्या बताते हैं कि विज्ञापनों से आने वाली आमदनी का 45 फ़ीसदी यूट्यूब और 55 फ़ीसदी वीडियो के निर्माता को जाता है.

डेल्ही बैली

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'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी फ़िल्म बना चुके अपूर्व लखिया कहते हैं, "यह एक बहुत अच्छा मंच है. यहां हम दर्शकों को वह भी दिखा सकते हैं, जिन्हें आम तौर पर नहीं दिखाया जा सकता. मसलन फिल्म की मेकिंग आदि."

वहीं ‘डेल्ही-बेली’ के निर्देशक अभि‍नय देव का कहना है, "यूट्यूब की वजह से आपका उत्पाद ज़्यादा से ज़्यादा दर्शक देख सकते हैं, यह बॉलीवुड के लिए भी बड़ा और अच्छा मंच है."

'सेंसरशिप नहीं'

हां, यूट्यूब से सीडी/डीवीडी पार्लर और बाज़ार पर ज़रूर विपरीत असर पड़ने की बातें हो रही हैं.

दिनों दिन इंटरनेट की बढ़ती रफ़्तार से अब इस प्लेटफ़ॉर्म पर वीडियो देख पाना उपभोक्ताओं को ज़्यादा सुविधाजनक लगने लगा है.

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लेकिन कई दफ़ा यूट्यूब पर ऐसी सामग्री आ जाती है जो कई लोगों को आपत्तिजनक लगती है.

अभी इस प्लेटफ़ॉर्म पर आने वाले वीडियो पर किसी तरह की सेंसरशिप का कोई प्रावधान नहीं है.

हां, अगर किसी को इन पर आपत्ति हो तो वो यूट्यूब को रिपोर्ट कर सकता है जिसे सही पाने पर उस वीडियो को हटा दिया जाता है.

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