ये फ़गले, फ़गले क्या है...

दिलीप कुमार और वैजयंती माला

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    • Author, पाउला रे
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

हिन्दी फ़िल्म के एक गाने में गायिका पूछती है '<link type="page"><caption> ये फ़गले, फ़गले क्या है</caption><url href="https://www.youtube.com/watch?v=bCloJm9gptM" platform="highweb"/></link>?' और पुरुष गायक इसे सामाजिक संदर्भ से जोड़ते हुए कुछ अजब-ग़ज़ब शब्दों में इसका जवाब देता है.

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर 'ये फ़गले, फ़गले क्या है?' को पुरुष गाते और महिला की सुरीली आवाज़ में जवाब आता तो गाना कितना असरदायक होता.

सामाजिक नियम कहते हैं कि सवाल पूछना महिलाओं का काम है और जवाब देना पुरुषों का विशेषाधिकार. क्या होगा अगर हम इस भूमिका को बदल दें?

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अमिताभ, दिलीप, जया

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अगर सवाल पुरुष पूछे और जवाब महिला दे तो क्या होगा?

बॉलीवुड का असर

बॉलीवुड न केवल हमारी जींस की लंबाई तय करता है, बल्कि यह भाषण भी देता है कि परिवार में किसे पैंट पहननी चाहिए और किसे नहीं.

बॉलीवुड फ़िल्म डॉन 2

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उसी तरह जैसे, एक फ़िल्म में मधुमती की भूमिका में वैजयंतीमाला को अपने प्रेमी आनंद (दिलीप कुमार) के लिए '<link type="page"><caption> घड़ी-घड़ी मेरा दिल धड़के</caption><url href="https://www.youtube.com/watch?v=0JRJHtk-ZkI" platform="highweb"/></link>' गाने दिया गया, जबकि रौबदार दिलीप कुमार का विशेषाधिकार रहा कि वो अपने प्यार का इज़हार '<link type="page"><caption> दिल तड़प तड़प के कह रहा है</caption><url href="https://www.youtube.com/watch?v=pbuqJU0oUrw" platform="highweb"/></link>..' के अंदाज़ में करे. ये मान लिया गया कि संकोची स्वभाव की मधुमति को हीरो का प्यार स्वीकार करना ही होगा.

अब '<link type="page"><caption> चुरा लिया है तुमने जो दिल को</caption><url href="https://www.youtube.com/watch?v=IEwrLaCYQkg" platform="highweb"/></link>' गाने को याद कीजिए. इसमें बोल्ड मानी जाने वाली ज़ीनत अमान प्रेमी की भूमिका निभा रहे विजय अरोड़ा से अपने प्यार का इज़हार करती हैं और वो भी कई लोगों की मौजूदगी में. वह समाज के क़ायदे-क़ानूनों के ख़िलाफ़ चलीं.

समय बदला, किरदार भी

ऐश्वर्या राय

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लेकिन समय बदला और इसके साथ किरदार भी. अब फ़िल्म में अभिनेत्री खुलकर अपने प्रेमी के प्रति अपने प्यार का इज़हार करती है, जैसा कि शाहरुख़ ख़ान अभिनीत फ़िल्म डॉन में करीना कपूर ने '<link type="page"><caption> ये मेरा दिल</caption><url href="https://www.youtube.com/watch?v=D2hHoxz9MbM" platform="highweb"/></link>' गाकर किया था.

2014 पर लौटते हैं. जब अक्षय कुमार (अरिजित सिंह की आवाज़) '<link type="page"><caption> अश्क न हो</caption><url href="https://www.youtube.com/watch?v=6UD1DFktKQ8" platform="highweb"/></link>' गाकर अपनी प्रेमिका सोनाक्षी सिन्हा के आंसू पोछते हैं और दुखी न होने को कहते हैं. अगर पहले के समय में इस स्थिति को फ़िल्माना होता तो यह हमेशा 'जिएं तो जिएं कैसे बिन आपके' जैसी होती.

हॉलीडे

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इस गाने में अक्षय सोनाक्षी से कहते हैं, "मुझे अपने नज़दीक पाने के लिए सोते वक़्त तकिए के नीचे मेरे ख़त रख लेना." तो क्या सिर्फ़ मुझे ही लग रहा है कि यह गाना भी आपको पुराने सामाजिक ढर्रे पर ले गया या आप भी ऐसा समझते हैं?

सोनाक्षी भी तो अपने रौबीले सेना के जवान से कह सकती है कि जब सीमा पर घर से दूर उसे उसकी (सोनाक्षी) की याद आए तो सोते समय तकिए के नीचे उसके लव लेटर्स रख दे. और मुझे उम्मीद है वो दिन बहुत दूर नहीं है.

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