धारावी की झुग्गियों से निकला रॉक बैंड

- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
दुनिया में सबसे ख़ूबसूरत संगीत कई बार शोषित वर्ग से ही आया है, फिर चाहे वो "जैज़" हो या "हिप हॉप".
मुंबई के धारावी इलाक़े की पहचान दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी झोपड़ी के तौर पर है लेकिन इन झुग्गियों से निकले हैं कुछ नन्हें कलाकार. धारावी से पैदा हुआ है एक म्यूज़िक बैंड जिसका नाम है "धारावी रॉक्स".
इस बैंड में 20-25 बच्चे हैं जिनकी उम्र आठ से 17 साल है. ये बच्चे कचरा उठाने वाले परिवारों से आए हैं और प्लास्टिक के ड्रम, कांच की बोतलें और टिन के डिब्बों से संगीत रचते हैं.
इनमें से ज़्यादातर बच्चे स्कूल जाते हैं और कुछ स्कूल के साथ-साथ घर की आर्थिक व्यवस्था ठीक ना होने के कारण काम भी करते हैं.
शुरुआत

एकॉर्न फ़ाउंडेशन संस्था 2005 में भारत आई थी. साल 2008 में एकॉर्न फाउंडेशन ने धारावी कम्यूनिटी सेंटर खोला जहाँ धारावी प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई. मकसद था कचरा उठाने वाले बच्चों को शिक्षा देना.
इन बच्चों को तब से शाम सात से रात नौ बजे तक विभिन्न विषयों जैसे गणित, अंग्रेज़ी, विज्ञान, संगीत, संस्कृति, संस्कार और फ़ुटबॉल की शिक्षा देने की शुरुआत.
हर विषय के लिए स्वयंसेवी आते है. तक़रीबन 20 लोग इस संस्था में काम करते हैं. लगभग 100 बच्चे इन सुविधाओं का लाभ उठाते हैं.
अभिजीत जेजूरीकर पेशे से ब्रांड मैनेजर हैं. अभिजीत तीन साल पहले नौकरी के सिलसिले में पुणे से मुंबई आए थे. एकॉर्न फाउंडेशन के निदेशक विनोद शेट्टी से एक मुलाकात के बाद अभिजीत बच्चों को संगीत सिखाने के लिए राज़ी हो गए.
अभिजीत बच्चों को बेकार पड़ी वस्तुओं से संगीत सिखाते हैं. महज़ तीन साल में अभिजीत ने इन बच्चों का पेशेवर बैंड "धारावी रॉक्स" तैयार कर दिया.
सफलता

धारावी रॉक्स अब एक पेशेवर बैंड बन चुका है, जिसने देश के कई शहरों जैसे दिल्ली, हैदराबाद और मुंबई के अनेक जगह पर कार्यक्रम पेश किए हैं. इन बच्चों ने आईपीएल में भी अपना संगीत पेश किया है.
हाल ही में धारावी रॉक्स ने मशहूर संगीतकार विशाल ददलानी के साथ शाहरुख़ ख़ान की आने वाली फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के गाने की रिकॉर्डिंग भी की.
धारावी रॉक्स के मैनेजर विनोद शेट्टी कहते हैं, "सलमान ख़ान ने ‘एक था टाइगर’ के समय स्पेशल स्क्रीनिंग रखी थी और कहा था कि वो चाहेंगे कि उनके संगीतकार साजिद-वाजिद अपनी फ़िल्म में धारावी रॉक्स को लाएं."
मुंबई के मशहूर नाइट क्लब ब्लू-फ्रॉग में जितने विदेशी कलाकार आते है वो इन बच्चों को कई तरह की कार्यशालाओं के ज़रिए प्रशिक्षण देते हैं जैसे बीट बॉक्सिंग, हिप हॉप.
इस बैंड में बेहद प्रतिभावान बच्चे हैं, जैसे ज़ीशान जो रैप लिखता है, इम्तियाज़ जो सबसे बढ़िया ड्रम बजाता है और मिनाज़ जो बहुत अच्छा गाता है.
‘धारावी रॉक्स’ और लड़कियां

इस बैंड में लड़कियों की हिस्सेदारी ना के बराबर है. लड़कियों के ना जुड़ने की वजह पर विनोद शेट्टी का कहना है, "धारावी में जहां हम काम करते हैं वहां लड़का और लड़की के साथ आने पर विरोध होता है."
वो कहते हैं, "जो लड़कियां आती हैं उन्हें अपनी जगह ख़ुद बनानी पड़ती है. उन पर माता पिता और समाज का दबाव होता है. इन लड़कियों को छेड़खानी का भी सामना करना पड़ता है. इस वजह से उनके मां बाप उन्हें नहीं भेजते."
शेट्टी साथ ही कहते हैं कि कुछ लड़कियों पर परिवार में छोटे बच्चे की ज़िम्मेदारी सौंप दी जाती है और उन्हें घर के कामकाज में व्यस्त रखा जाता है. पर अब लोगों का नज़रिया बदल रहा है और क़रीबन पाँच-आठ लड़कियां निरंतर शिक्षा के लिए आ रही है और उन्हें उम्मीद है की यह आंकड़ा बढ़ेगा.
भविष्य
फ़िलहाल इस 'धारावी रॉक्स' को राज्य सरकार से कोई सहयोग नहीं मिला है पर उन्हें पूरा विश्वास है की उन्हें जल्द ही सरकार से मदद मिलेगी.
'धारावी रॉक्स' जब किसी समारोह का हिस्सा बनता है तो वहां से उन्हें संस्था के लिए चंदा मिलता है जिससे संस्था का गुज़ारा होता है.
विनोद शेट्टी बहुत जल्द 'धारावी रॉक्स' के सभी बच्चों के नाम पर बैंक में खाते खोलेंगे.
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