'मुझे 'सी-ग्रेड' की फ़िल्मों का शाहरुख़ कहते थे'

जब हिंदी फ़िल्मों की बात आती है तो ज़हन में तुरंत 'मदर इंडिया', 'मुग़ल-ए-आज़म', '<link type="page"><caption> शोले</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/08/130813_sholay_3d_sk.shtml" platform="highweb"/></link>', 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे', 'वांटेड' और '<link type="page"><caption> दबंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2012/12/121221_dabangg2_review_pkp.shtml" platform="highweb"/></link>' जैसी फ़िल्मों के नाम दिमाग में आते हैं. लेकिन 'घर में हो साली तो पूरे साल दिवाली', 'यौवन के लुटेरे' और 'आई जवानी झूम के' जैसी फ़िल्मों के नाम किसी के ज़हन में नहीं आते.
कोई माने या न माने बॉलीवुड में बनने वाली 'सी-ग्रेड' फ़िल्में भी हिंदी सिनेमा का ही हिस्सा हैं.
एक वक्त ऐसा था जब इन फ़िल्मों का एक बड़ा बाज़ार था. इन फ़िल्मों की मांग थी. लेकिन धीरे धीरे इन फ़िल्मों का व्यापार कम होता चला गया.
आज की तारीख़ में ये फ़िल्में ना के बराबर बन रही हैं. हिंदी सिनेमा के इसी हिस्से पर रोशनी डालने की एक कोशिश में बीबीसी ने मुलाक़ात की 150 से भी ज़्यादा 'सी-ग्रेड' फ़िल्मों में काम कर चुके अभिनेता अमित पचौरी से.
अमित के नाम 'कमसिन', 'जंगली टार्ज़न' और 'पतली कमर, लंबे बाल' जैसी फ़िल्में हैं.
पढ़िए अमित की कहानी अमित की ही ज़ुबानी.
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मैंने अपने करियर की शुरुआत टीवी सीरियल 'ॐ नमः शिवाय' से की. उसके बाद मैंने कुछ और पौराणिक धारावाहिकों में भी काम किया. लेकिन फिर मुझे कुछ कम बजट की फ़िल्मों के ऑफर आए.
मैं इंडस्ट्री के बारे में कुछ नहीं जानता था. मुझे नहीं पता था कि ये किस तरह की फ़िल्में हैं.
मैंने एक के बाद एक कई फ़िल्में कर डालीं. जल्द ही मैं इन फ़िल्मों का एक बड़ा नाम बन गया.
90 के दशक में 'सी-ग्रेड' फ़िल्मों का बोलबाला था. बॉलीवुड के कई जाने-माने अभिनेता भी ऐसी फ़िल्में कर रहे थे.
मैं तो इन फ़िल्मों का एक ऐसा हीरो बन गया था जिसके नाम से ही फ़िल्म बिक जाया करती थी. इन फ़िल्मों से मैंने बहुत पैसा कमाया.
इन फ़िल्मों ने मुझे बहुत कुछ दिया है. काम करना सिखाया है. मुझे इस बात का कोई ग़म नहीं है कि मैंने इनमें काम किया.
आप यकीन नहीं मानेंगे कि इन फ़िल्मों में पैसों की कोई कमी नहीं थी. एक वक़्त ऐसा था जब मेरी गाड़ी का 'डैश बोर्ड' पैसों से भरा रहता था.
'सी-ग्रेड' के शाहरुख़ ख़ान

मैं इन फिल्मों का एक सुपरस्टार बन गया था. लोग कहते थे कि मैं 'सी-ग्रेड' फ़िल्मों का शाहरुख़ ख़ान हूं. लेकिन थोड़े समय बाद मुझे ये सुनकर इसलिए अच्छा नहीं लगता था क्योंकि अब मेरी समझ में आने लगा था कि मैं किस तरह के सिनेमा का हिस्सा हूं.
मेरी फ़िल्में और मेरा काम न तो मैं अपने परिवार को दिखा सकता था और न ही मेरे दोस्तों को. मेरे दोस्त भी मुझसे दूरी बनाने लगे थे.
क्योंकि मैं 'सी-ग्रेड' की फ़िल्मों का बड़ा स्टार बन गया था तो मेरे लिए अपनी इस छवि से बाहर निकलना बड़ा मुश्किल था.
आज की तारीख में मैं 'सी-ग्रेड' फ़िल्में नहीं करता. मैं कई टीवी धारावाहिकों में काम कर रहा हूं. लेकिन मुझे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है कि मैंने ऐसी फिल्मों में काम किया है.
हां ये ज़रूर है कि इन फ़िल्मों को करके मुझे कभी कोई आत्मसंतुष्टि नहीं हुई. लोग मुझे इज़्ज़त की नज़रों से नहीं देखते थे.
जब मैंने इन फ़िल्मों से निकलना चाहा तो किसी ने मेरा साथ नहीं दिया. मेरे कई दोस्त टीवी पर निर्देशन कर रहे थे.
मैंने उनसे कहा कि वो अपने सीरियल में मुझे कोई रोल क्यों नहीं देते. इस बात पर वो यही कहते थे कि मेरी इमेज 'सी-ग्रेड' फ़िल्मों की है, मैं उनके सीरियल में फिट नहीं बैठता.
अपनी इसी छवि को तोड़ने के लिए मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी.
पोर्न फ़िल्म भी हुई ऑफर
मैं अपने शरीर का काफी ध्यान रखता हूं. जिम जाता हूं. बॉडी बिल्डिंग करता हूं. हमेशा से ही मैं ऐसा ही रहा हूं.
जब मैं 'सी-ग्रेड' फ़िल्मों में काम कर रहा था उस वक़्त मेरे पास कई पोर्न फ़िल्मों के ऑफर भी आते थे.
एक बार तो एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी से भी मुझे पोर्न फ़िल्म का ऑफर भी मिला. ऑफर इतना बड़ा था कि अगर कोई और होता तो शायद ये पोर्न फ़िल्म कर लेता. लेकिन मैंने मना कर दिया.
'सी-ग्रेड' फ़िल्मों में काम करने की वजह से मेरी जो छवि बनी हुई है उसकी वजह से आज भी मुझसे 'सेक्शुअल फेवर्स' मांगे जाते हैं.
हर तीन दिन में मुझे इस तरह का ऑफर आता है. हमारी इंडस्ट्री में इस तरह के लोगों की कमी नहीं है.
लेकिन मैं इन बातों पर ध्यान नहीं देता. अब तो फिर भी लोगों की हिम्मत नहीं होती कि वो सीधे आकर मुझसे कुछ कहें.
पहले जब कोई ऐसा प्रस्ताव मेरे सामने रखता था तो स्थिति बड़ी ही अजीब सी हो जाती. जब मैं 'सी-ग्रेड' फ़िल्में करता था, उस वक़्त तो मुझे ऐसे-ऐसे फ़ोन आते थे कि मैं आपको बता भी नहीं सकता.
अब भी लड़कियां मुझे मैसेज करती हैं और लिखती हैं कि वो मुझसे प्यार करती हैं. कम से कम पहले से तो बेहतर है.
'अतीत से पीछा छु़ड़ाना नहीं चाहता'

आज की तारीख़ में किसी भी बात को छुपाना संभव नहीं है. एक अभिनेता के लिए तो बिलकुल भी नहीं.
मेरी 'सी-ग्रेड' की सभी फ़िल्में इंटरनेट पर मौजूद हैं. मेरा एक बेटा है. कई बार लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं नहीं चाहूंगा कि इंटरनेट से उन फ़िल्मों को हटा दूं.
मैं हमेशा कहता हूं कि मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहता. वो फ़िल्में मेरी औक़ात हैं. मैं आज जहां भी हूं उन्हीं 'सी-ग्रेड' फ़िल्मों के कारण हूं.
अमित पचौरी आज कई टीवी चैनल्स के लिए काम कर रहे हैं. वो धारावाहिक 'शपथ' का भी हिस्सा हैं.
(ये लेख बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए लिखने वाली रेखा ख़ान से बातचीत पर आधारित है. कहानी की अगली कड़ी में पढ़िए दो ऐसी अभिनेत्रियों की कहानी जो 'सी-ग्रेड' फ़िल्मों की चोटी की अभिनेत्रियां रही हैं)
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