फ्रांस में भी है हॉलीवुड का बुख़ार: कमल हासन

फिल्म और टेलीविज़न जगत के हालात पर रोशनी डालते सालाना कार्यक्रम फिक्की फ्रेम्स में अभिनेता कमल हासन भी शामिल हुए जिनकी फिल्म 'विश्वरूपम' पिछले दिनों ख़ासे विवादों में घिरी थी.
इस कार्यक्रम में हिंदुस्तानी फिल्मों पर हॉलीवुड के प्रभाव के बारे में बात हुई तो कमल ने कहा "ये हाल सिर्फ हिंदुस्तान का नहीं है, फ्रांस को भी इस बुख़ार से शिकायत है. इसलिए सिर्फ हिंदी सिनेमा को दोष मत दीजिए. हां, मुझे बॉलीवुड शब्द से परेशानी है क्योंकि ये दिखाता है कि हम कितने प्रभावित है."
जहां तक फिल्मों की कलात्मक आज़ादी की बात है तो कमल ने कहा कि पिछले दिनों विश्वरूपम के साथ जो हुआ वो अकेला ऐसा मामला नहीं था जब किसी फिल्म को सेंसर द्वारा पास किए जाने का बावजूद उसकी रिलीज़ में अड़चनें आई.
कमल के मुताबिक "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ छेड़छाड़ एक राष्ट्रीय मुद्दा है और इसे लेकर गुस्सा आना चाहिए. इसके लिए ज़रुरी नहीं कि मेरी तरह पैसों का नुकसान सहकर ही इसे समझा जाए."
आइटम नंबर पर सेंसर

इन दिनों फिल्म जगत में आइटम नंबर पर सेंसरशिप को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
ख़बर आई थी कि संजय गुप्ता की फिल्म 'शूट आउट एट वडाला' के आइटम गीत 'बबली बदमाश' को शुरुआत में ए सर्टिफिकेट दिया गया था.
हालांकि इस ख़बर को नकारते हुए निर्देशक ने बीबीसी को बताया कि इस गीत को यू सर्टिफिकेट मिला है.
इस मामले पर कमल हासन ने बताया कि सेंसर बॉर्ड के चेयरमैन रहे गोल्डी आनंद ने एक बार कहा था कि सभी एक्स रेटड फिल्म को पास कर दिया जाना चाहिए, उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था.
कमल के अनुसार व्यस्कों के एक वर्ग को ऐसी विषय वस्तु देखना पसंद है और क्योंकि इसे स्वतंत्रता नहीं दी जाती इसलिए ये किसी ना किसी तरीके से धीरे धीरे आम लोगों द्वारा देखी जाने वाली फिल्मों का हिस्सा बन जाते हैं और बच्चे भी इससे दूर नहीं रह पाते.
फिक्की फ्रेम्स में फिल्मकारों ने साफ किया है कि फिल्मों में आइटम नंबर एक अहम भूमिका निभाते हैं और सेंसर इन गानों को निशाना बनाने का विचार त्याग दे .
बीबीसी से बातचीत में सीबीएफसी के प्रवक्ता अंजुम राजाबली ने साफ किया है कि सेंसर का आइटम नंबर को शिकार बनाने का कोई इरादा नहीं है.












