फिल्मों में नग्नता पर इतना शोर क्यों !

मीडिया से चर्चा के दौरान बंगाली निर्देशक कौशिक मुखर्जी (बीच में)
इमेज कैप्शन, मीडिया से चर्चा के दौरान बंगाली निर्देशक कौशिक मुखर्जी (बीच में)
    • Author, समरा फातिमा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

लव इन इंडिया और गांडू जैसी चर्चित फिल्मों के निर्देशक कौशिक मुखर्जी का मानना है कि भारतीय फिल्मों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए दोहरी मानसिकता से निजात पाना जरूरी है.

12वें ओसियान सिनेफैन फिल्म महोत्सव में मीडिया से चर्चा के दौरान कौशिक, जो कि 'क्यू' नाम से जाने जाते हैं, ने ये बातें कहीं.

27 जुलाई से शुरु हुए इस महोत्सव में भारत के साथ-साथ एशिया और अरब सिनेमा की फिल्में भी दिखाई जा रही हैं.

कौशिक की फिल्में लव इन इंडिया और गांडू कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में दिखाई जा चुकी हैं और खासी वाहवाही भी बटोर चुकी हैं.

लव इन इंडिया कई पुरस्कार भी जीत चुकी है. लेकिन भारत में सेंसर बोर्ड ने फिल्म गांडू को अब तक रिलीज करने की इजाजत नहीं दी है. 'गांडू', 2010 में बनी बंगाली फिल्म है, जो अपनी भाषा और कई 'बेहद खुले सेक्स सीन' की वजह से विवादों में भी आई.

गांडू भी न्यूयॉर्क और बर्लिन सहित कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में दिखाई जा चुकी है.

कौशिक ने कहा, "हम खजुराहो जाते हैं और वहां नग्न मूर्तियों को देखकर उसे कला कहते हैं. जबकि फिल्मों में अगर नग्नता दिखाई जाए तो हम हाय तौबा मचाते हैं. हमें इस दोहरी मानसिकता से, इस पाखंड से निकलना होगा."

कौशिक के मुताबिक वक्त आ गया है, समय से पहले की फिल्में बनाने का. इससे सरकार और सेंसर बोर्ड पर अपने आपको बदलने का दबाव बढ़ेगा.

कौशिक उर्फ क्यू ने इस बात पर भी गहरा अफसोस जताया कि कई फिल्मकारों को भारतीय विषय वस्तु वाली, भारतीय पृष्ठभूमि पर बनाई जाने वाली फिल्मों के लिए विदेश से वित्तीय मदद लेनी पड़ती है. भारत में उन्हें ऐसी फिल्में बनाने के लिए कई बार पैसा ही नहीं मिल पाता.