'धोबी-घाट आम लोगों के लिए नहीं है'

- Author, स्वाति बक्षी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
धोबी-घाट की निर्देशक किरण राव फ़िल्म से पूरी तरह से संतुष्ट हैं. लेकिन साथ ही वो मानती हैं कि ये फ़िल्म सबके लिए नहीं है.
बीबीसी से ख़ास मुलाकात के दौरान किरण ने बताया, "जैसे मैंने इस फ़िल्म को बनाना चाहा था ये वैसे ही बनी है. मुझे ये पसंद आई, तो कुछ ख़ास लोगों को भी ये ज़रूर पसंद आएगी. लेकिन ये सब लोगों के लिए नहीं है."
किरण के मुताबिक धोबी-घाट की कहानी काफ़ी अलग किस्म की है और उसे दूसरी फ़िल्मों की तुलना में काफ़ी अलग अंदाज़ में पेश भी किया गया है.
किरण कहती हैं कि आमिर ख़ान प्रोडक्शंस की ही 'पीपली लाईव' की कामयाबी के बाद उन पर ज़्यादा दबाव आ गया है.
उन्होंने बताया, "ये फ़िल्म शायद पीपली लाईव से भी कम लोगों को अपील करें. क्योंकि उसमें उतना हास्य और इमोशन भी नहीं है. गाने भी नहीं है. धोबी-घाट परंपरागत मनोरंजक फ़िल्म नहीं है."
कलाकारों के चुनाव के बारे में किरण ने बताया कि मुन्ना के रोल के लिए उन्हें प्रतीक बब्बर ही ख़ासे जंचे. किरण के मुताबिक प्रतीक काफ़ी युवा और ताज़ा-तरीन कलाकार हैं, उनका चेहरा किरण को काफ़ी भाया.
आमिर के रोल के बारे में किरण कहती हैं, "आमिर एक पेंटर का किरदार निभा रहे हैं. बहुट जटिल रोल है. उनके हिस्से में ज़्यादा संवाद नहीं हैं. इस तरह का नाजुक रोल करना बहुत मुश्किल है."
आमिर के साथ काम करने को किरण एक यादगार अनुभव बताती हैं. वो कहती हैं कि सेट पर आमिर कभी भी बड़े सितारे की तरह बर्ताव नहीं करते. वो सच्चे मायनों में एक टीम प्लेयर हैं.
अपने ख़ुद के बारे में बताते हुए किरण ने बताया, "मुझे आर्ट्स में रुचि थी. मैं लिखती थी और ऐक्टिंग, फ़ोटोग्राफ़ी और संगीत का भी शौक था. मुझे पता था कि आर्ट्स में कुछ करना है. इसलिए मुझे लगा कि फ़िल्मों में कुछ करना अच्छा रहेगा. इसलिए मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया. तब मुझे पता चला कि मुझे फ़िल्म-मेकिंग ही करनी है."
किरण राव की पसंद की बात करें तो गर्म हवा उनकी पसंदीदा फ़िल्म है.












