पठान के साथ बॉलीवुड के 'किंग ख़ान' का कमबैक, क्या जीत पाएंगे फ़ैन्स का दिल

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- Author, गीता पांडे और ज़ोया मतीन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अगले सप्ताह रिलीज़ होने वाली बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख़ ख़ान की फ़िल्म 'पठान' कई सप्ताह पहले से अख़बारों की सुर्खियों में छाई हुई है.
इस फ़िल्म में लोगों की दिलचस्पी होना आश्चर्य की बात नहीं. शाहरुख़ ख़ान भारत के सबसे बड़े और चहेते बॉलीवुड स्टार हैं.
उन्हें लोग चार्मिंग, मज़ाकिया तो मानते ही हैं, ये भी कहा जाता है कि विदेशों में बॉलीबुड को बड़ी पहचान दिलाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.
उनके फ़ैन्स देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मौजूद हैं और उनकी लोकप्रियता केवल फ़िल्मों तक सीमित नहीं है. उनके फ़ैन्स उन्हें 'किंग ख़ान' या 'बॉलीवुड किंग' कहते हैं.
फ़िल्म पठान के साथ चार साल के ब्रेक के बाद पहली बार शाहरुख़ ख़ान एक बार फिर रुपहले पर्दे पर नज़र आने वाले हैं.

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फ़िल्म आने से पहले ही ट्रेलर'हिट'
बीते सालों में वो निजी और प्रोफ़ेशनल स्तर पर कई मुश्किलों से जूझ रहे थे. बीते साल उनके बेटे आर्यन ख़ान को पुलिस ने कथित तौर पर नशीले पदार्थ रखने के आरोप में पकड़ा था. आर्यन पर लगाए गए आरोप बाद में हटा लिए गए थे.
इससे पहले शाहरुख़ ख़ान की कई फ़िल्में बॉक्सऑफ़िस पर अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाई थीं.
चार साल के ब्रेक के बाद उनकी फ़िल्म को लेकर उनके फ़ैन्स में काफी उत्साह है और इसकी समीक्षा भी की जा रही है. इस फ़िल्म में शाहरुख़ के साथ बेहद लोकप्रिय कलाकार दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम भी हैं.
बीते साल दिसंबर में फ़िल्म का एक मिनट 25 सेकंड का टीज़र आया और इससे जुड़े गाने और प्रोमोशनल वीडियोज़ इंटरनेट पर दिखने लगे. तब से ये फ़िल्म सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है.
बीते सप्ताह इसका ट्रेलर रिलीज़ किए जाने के बाद से प्रशंसकों की दिलचस्पी इसमें और बढ़ गई है.
यूट्यूब पर फ़िल्म के ट्रेलर को 150 लाख बार देखा जा चुका है. वहीं शाहरुख़ ख़ान के ट्विटर हैंडल पर डाले गए फ़िल्म के ट्रेलर को अब तक 86 लाख बार देखा जा चुका है. वहीं तेलुगु और तमिल भाषा में इस फ़िल्म के ट्रेलर को 22 लाख और 11 लाख लोग देख चुके हैं.
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में फ़िल्म टिकटों की पहले ही 'अच्छी' बिक्री हो रही है.
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क्या है फ़िल्म की कहानी?
फ़ैन्स का कहना है कि ये फ़िल्म जेम्स बॉन्ड की फ़िल्मों और मिशन इम्पॉसिबल सिरीज़ की फ़िल्मों के मिश्रण के जैसा है और इसकी कहानी का अनुमान लगाना भी मुश्किल नहीं है.
कहानी एक चरमपंथी समूह के इर्दगिर्द घूमती है जो भारत को नेस्तानाबूद कर देना चाहता है. वो भारत पर "एक ऐसा हमला" करना चाहते है जिसके बारे में "हिन्दुस्तान ने कभी सोचा भी नहीं होगा."
अधिकारी इस हमले को नाकाम करना चाहते हैं लेकिन उनके हाथों से समय फिसल रहा है. और आतंकवादियों को पकड़ने की इस लड़ाई के बीच देश का भविष्य ख़तरे में हैं. ऐसी स्थिति में अधिकारी अपने सबसे बढ़िया लोगों को काम पर लगाते हैं.
इसके बाद पर्दे पर शाहरुख़ ख़ान दिखते और उनकी आवाज़ गूंजती है, "पार्टी अगर पठान के घर पर रखोगे तो मेहमाननवाज़ी के लिए पठान तो आएगा... और पटाखे भी लाएगा."
इसके बाद फ़िल्म में जासूस की भूमिका में शाहरुख़ की एंट्री होती है. गठीले बदन वाले 57 साल के शाहरुख़ फ़िल्म में ख़तरनाक स्टंट करते दिखते हैं. वो दुश्मनों का सफाया करते हैं, चलती हुए एक गाड़ी से दूसरी पर कूद जाते हैं, धमाकों के बीच दुश्मन का पीछा करते हैं और देश को बचाते हुए महिलाओं को भी दीवाना बनाते हैं.
इस जासूस के दुश्मनों के सरगने की भूमिका में जॉन अब्राहम दिखते हैं. जब दोनों एक दूसरे से भिड़ते हैं, उस वक्त पीछे से धड़कनें बढ़ाने वाला संगीत बजता है.
दो मिनट 34 सेकंड के ट्रेलर को देखने के बाद शाहरुख़ ख़ान के फ़ैन्स और आलोचक अब ये चर्चा कर रहे हैं कि फ़िल्म कितने बड़े पैमाने पर बनाई गई है. एक प्रशंसक ने कहा कि ये "पूरा पैसा वसूल" फ़िल्म है और वो जितनी जल्दी हो सके सिनेमाघर में ये फ़िल्म देखने के लिए बेसब्र हैं.
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फ़िल्म को लेकर विवाद?
लेकिन शुरुआत से ही फ़िल्म विवादों में घिरी रही.
शाहरुख़ पहले भी प्रेस और आलोचकों के निशाने पर रहे हैं. लेकिन हाल के दिनों में देश में बढ़ रही धार्मिक असहिष्णुता को लेकर उन्होंने जो टिप्पणी की उसके बाद वो हिंदू दक्षिणपंथी समूहों के निशाने पर आ गए और उन पर निजी और संगठित तौर पर हमले होने लगे.
कोलकाता फ़िल्म फ़ेस्टिवल में शाहरुख़ ने कहा था, "सिनेमा और अब सोशल मीडिया मानवीय अनुभव और भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है. अब हमारे समय के सामूहिक नैरेटिव को सोशल मीडिया आकार दे रहा है. इस धारणा के विपरीत कि सोशल मीडिया सिनेमा को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा, मेरा मानना है कि सिनेमा को अब और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी."
'फ़िल्म इंडस्ट्री का ध्रुवीकरण हुआ है'
फ़िल्म आलोचक और लेखक सैबल चटर्जी कहते हैं, "उनके बयान को सांप्रदायिक रंग दिया गया और उसे उनकी धार्मिक पहचान और छवि से जोड़कर देखा गया."
वो कहते हैं कि कुछ साल पहले बॉलीवुड को उस जगह के तौर पर देखा जाता था जो धार्मिक और राजनीतिक विचारों से प्रभावित हुए बिना काम करती है और "उसके लिए केवल मनोरंजन ही सबसे अहम हुआ करता था." वो कहते हैं कि इस इंडस्ट्री का भी अब ध्रुवीकरण हो रहा है."
वो कहते हैं, "ख़ान बचे हुए उन चुनिंदा कलाकारों में से एक हैं जो बॉलीवुड के उस दौर को अभी भी संजोए हुए हैं और जिसे कुछ लोग पूरी तरह बदलना चाहते हैं. यही कारण है कि वो शाहरुख़ को बर्दाश्त नहीं कर पाते."
ये फ़िल्म अपने नाम 'पठान' को लेकर चर्चा में रही जो एक मुस्लिम शब्द है. कट्टरपंथी हिंदू समूहों ने इस फ़िल्म के एक गीत "बेशरम रंग" के ख़िलाफ़ भी विरोध प्रदर्शन किए और सोशल मीडिया पर इसे लेकर आलोचना की है.
उनका कहना था कि इस गीत में दीपिका पादुकोण ने भगवा रंग की बिकिनी पहनी है जिससे हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं.
उनका आरोप था कि शाहरुख़ ने हिंदुओं का अपमान किया है क्योंकि भगवा रंग को हिंदू धर्म से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि फ़िल्म में दीपिका ने कई बार कपड़े बदले हैं और तीन मिनट 13 सेकंड के इस गाने में आख़िरी हिस्से में दीपिका भगवा रंग की बिकिनी पहने दिखती हैं.

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बुर्ज ख़लीफ़ा में ट्रेलर देखने जुटी भीड़
विरोध करने वालों की मांग है कि इस गाने को बिना हटाए फ़िल्म को रिलीज़ नहीं किया जाना चाहिए. कुछ ने इसे बैन करने की मांग की है.
प्रदर्शनकारियों ने विरोध के दौरान शाहरुख़ ख़ान के पुतले जलाए. साथ ही इस मुद्दे को लेकर कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है और आरोप लगाया गया कि ये गाना हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत करती है और इसके ज़रिए फ़िल्म अश्लीलता को बढ़ावा देती है.
'पठान' फ़िल्म के बॉयक़ॉट की भी मांग उठ रही है और इसे लेकर सोशल मीडिया पर कई हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं.
लेकिन जैसे-जैसे 'पठान' के रिलीज़ की तारीख़ नज़दीक आ रही है शाहरुख़ और फ़िल्म निर्माता विवादों को नज़रअंदाज़ करते हुए इसके प्रोमोशन में जुट गए हैं.
फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप के दौरान फ़ुटबॉल प्लेयर वाएने रूनी एक वीडियो में शाहरुख़ ख़ान के साथ नज़र आए. वीडियो में शाहरुख़ के बाद उन्होंने हिंदी में कहा, "अपनी कुर्सी की पेटी बांध लो, मौसम बिगड़ने वाला है."
इसी सप्ताह दुबई के बुर्ज ख़लीफ़ा में 'पठान' का ट्रेलर दिखाया गया जिसके बाद वहां मौजूद बड़ी भीड़ ने शाहरुख़ का जोरदार अभिनंदन किया.
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ढाई अरब रुपये के बजट की 'पठान' फ़िल्म के साथ शाहरुख़ की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हैं. कई लोगों को ये भी संदेह है कि विवादों में घिरने के कारण ये फ़िल्म चलेगी भी या नहीं.
हालांकि सैबल चैटर्जी इससे सहमत नहीं है. वो कहते हैं, "शाहरुख़ ख़ान केवल एक कलाकार नहीं हैं बल्कि वो एक ब्रांड हैं. वो बॉलीवुड के सबसे बड़े ब्रांड तो हैं ही देश के भी सबसे बड़े ब्रांड में शुमार हैं."
'डेस्परेटली सीकिंग शाहरुख़ ख़ान' किताब की लेखक शरण्या भट्टाचार्य कहती हैं, "शाहरुख़ के फ़ैंस कभी उन्हें धर्म या राजनीति के चश्मे से नहीं देखते. वो फ़िल्म का पहले दिन का पहला शो देखने की पूरी कोशिश करेंगे क्योंकि वो लंबे समय तक पर्दे पर उन्हें मिस कर रहे थे."

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शाहरुख़ को थ्रिलर में पसंद करेंगे लोग?
हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि चार साल के अंतराल के बाद रुपहले पर्दे पर लौटने के लिए थ्रिलर फ़िल्म चुनना क्या शाहरुख़ का सही फ़ैसला है?
एक पूरी पीढ़ी के लिए शाहरुख़ ख़ान की छवि एक रोमान्टिक हीरो की रही है जिसने पर्दे पर प्रेम, प्रेम की भाषा और उसके साथ आने वाली खुशी और परेशानियों को परिभाषित किया है.
उनके फ़ैन्स में बड़ी संख्या महिलाओं की है जो शायद उन्हें एक ऐक्शन हीरो के तौर पर न देखना चाहें.
कुछ दिन पहले शाहरुख़ ख़ान ने कहा था कि वो हमेशा से एक ऐक्शन हीरो बनना चाहते थे और इसलिए उनकि लिए ये फ़िल्म "एक सपने का सच होना" है.
सैबल चटर्जी कहते हैं कि इस फ़िल्म को लेकर उनके भी कुछ संदेह हैं लेकिन ये फ़िल्म अपने आप में एक "एक साहसिक फ़ैसला है."
वो कहते हैं कि शाहरुख़ फ़िल्मों की स्क्रिप्ट के साथ एक्सपेरिमेन्ट करते रहे हैं, उन्होंने 'माय नेम इज़ ख़ान', 'चक दे इंडिया' और 'लव यू ज़िंदगी' जैसी फ़िल्मों में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाई हैं.
वो कहते हैं कि 'पठान' के साथ शाहरुख़ खुद अपनी "छवि बदलने की कोशिश कर रहे हैं."
"लेकिन अपने करियर के इस पड़ाव में वो ऐसा करने का जोख़िम ले सकते हैं. उन्हें डर नहीं है और वो एक्सपेरिमेन्ट कर रहे हैं. उनके पास खोने को कुछ भी नहीं है."
हालांकि सैबल चटर्जी कहते हैं कि उनका ये एक्सपेरिमेन्ट सफल होगा या नहीं ये अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन एक बात को स्पष्ट है कि "आप शाहरुख़ की फ़िल्म मिस नहीं कर सकते."
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