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सूर्यवंशी के 100 करोड़ पार होने पर बोले अक्षय - हिट का फ़ॉर्मूला किसी के पास नहीं
- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
कोरोना काल में दिवाली पर सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई अक्षय कुमार की फ़िल्म सूर्यवंशी ने 100 करोड़ से अधिक कमाई कर फ़िल्म इंडस्ट्री का हौसला बढ़ाया है.
पर सुपरस्टार अक्षय कुमार के हिसाब से फ़िल्म की सफलता का फार्मूला अभी तक किसी को नहीं मिला है. करीब डेढ़ साल से भारत में सिनेमाघर खुलने का इंतज़ार कर रहे थे. कोरोना महामारी के कारण महाराष्ट्र में भी सिनेमाघर लंबे समय के लिए बंद रहे
आख़िरकार पिछले महीने महाराष्ट्र सरकार ने सिनेमाघरों को आधी सीटों के साथ खुलने की अनुमति दी थी. सूर्यवंशी पहली बड़ी फ़िल्म रही जिसने दर्शकों को सिनेमाघर में एक बार फिर से बुलाने का ज़िम्मा उठाया.
इससे पहले अक्षय कुमार की फ़िल्म बेलबॉटम ने एक कोशिश की थी पर कई राज्यों में सिनेमाघर बंद होने के कारण फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर बहुत अच्छा नहीं कर पाई.
लेकिन सूर्यवंशी ने पहले सप्ताह में ही सौ करोड़ रुपए की कमाई करके फ़िल्म निर्माताओं का हौला बढ़ाया है.
ये अक्षय कुमार के करियर की 15 वी फ़िल्म है जो 100 करोड़ क्लब में शामिल हुई है. इससे पहले एयरलिफ्ट, गोल्ड, हॉलीडे, रॉउडी राठौर, हॉउसफुल सीरीज़, रुस्तम, जॉली एल एल बी, केसरी, टॉयलेट एक प्रेम कथा सौ करोड़ रुपए कमाई का आंकड़ा पार कर चुकी हैं.
अक्षय कुमार दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहते है, "मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूँ कि दर्शकों ने मुझे इतना प्यार दिया. एक महामारी से निकल कर दर्शकों का सिनेमाघर जाना, टिकट ख़रीदना और परिवार संग फ़िल्म देखना अब नया-नया फिर से शुरू हुआ है. मैं इसके लिए दर्शकों का आभारी हूँ."
सूर्यवंशी में अक्षय कुमार के साथ अजय देवगन और रणवीर सिंह भी मेहमान भूमिका में नज़र आए हैं. स्टार पावर और फ़िल्मों पर टिपण्णी करते हुए अक्षय का कहते हैं कि उनके हिसाब से स्टार पावर कुछ नहीं है क्यूंकि असली पावर स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले में होता है.
अक्षय कुमार का मानना है कि निर्देशक और लेखक पहले आते है और बाद में अभिनेता आते है.
30 साल के फ़िल्मी करियर में अक्षय कुमार ने कई सफल फ़िल्में दी है और कई यादगार कल्ट फ़िल्मों का हिस्सा रहे है. पर फ़िल्म के सफलता के आकलन से वो अनजान है.
वो कहते है कि, "फ़िल्म की सफलता का फॉर्मूला किसी के बाप को नहीं पता है. कोई नहीं बता सकता कि फ़िल्म चलने का क्या कारण है? मैं अपने करियर के हिसाब से बता सकता हूं, मैंने देखा है स्क्रिप्ट अच्छी होती है, फ़िल्म अच्छी दिखती है लोग ट्रायल पर वाह-वाह करते है और उस फ़िल्म को कुत्ता तक नहीं आता देखने. वही ऐसी फ़िल्मों का ट्रायल होता है जहां लोग मुंह छुपा-छुपा कर भागते है कि कोई पूछ ना ले कि फ़िल्म कैसी है और वो फ़िल्में हिट हो जाती है."
अक्षय कुमार का मानना है कि जो फ़िल्में हसी ख़ुशी बन जाती है उसकी किस्मत अच्छी होती है.
अक्षय कुमार फ़िल्म इंडस्ट्री के सबसे सफल सुपरस्टार माने जाते है जो सालाना चार से पांच फ़िल्में करते है. उनकी फ़िल्मों की कमाई 100 करोड़ से अधिक होती है. पैसे पर निर्भर फ़िल्म उद्योग में 100 करोड़ का आंकड़ा अक्षय कुमार को प्रभावित करता है. फ़िल्मों की कमाई उन्हें हौसला देती है कि वो और बड़ी फ़िल्में बनाये और बड़ी फ़िल्मों में खर्चा करे.
अक्षय कहते है, "इस फ़िल्म इंडस्ट्री में आया हूं, इस फ़िल्म इंडस्ट्री में कमाऊंगा और इस फ़िल्म इंडस्ट्री में ही लगाऊंगा. मैं तो चाहता हूं और सिनेमाघर खुलें. फ़िल्में और बड़ी हों और उनकी कमाई 300-400 क्या 800 करोड़ तक पहुंचे क्योंकि भारत की क्षमता बहुत है पर सिनेमाघर कम है."
महाराष्ट्र रीजन फ़िल्म कारोबार के लिए बहुत ही अहम रीजन माना जाता है पर फिलहाल महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र में 50 प्रतिशत सीटों की ही अनुमति दी है और अक्षय कुमार कहते हैं कि वो सरकार से 100 प्रतिशत सीटें खोलने की अपील नहीं करेंगे. उनका मानना है कि महाराष्ट्र सरकार राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य को नज़र में रखकर सारे कदम उठा रही है और जो भी उनका फैसला होगा वो स्वीकार होगा.
कई फ़िल्मों में पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा चुके अक्षय कुमार के लिए सबसे पसंदीदा पुलिस किरदार जंज़ीर में अमिताभ बच्चन का है. वहीं उन्हें जगदीश राज और इफ़्तेख़ार भी बहुत पसंद है. उनका कहना है कि जो पर्सनालिटी पुलिस वालों की इन अभिनेताओं ने स्क्रीन पर बनाई है वो आज भी अभिनेता अपनाते है.
जगदीश राज और इफ़्तेख़ार ने फ़िल्मों में इतने पुलिस किरदार किए हैं कि वो अपनी गाड़ियों में पुलिस की वर्दी रखते थे. अक्षय कुमार ने भी 90 के दशक में कई पुलिस वाले किरदार किए है और शुरुआत में वह भी पुलिस की वर्दी अपनी गाड़ी में रखते थे.
अलग-अलग किरदार निभाने और कहानियों का हिस्सा बनने के लिए आतुर अक्षय कुमार को क्षेत्रीय फ़िल्मों में बतौर कलाकार काम करने में भी कोई परहेज़ नहीं है.
वो मराठी, पंजाबी, कन्नड़, तमिल में काम कर चुके है. उनके हिसाब से सिर्फ़ भोजपुरी फ़िल्म रह गई है. अगर उन्हें अच्छा ऑफर मिला तो वो क्षेत्रीय फ़िल्मों में ज़रूर काम करेंगे.
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