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ब्रिटनी स्पीयर्स: अमेरिकी पॉप सिंगर ने क्यों कहा 'मुझे ज़िंदगी जीने दो'
अमेरिकी पॉप स्टार ब्रिटनी स्पीयर्स ने लॉस एंजेल्स की एक कोर्ट में कहा है कि उन्हें उनकी "ज़िंदगी वापस चाहिए." उन्होंने अदालत से कहा कि वो चाहती हैं कि उनके बिज़नेस और उनकी ज़िंदगी के 13 साल लंबे 'अपमानजनक प्रबंधन' को ख़त्म किया जाए.
बीते कई सालों से ब्रिटनी के लीगल गार्जियन (क़ानूनी तौर पर उनके अभिभावक) उनके करियर के फ़ैसले ले रहे हैं. साल 2008 में ब्रिटनी मानसिक स्वास्थ्य की परेशानी से जूझ रही थीं, उस दौरान कोर्ट ने कंज़र्वेटरशिप नाम की एक प्रक्रिया के तहत उनकी देखरेख के लिए कंज़र्वेटर यानी क़ानूनी अभिभावक नियुक्त किए थे.
कोर्ट ने अपने आदेश में ब्रिटनी की संपत्ति और उनकी ज़िंदगी के अहम फ़ैसले लेने का हक़ उनके पिता जेमी स्पीयर्स को दिया था. लेकिन बाद में ब्रिटनी ने अपने पिता को इस भूमिका से बाहर करने की गुज़ारिश की.
अब ब्रिटनी के फैन्स #FreeBritney नाम से एक अभियान शुरू कर उनके पिता को उनकी तरफ से फ़ैसले लेने के हक़ से बाहर करने की मांग कर रहे हैं.
इस साल ब्रिटनी की ज़िंदगी और उनके गार्जियनशिप को लेकर फ्रेमिंग ब्रिटनी स्पीयर्स नाम की एक डॉक्यूमेन्ट्री रिलीज़ की गई है जिसके बाद एक बार फिर ब्रिटनी की इस लंबी क़ानूनी लड़ाई ने लोगों का ध्यान खींचा है.
शुक्रवार को ब्रिटनी स्पीयर्स ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट कर अपने फैन्स से भी माफी मांगी है और कहा है कि "ऐसा दिखावा करने के लिए कि मेरे साथ सब बढ़िया है, मैं माफ़ी चाहती हूं."
उन्होंने कहा कि अपने आत्मसम्मान के कारण उन्होंने इससे पहले कभी इस बारे में बात नहीं की.
उन्होंने लिखा, "ये मुद्दा मैं अपने फैन्स से सामने ला रही हूं क्योंकि मैं नहीं चाहती कि वो ये सोचें कि मेरी ज़िंदगी में सब कुछ बढ़िया है. ऐसा कतई नहीं है. अगर आप मेरे बारे में कुछ ख़बर पढ़ें तो आपको वाकई में पता होना चाहिए कि ऐसा नहीं है."
क्या है गार्जियनशिप क़ानून?
अगर कोर्ट ये मानती है कि कोई व्यक्ति अपने लिए उचित फ़ैसला नहीं ले सकता तो वो गार्जियनशिप क़ानून (इसे अमेरिका में कंज़र्वेटरशिप भी कहते हैं) के तहत उस व्यक्ति का एक क़ानूनी अभिभावक तय कर देती है. कोर्ट के आदेश पर क़ानूनी अभिभावक व्यक्ति के लिए सभी फ़ैसले ले सकते हैं. मानसिक रूप से बीमार और विक्षिप्त लोगों से जुड़े मामलों में कोर्ट अधिकतर इस तरह के फ़ैसले देती है.
ब्रिटनी के मामले में गार्जियनशिप को दो हिस्सों में रखा गया है- पहला उनकी संपत्ति और पैसों के मामले में और दूसरी उनकी निजी जिंदगी को लेकर. इस नई क़ानूनी व्यवस्था के तहत साल 2008 से अब तक ब्रिटनी का अपने पैसों पर भी कोई नियंत्रण नहीं है.
शुरुआत में इन दोनों ही मामलों में ब्रिटनी स्पीयर्स के गार्जियन उनके पिता जेमी स्पीयर्स ही थे. लेकिन साल 2019 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कहा कि वो उनकी बेटी के निजी फ़ैसले लेने में असमर्थ हैं.
उसके बाद जूडी मोन्टेगोमरी अस्थायी तौर पर ये काम करने लगीं जो एक पेशेवर (केयर प्रोफ़ेशनल) थीं, लेकिन ब्रिटनी ने गुज़ारिश की कि उन्हें स्थायी तौर पर ये काम करने दिया जाए.
कोर्ट के गोपनीय दस्तावेज़ों के आधार पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा है कि ब्रिटनी ने गार्जियनशिप के ख़िलाफ़ को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन उस पर मीडिया पर उतनी चर्चा नहीं हुई है. इन दस्तावेज़ों से पता चलता है कि गार्जियनशिप के कारण वो निजी ज़िंदगी के मामूली फ़ैसले तक नहीं ले पातीं, जैसे किसके साथ डेट पर जाना है या किचन की अलमारी का रंग क्या हो तक.
साल 2016 की एक रिपोर्ट में कोर्ट के जांचकर्ता ने लिखा "ब्रिटनी को लगता है कि गार्जियनशिप उनके ख़िलाफ़ दमनकारी और नियंत्रित करने वाला हथियार बन गया है." रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटनी ने गार्जियनशिप के बारे में कहा था, "उनकी ज़िंदगी पर हद से ज़्यादा नियंत्रण किया जा रहा है."
नवंबर 2020 में जज ने जेमी स्पीयर्स को ब्रिटनी के अभिभावक के तौर पर हटाने से इनकार कर दिया और बेसेमेयर ट्रस्ट नाम की एक फाइनेन्शियल कंपनी को उनकी संपत्ति के मामले में सह-अभिभावक बना दिया.
इसके एक महीने बाद कोर्ट ने जेमी स्पीयर को दिए गार्जियनशिप के हक़ को सितंबर 2021 तक के लिए बढ़ा दिया था.
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ब्रिटनी को गार्जियन की ज़रूरत क्यों पड़ी?
साल 2007 से ब्रिटनी के व्यवहार में काफी तब्दीलियां आनी शुरू हुईं. इसी साल ब्रिटनी और उनके पति केविन फेडेरलाइन के बीच तलाक हुआ. इस क़ानूनी लड़ाई में उनके दोनों बच्चों को पालने का हक़ उनके पति के पास चला गया.
इसके बाद सार्वजनिक तौर पर कई ऐसी घटनाएं हुईं जिनके बाद ब्रिटनी के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल किए जाने लगे. एक बार उन्होंने अपना सिर मुंडवा लिया और एक बार उन्होंने अपने छाते से एक फ़ोटोग्राफ़र की कार पर हमला कर दिया.
साल 2008 में दो बार ऐसा हुआ जब मानसिक समस्या के मूल्यांकन के बाद उन्हें कुछ वक्त के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. इनमें से एक बार उन्होंने अपने बेटे को जाने देने से इनकार कर दिया था और पुलिस के साथ उनकी बहस हुई
इस वक्त तक उनके पिता को अस्थायी तौर पर उनके गार्जियन के रूप में नियुक्त किया जा चुका था, इसके बाद उन्हें लंबे वक्त के लिए उनका गार्जियन बना दिया गया. लेकिन इस व्यवस्था के तहत उन्हें किन बातों का हक़ दिया गया इसके बारे में सार्वजनिक तौर पर अधिक जानकारी कभी सामने नहीं आई.
अपने पिता की गार्जियनशिप के दौरान भी ब्रिटनी से पास काम की कोई कमी नहीं रही. उन्होंने इस दौरान तीन एलबम रिलीज़ किए, लास वेगास रेज़िडेन्सी के साथ कॉन्सर्ट के लिए लंबा अनुबंध किया, वो कई बार टेलीविज़न शो में देखी गईं, अमेरिका में एक्स फैक्टर नाम के शो में बतौर जज भी उन्होंने काम किया.
ब्रिटनी की कमाई से जुड़े दस्तावेज़ों के आधार पर बिज़नेस इनसाइडर ने एक रिपोर्ट छापी थी जिसमें कहा गया कि साल 2018 में ब्रिटनी की कुल संपत्ति क़रीब 5.9 करोड़ डॉलर थी. कोर्ट में दाखिल दस्तावेज़ों के आधार पर एंटरटेनमेंट टुनाईट की एक रिपोर्ट के अनुसार इसी साल ब्रिटनी ने क़ानूनी लड़ाई में क़रीब 11 लाख डॉलर खर्च किए थे.
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क्या है #FreeBritney अभियान?
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार #FreeBritney शब्द का इस्तेमाल साल 2009 में पहली बार किया गया था. इसका इस्तेमाल सबसे पहले एक फैन वेबसाइट पर किया गया था जहां ब्रिटनी के फैन्स उनके लिए की गई गार्जियनशिप व्यवस्था से ख़फ़ा थे.
इसके बाद इसका इस्तेमाल साल 2019 में उस वक्त किया गया जब लास वेगास रेज़िडेन्सी के साथ किया अपना अनुबंध बीच में ही तोड़ते हुए ब्रिटनी एक मेन्टल हेल्थ सेंटर में भर्ती हुईं. उनका कहना था कि अपने पिता की लगातार गिरती सेहत के कारण उन्हें मानसिक तनाव हो रहा है.
ब्रिटनी के कई फैन्स का कहना है कि गार्जियनशिप की व्यवस्था उन पर जबरन थोपी गई है. कई फैन्स ने इस मांग के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चला कर व्हाइट हाउस को हज़ारों की संख्या पत्र लिख ब्रिटनी की गार्जियनशिप ख़त्म करने की गुहार लगाई.
कोर्ट में जिस दिन ब्रिटनी के मामले की सुनवाई होती है उस दिन कोर्ट के बाहर सैकड़ों की संख्या में उनके #FreeBritney अभियान का समर्थन करने वाले उनके फैन्स प्रदर्शन करते हैं.
पैरिस हिल्टन, बेटी मिल्दर और माइली साइरस जैसी कई जानीमानी हस्तियों ने भी इस अभियान को अपना समर्थन दिया है.
इन सबके बारे में खुद ब्रिटनी क्या कहती हैं?
ब्रिटनी स्पीयर्स ने कई सालों तक न तो इस अभियान को लेकर और न ही अपने गार्जियनशिप को लेकर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा. उनकी कोशिश रही कि भले ही कोर्ट के मामले को लेकर ख़बरों में किसी भी तरह की चर्चा हो, वो जब ऑनलाइन दिखें तो वो खुश दिखें.
उनके कुछ फैन्स मानते हैं कि उन्होंने गुप्त संदेश देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया.
वो उदाहरण के तौर पर फैन्स को दी गई ब्रिटनी की उन टिप्पणियों की तरफ इशारा करते हैं जिनमें फैन्स ने उन्हें कहा था कि अगर उन्हें मदद चाहिए तो वो अपने पोस्ट में पीले रंग की पोशाक पहनें.
इस साल की शुरुआत में ब्रिटनी के वकील ने उनकी तरफ से कोर्ट से गुज़ारिश की थी कि गार्जियनशिप के बारे में 'कोर्ट सीधे उनकी बात सुने'.
लॉस एंजेल्स में हुई इस सुनवाई के दौरान ब्रिटनी ने कहा कि 'हद से ज़्यादा नियंत्रण वाली' इस व्यवस्था को ख़त्म किया जाए ताकि वो एक बार फिर शादी कर सकें और बच्चे पैदा कर सकें.
कोर्ट के दिए 20 मिनट के अपने भावुक बयान में ब्रिटनी ने कहा, "मैं चाहती हूं कि ये गार्जियनशिप की व्यवस्था ख़त्म की जाए और इस मांग के लिए मेरा मूल्यांकन न किया जाए."
ब्रिटनी ने इस व्यवस्था की आलोचना की और कहा कि इसके कारण एक तरह से उन्हें बांध कर रख दिया गया है और उन्हें एक बार फिर मां बनने से रोका जा रहा है.
उन्होंने कहा, "इस गार्जियनशिप ने मुझे फायदा कम और नुक़सान अधिक पहुंचाया है. मुझे भी ज़िंदगी जीने का हक़ है."
अदालत ने ब्रिटनी से कहा है कि उनकी तरफ से वकील गार्जियनशिप को ख़त्म करने के लिए औपचारिक दर्ख्वास्त दे सकते हैं.
ब्रिटनी के बयान के बाद उनके पिता के वकील ने कहा, "उनके पिता को इस बात का अफ़सोस है कि उनकी बेटी दुखी है."
ब्रिटनी की ज़िंदगी के अहम पड़ाव
1998
16 साल की उम्र में ब्रिटनी स्पीयर्स ने पहली बार सफलता का स्वाद चखा. अपने डेब्यू गीत 'बेबी वन मोर टाइम' विश्व पॉप चार्ट में पहली बार टॉप दस गीतों में से एक बना. उस उम्र में जहां एक तरफ उन्होंने विवादों को जन्म दिया वहीं दूसरी तरफ एक बड़ा किशोर तबका उनका फैन बन गया.
2007
ब्रिटनी की निजी ज़िंदगी में पति के साथ उनकी लड़ाई अब सार्वजनिक तौर पर दिखने लगी थी. उनका तलाक हो चुका था और मीडिया में उनसे उनके बच्चों की कस्टडी के बारे में सवाल पूछे जाने लगे. उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सवाल पूछे जा रहे थे और साथ ही ये आरोप भी लगाए जा रहे थे कि वो मां होने के लिए फिट नहीं हैं.
2008
अस्पतालों और री-हैबिलिटेशन सेंटर के चक्कर काटने के बाद ब्रिटनी के पिता जेमी स्पीयर्स को कोर्ट ने उनका क़ानूनी अभिभावक बना दिया. उन्हें ब्रिटनी के करियर, उनकी संपत्ति और आर्थिक मामलों में फ़ैसले लेने का हक़ दिया गया. शुरुआत में ये व्यवस्था कम वक्त के लिए थी लेकिन बाद में इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया.
2013
भले बी ब्रिटनी को अपने निजी मामलों में फ़ैसले लेने का हक़ नहीं रहा था लेकिन उन्होंने काम जारी रखा. उन्होंने एक बार अपनी छवि सुधारने पर काम किया और अपने सातवें स्टूडियो एलबम के बाद कई शो किए. फिर उन्होंने लास वेगास रेज़िडेन्सी के साथ कई शो करने के लिए चार साल का अनुबंध किया.
2019-2020
पिता के बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण ब्रिटनी ने काम से छुट्टी ली. इसी साल उनके पिता ने कहा कि वो स्वास्थ्य कारणों से ब्रिटनी के अभिभावक बने रहने के कर्तव्य से कुछ वक्त के लिए छुट्टी चाहते हैं.
ब्रिटनी ने अपने वकीलों के कोर्ट में कहा कि वो नहीं चाहतीं कि उनके पिता उनके क़ानूनी अभिभावक बने रहें और उनके करियर से जुड़े फ़ैसले लें. वकील ने कहा कि ब्रिटनी को "अपने पिता का डर है" और अगर उनके हाथों में नियंत्रण रहा तो हो सकता है कि वो फिर कभी स्टेज पर वापसी न कर सकें.
फरवरी 2021
न्यूयॉर्क टाइम्स ने ब्रिटनी स्पीयर्स की सफलता और उनके करियर के गर्त में गिरने को लेकर एक डॉक्यूमेन्ट्री बनाई. इसमें मीडिया ने उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया उस पर भी चर्चा की गई थी. इस डॉक्यूमेन्ट्री से ब्रिटनी की निजी ज़िंदगी और गार्जियनशिप को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी.
इसमें ब्रिटनी के फैन्स द्वारा चलाए जा रहे #FreeBritney अभियान के बारे में भी बात की गई जो उनका समर्थन कर रहे थे और सार्वजनिक तौर पर उनके व्यवहार को मदद मांगने की कोशिशों के रूप में देख रहे थे.
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