अक्षरा सिंह: भोजपुरी इंडस्ट्री में बदल पाएंगी महिलाओं की पहचान?

अभिनेश्री अक्षरा सिंह
इमेज कैप्शन, अभिनेश्री अक्षरा सिंह
    • Author, चिंकी सिन्हा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पटना में एक शॉपिंग कांप्लेक्स के ऊपर पाँचवीं मंज़िल पर बने अपार्टमेंट्स की लॉबी में गुलाबी और पीले गुब्बारे मौजूद थे. भोजपुरी फ़िल्म स्टार अक्षरा सिंह की जन्मदिन की पार्टी एक दिन पहले ही हुई थी. 27 साल की भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने जब दरवाजा खोला, तब उनका पोमेरियन कुत्ता उनके पैरों के पास था.

मुंबई के मलाड इलाके में कोरोना के कुछ मामले निकलने के बाद अक्षरा का वहाँ वाला अपार्टमेंट सील हो गया था. ऐसे वक़्त में वह अपने गृहनगर पटना में थीं. पांचवीं मंज़िल पर स्थित पांचों अपार्टमेंट अक्षरा और उनके परिवार वालों के हैं.

एक अपार्टमेंट में अक्षरा खुद रहती हैं. इसमें प्रवेश करते ही उमंग और आकांक्षाओं का भाव उमड़ने लगता है. यहाँ रैक्सीन का सोफ़ा, प्लास्टिक के फूलों वाला फूलदान और वॉल पेपर वगैरह मौजूद हैं.

अक्षरा ने 16 साल की उम्र में रवि किशन के साथ भोजपुरी फ़िल्मों में क़दम रखा था.

वो कहती हैं कि उस वक्त उन्होंने 'अश्लील गाने' पर डांस किया था. इसे स्वीकार करते हुए वह हिचकती नहीं हैं. उनके मुताबिक़, तब वे लोग इतने मजबूत थे कि वे विरोध भी नहीं कर सकी थीं और तब वह फ़िल्म स्टार भी नहीं थीं. उनके पास अपना रास्ता चुनने का विकल्प नहीं था.

लेकिन अब अक्षरा अपनी पसंद का काम कर रही हैं. उनकी आने वाली फ़िल्म है-डोली.

अक्षरा के मुताबिक़ उनकी यह फ़िल्म उस प्रगतिशील सोच को दर्शाती है, जिसकी झलक 1963 में कुमकुम अभिनीत पहली भोजपुरी फ़िल्म में दिखी थी. जिसकी याद अभी भी उन लोगों में ताज़ा है, जिन्हें भोजपुरी सिनेमा-संगीत में बढ़ती अश्लीलता और घटियापन का दुख होता है.

'गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो' को पटना के वीना सिनेमा हॉल में रिलीज किया गया था.

कहा जाता है कि उस वक़्त इस फ़िल्म का टिकट लेने के लिए लोग सिनेमा थिएटर के बाहर रात से खड़े हो जाते थे. फ़िल्म विधवा पुनर्विवाह के मुद्दे पर बनी थी. यह उस दौर की ऐसी समस्या थी जिस पर चर्चा होनी ज़रूरी था. इसके निर्माता विश्वनाथ प्रसाद शाहाबादी और निर्देशक कुंदन कुमार थे.

अक्षरा सिंह के मुताबिक़ उनकी फ़िल्म 'डोली' का कथानक भी 1970 के दशक की दो महिला किरदारों के इर्दगिर्द है.

अक्षरा कहती हैं, "आप इसे परिवार के साथ देख सकती हैं."

उन्होंने बताया कि फ़िल्म के कथानक में दो बहनें हैं. बड़ी बहन के पति की मृत्यु होने पर सामाजिक रीति-रिवाजों के मुताबिक़ उन पर पति के भाई से शादी का दबाव डाला जाता है. छोटी बहन इस रिवाज का विरोध करती है. अक्षरा बताती हैं, "मैंने छोटी बहन का क़िरदार निभाया है."

अक्षरा ने उस दौर में भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री में क़दम रखा है जब इस इंडस्ट्री में सबसे ज़्यादा अश्लील कंटेंट परोसा जा रहा है.

मनोज तिवारी की फ़िल्म 'ससुरा बड़ा पैसावाला' के सुपरहिट होने के बाद मुंबई और दूसरी जगहों के निर्माताओं ने भोजपुरी सिनेमा में कमाई के उद्देश्य से निवेश किया. यह भी एक वजह है जिसके चलते भोजपुरी सिनेमा में अश्लील कंटेंट वाले नए फ़ॉर्मूले का चलन बढ़ा है.

अब अक्षरा सिंह ने इन्हीं प्रतिगामी सोच के ख़िलाफ़ लड़ रही हैं जिसमें इंडस्ट्री को अश्लीलता और स्त्रियों से भेदभाव से छुटकारा दिलाना शामिल है.

उनके मुताबिक़ उनकी आगामी फ़िल्म इस दिशा में एक क़दम है. भोजपुरी सिनेमा में पुरुष प्रधान फ़िल्मों की भीड़ में शायद ही कोई फ़िल्म आती है जिसमें महिलाओं का चरित्र केंद्र में हो. अक्षरा सिंह के मुताबिक भोजपुरी भाषा और बिहार के लिए इसे बदलने की ज़रूरत है.

रिया चक्रवर्ती

इमेज स्रोत, Hindustan Times

इमेज कैप्शन, अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती

रिया चक्रवर्ती पर अश्लील गाने

बीते साल यूट्यूब पर जारी हुए कई भोजपुरी गानों में बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को 'वेश्या' कहा गया.

इसके बाद 11 अगस्त को राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख रेखा शर्मा ने ट्वीट कर यूट्यूब पर विकास गोप इंटरटेनमेंट चैनल चलाने वाले विकास गोप उर्फ़ यादव जी को गिरफ्तारी करने की माँग की क्योंकि इस गायक ने रिया चक्रवर्ती के ख़िलाफ़ गालियों का इस्तेमाल किया था.

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद रिया चक्रवर्ती अचानक सुर्खियों में थीं और उनका एक तरह से मीडिया ट्रायल किया जा रहा था. ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनका चरित्र हनन तक किया गया.

रिया चक्रवर्ती पर जिस तरह के गाने सामने आए, उनमें बनडमरू यूट्यूब चैनल पर नौ अगस्त को अपलोड हुआ 2 मिनट 36 सेकेंड का गाना रिया तो रं*** है (रिया तो वेश्या है) शामिल था.

बनडमरू यूट्यूब चैनल के 6.68 हज़ार सब्सक्राइबर थे. इसी दिन अपलोड हुए एक अन्य वीडियो में रिया चक्रवर्ती की माँ को गाली दी गई थी.

इसके गायक रामजनम यादव थे और इसे करीब पौने तीन लाख लोगों ने देखा था. वहीं एस म्यूज़िक 2 चैनल पर 'प्रमोद एलआईसी' का गाया एक गाना अपलोड हुआ जिसमें रिया चक्रवर्ती को वेश्या बताते हुए कहा गया था कि भागकर कहाँ जाओगी?

वीडियो कैप्शन, भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह कौन सी मुहिम चला रही हैं?

इन गानों के बोल ने फिर से दिखाया कि भोजपुरी सिनेमा और संगीत की दुनिया में किस तरह से औरतों से भेदभाव, अश्लीलता और सेक्सिज़्म भरा हुआ है. तकनीक ने यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिट बटोरने वाले ऐसे गानों को रिकॉर्ड कर अपलोड करने की प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है.

बिहार और यूपी की म्यूज़िक इंडस्ट्री में पहली बार ऐसा बदलाव 1980 के दशक में कैसेटों के आने से हुआ था और उसके बाद इंटरनेट और यूट्यूब चैनलों ने कामोत्तेजना भरे अश्लील गानों को बढ़ावा दिया है.

1963 में 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' में विधवाओं के पुनर्विवाह से जिस भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत हुई उसी भोजपुरी इंडस्ट्री में महिलाओं को वेश्या कहा जा रहा है. उनके शारीरिक अंगों की ओर अश्लीलता भरे इशारे कर उन्हें सजावटी गुड़िया की तरह पेश किया जा रहा है.

साल 2000 में भोजपुरी इंडस्ट्री में नयी हलचल तब शुरू हुई जब मनोज तिवारी की फ़िल्म 'ससुरा बड़ा पैसा वाला' सुपरहिट हो गई.

खेसारी लाल यादव और पवन सिंह जैसे सुपरस्टारों को प्रमोट करने वाली एजेंसी चलाने वाले रंजन सिन्हा बताते हैं कि भोजपुरी सिनेमा को 26 करोड़ से ज़्यादा लोग देखते हैं और हर साल 300 से 400 फ़िल्में बनती हैं.

सिन्हा के मुताबिक मौजूदा भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री दो हज़ार करोड़ रूपये की होगी और यह लगातार बढ़ रही है.

रंजन सिन्हा ने 2003 में टीम रंजन बनाई जो खेसारी लाल यादव, पवन सिंह और अक्षरा सिंह जैसे सुपरस्टारों को प्रमोट करने का काम करती है. ये सारे कलाकार भोजपुरी इंडस्ट्री के सुपरस्टार हैं.

सिन्हा ने बताया, "रिक्शावाले और प्रवासी मज़दूर हमारे दर्शक हैं, जो पहले बॉलीवुड की बी ग्रेड की फिल्में देखते थे."

बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा भोजपुरी फिल्में और म्यूज़िक एल्बम नेपाल, पंजाब, महराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में रिलीज़ होती हैं.

वीडियो कैप्शन, केंद्र सरकार के बड़े नोट बंद करने के ऐलान के बाद इससे जुड़े भोजपुरी गीत धूम मचा रहे हैं.

कलाकारों को मिलना चाहिए सम्मान

मीडिया में भोजपुरी इंडस्ट्री को अश्लील कहा जाता है, इसे लेकर अक्षरा सिंह सवाल पूछती हैं, "बताइए कौन सी इंडस्ट्री अश्लील नहीं है?"

अक्षरा मानती हैं कि भोजपुरी इंडस्ट्री में अश्लीलता बढ़ी है लेकिन उनके मुताबिक सबकुछ इतना बुरा भी नहीं है. अक्षरा के मुताबिक़ लोग भोजपुरी गीत संगीत को गुड्डू रंगीला के अश्लील गानों से तौलने लगते हैं लेकिन यह सबको तौलने का पैमाना नहीं होना चाहिए.

अक्षरा के मुताबिक अगर बिहार सरकार चाहे तो स्थिति में बदलाव संभव है.

उन्होंने कहा, "अगर नीतीश कुमार कलाकारों को सम्मान देते तो स्थिति बेहतर होती. सम्मान से चीज़ें काफ़ी बदलती हैं. हमें उपलब्ध औरतों के तौर पर देखा जाता है जबकि यह सच्चाई नहीं है. देखना चाहिए कि किस तरह से महाराष्ट्र में मराठी फ़िल्म इंडस्ट्री को सम्मान से देख जाता है. उन्हें प्रमोट किया जाता है."

पिछले कुछ समय से भोजपुरी फिल्म और म्यूज़िक इंडस्ट्री में राष्ट्रवादी गानों का चलन बढ़ा है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में हिंदी पढ़ाने वाले मुन्ना पांडेय इस बदलाव की वजह बताते हुए कहते हैं कि लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हीरो के तौर पर देखने लगे हैं.

गानों में 'जय श्रीराम' और 'पाकिस्तान' जैसे शब्दों का इस्तेमाल बढ़ा है. भोजपुरी फ़िल्मों और म्यूज़िक इंडस्ट्री में निवेश करने वाले लोग भी इन बदलावों को समझते हैं.

अक्षरा के हाल के एक म्यूज़िक वीडियो में भी भगवा साफा पहने युवा भगवान राम और नरेंद्र मोदी के जयकारे लगाते दिखाई दिए हैं.

निराला बिदेशिया

इमेज स्रोत, Nirala Bideshia/Facebook

इमेज कैप्शन, निराला बिदेशिया

दूसरे राज्यों से अभिनेत्रियाँ

गानों में जबर्दस्त कामुकता का प्रदर्शन आज भोजपुरी म्यूज़िक इंडस्ट्री की पहचान बन चुके हैं.

महिलाओं को किस तरह से पर्दे पर पेश किया जाता है, इसका अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि लोकप्रिय हीरो पवन सिंह अपने सिग्नेचर स्टाइल में महिला अभिनेत्रियों की नाभि पर ऐसे चाभी लगाते हैं मानो वे उसे खोलने का उपक्रम कर रहे हों.

पवन के साथ रिलेशनशिप में रह चुकीं अक्षरा बताती हैं कि उनके और दूसरे तमाम अभिनेताओं के नियम-कायदों को नहीं मानने के चलते वो अलग-थलग पड़ गई थीं. अक्षरा का आरोप है कि पवन सिंह एक तरह से लॉबी चलाते हैं.

फ़िल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की दुर्दशा और उन्हें नुमाइशी तौर पर पेश करने की दूसरी वजह भी मौजूद है.

पत्रकार निराला बिदेसिया 'आखर' नाम के भोजपुरी प्रचार और साहित्यिक विकास की पहल से जुड़े हैं. उनके मुताबिक़ शुरुआत में भोजपुरी फ़िल्मों और म्यूज़िक वीडियो में काम करने वाली अभिनेत्रियां दूसरे राज्यों से आती थीं और इस वजह से कोई विरोध भी नहीं था.

बिदेसिया बताते हैं, "भोजपुरी फ़िल्मों ने केवल हीरो और सिंगर दिए हैं. भोजपुरी समाज भी पितृसत्तात्मक है. इस इलाके ने कभी अभिनेत्री और गायिका नहीं दीं. यहां के सामंतों ने रजवाड़ों की नकल करते हुए स्थानीय गायकों को संरक्षण दिया. इन नाचनेवालियों ने बिहार के पारंपरिक नृत्य को नष्ट किया और बाद में गुलशन कुमार के सौजन्य से नाचनेवालियां गायिका भी बन गईं."

अभिनेता और नेता रवि किशन

इमेज स्रोत, FB/RAVI KISHAN

इमेज कैप्शन, अभिनेता और नेता रवि किशन

पटना में पली-बढ़ी हैं अक्षरा

बैंगनी रंग की ड्रेस पर अक्षरा डेनिम शर्ट पहने हुई थीं. ब्लैक कप में कॉफ़ी हाथ में लिए जब वह बैठीं तो उन्होंने तकिए को गोद में रख लिया. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान वो नए गाने के प्रॉडक्शन में व्यस्त रहीं.

वैसे पटना वो जगह है जहाँ अक्षरा अपने बचपन को महसूस करती हैं. वो उन दुकानदारों के पास भी चली जाती हैं, जो उन्हें पहचानते हुए निकनेम 'मिल्की' से बुलाते हैं. जब अक्षरा गोलगप्पे खाने के लिए बाहर निकलती हैं तो उनके साथ कोई भीड़ नहीं होती. अक्षरा पटना में ही पली-बढ़ी हैं.

अक्षरा जब नौवीं में पढ़ती थीं तब उन्हें रवि किशन की फ़िल्म में काम करने का ऑफ़र मिला था. इसके लिए वह आज भी रवि किशन की आभारी हैं, इसके बाद उनके पास एक के बाद एक ऑफ़र आने लगे. अक्षरा के माता-पिता ने उन्हें अभिनय के क्षेत्र में जाने के लिए प्रोत्साहित किया.

अक्षरा के माता-पिता दोनों अभिनय की दुनिया से जुड़े हैं. उनकी माँ ने शादी के बाद अभिनय करना शुरू किया. उनके माता-पिता ने पहले एकसाथ थिएटर में काम किया. अब वो फ़िल्मों और इन दिनों टीवी सीरियल्स में अभिनय कर रहे हैं.

अक्षरा ने बताया, "बचपन में मैं देवी दुर्गा की भूमिका निभाना चाहती थी. मुझे उनकी आँखें और उनका चेहरा बेहद पसंद है." अक्षरा ने हाईस्कूल से आगे की पढ़ाई नहीं की और भोजपुरी फ़िल्मों में काम करने के लिए मुंबई पहुंच गईं.

जब वो फ़िल्मों में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं उसी दौर में मोनालिसा और आम्रपाली दुबे भी इंडस्ट्री में जगह बनाने के दौर से गुजर रही थीं.

हालाँकि, मोनालिसा और आम्रपाली दुबे बिहार की नहीं हैं. आम्रपाली दुबे गोरखपुर की हैं, भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार निरहुआ के साथ डेब्यू करने के बाद वो हिट हो गईं.

निरहुआ रिक्शावाला फिल्म का पोस्टर

इमेज स्रोत, T-SERIES HAMAAR BHOJPUR

फ़िल्मी दुनिया अलग-थलग पड़ना

शुरुआत में अक्षरा सिंह को अपनी जगह बनानी में काफी मुश्किलें हुईं लेकिन पुरुष प्रधान इंडस्ट्री में यह आम बात है जहां हिरोइन की भूमिका सजावटी होती है.

उन्होंने बताया, "महिला कलाकारों को पुरुषों की तुलना में काफ़ी कम पैसे दिए जाते हैं. अगर कोई इसका विरोध करता है तो उसे काम नहीं मिलता है."

अक्षरा सिंह ने ऐसा दुस्साहस भी दिखाया. उन्होंने भोजपुरी सिनेमा के मशहूर कलाकार पवन सिंह के साथ काम करने से इनकार कर दिया था.

हालांकि दोनों रिलेशनशिप में रह चुके थे. इसकी कीमत उन्हें चुकानी पड़ी. लेकिन अब वे इस दौर से निकल आयी हैं और उन्हें इसका एहसास है कि वह अपना मेहनताना माँग सकती हैं और कुछ बड़े फ़ैसले ले सकती हैं.

पिछले साल उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह आरोप लगाया था कि पवन सिंह के शादी करने के कारण उनका रिश्ता टूटा है.

अक्षरा ने यह आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें धमकियाँ मिलीं और कोई उनके नाम के साथ काम करने को तैयार नहीं था.

ब्रेकअप और इंडस्ट्री की उपेक्षा के चलते अक्षरा डिप्रेशन में भी चली गईं. उन दिनों को वे याद नहीं करना चाहती हैं. अक्षरा बताती हैं, "उस मुश्किल दौर से उबरने में मेरे परिवार ने मदद की."

वैसे फ़िल्मी दुनिया में अकेलेपन में संघर्ष करना इतना आसान भी नहीं होता है. बीते अगस्त महीने में भोजपुरी फ़िल्मों की अभिनेत्री अनुपमा पाठक ने उत्तरी मुंबई के दहिसर उपनगर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली.

40 साल की अनुपमा बिहार के पूर्णिया ज़िले से मुंबई पहुंची थीं और उन्होंने कई भोजपुरी फ़िल्मों और टीवी शो में काम किया था.

किराए के फ्लैट में जिस दिन वह मृत पाई गईं ,उससे एक दिन पहले फेसबुक पर शेयर किए एक वीडियो में उन्होंने कहा था कि उनके साथ धोखा हुआ है और वे किसी पर भरोसा नहीं कर पा रही हैं. इससे पहले 14 जून को बॉलीवुड कलाकार सुशांत सिंह राजपूत ने बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में आत्महत्या की थी.

नौ जून को सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सलियान ने एक बहुमंजिली इमारत से छलांग लगाकर जान दे दी थी. बीते मई महीने में मुंबई में टीवी अभिनेता मनमीत ग्रेवाल ने आत्महत्या कर ली थी. जबकि अगस्त महीने में मलाड स्थित घर में 44 साल के टीवी अभिनेता समीर शर्मा का शव मिला था.

दरअसल फ़िल्मी चकाचौंध में अकेले पड़ जाने के बाद अस्तित्व बचाना बेहद मुश्किल होता है. हालाँकि, फ़िल्मी दुनिया में ये कहावत भी लोग दोहराते हैं कि शीर्ष पर आदमी अकेला ही होता है.

एक गाने का वीडियो ग्रैब

इमेज स्रोत, YOUTUBE

ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स पर भोजपुरी सिनेमा

अक्षरा सिंह हिंदी टीवी सीरियलों में काम कर चुकी हैं लेकिन कहती हैं कि बॉलीवुड में काम करने की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है.

दरअसल, भोजपुरी सिनेमा में उत्थान का यह दौर पिछली सदी के आख़िरी सालों में तब आया जब कुछ फ़िल्मों की कामयाबी ने निवेश और दर्शकों के लिहाज से इसे संभावनाओं से भरा पाया. भोजपुरी फ़िल्मों के दर्शकों का बड़ा वर्ग पहले से बी-ग्रेड की हिंदी फ़िल्मों को देखने वाला तबका है.

ओटीटी प्लेटफॉर्मों ने भी भोजपुरी सिनेमा को दिखाना शुरू किया है. इसके चलते इंडस्ट्री में संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं.

साल 2018 में पहली बार भोजपुरी सिनेमा डिजिटल प्लैटफॉर्म पर प्रदर्शित हुआ. एकता कपूर की एएलटी बालाजी पर दिनेश लाल यादव उर्फ़ निरहुआ और आम्रपाली दुबे की 'हीरो वर्दीवाला' प्रदर्शित हुई जो बड़ी हिट साबित हुई.

पिछले कुछ सालों में भोजपुरी फिल्मों में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिले हैं और इसके चलते फिल्मों की हीरोइन को काफ़ी पैसा भी मिलने लगा है लेकिन अभी हीरो को हिरोइन की तुलना में कहीं ज़्यादा भुगतान किया जाता है.

अक्षरा सिंह ने कहा, "अगर उन्हें 10 रूपये मिल रहे हैं तो हमें दो रूपये मिल रहे हैं."

आम्रपाली दुबे भोजपुरी फिल्मों की सबसे बड़ी महिला स्टार हैं. उन्होंने अपना करियर 2008 में जीटीवी की सिरीज़ 'सात फेरे- सलोनी का सफ़र' से शुरू किया था.

वो प्रति फिल्म 9-10 लाख रुपये का मेहनताना वसूलती हैं. 2014 में ब्लॉकबास्टर निरहुआ हिंदुस्तानी के साथ उन्होंने भोजपुरी फिल्मों की दुनिया में क़दम रखा था. वो यूट्यूब पर सबसे ज़्यादा देखी गई भोजपुरी अभिनेत्री हैं.

अक्षरा सिंह ने रवि किशन के साथ सत्यमेव जयते से अपना डेब्यू किया था. वे भी जल्दी ही भोजपुरी फ़िल्मों की बेहद लोकप्रिय अभिनेत्री बन गईं. आम्रपाली दुबे और पश्चिम बंगाल से भोजपुरी फ़िल्मों में आनी वाली अंजना सिंह के सामने अक्षरा सिंह ने अपना वजूद कायम किया है.

ससुरा बड़ा पइसावाला का पोस्टर

इमेज स्रोत, T-SERIES HAMAAR BHOJPURI

कमाई करने वाले सितारे करते हैं शोषण

दूसरी फ़िल्म इंडस्ट्री की तरह ही भोजपुरी सिनेमा में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है.

प्रोड्यूसर, निर्देशक, सिनमेटोग्राफर, लेखक और दूसरे अस्सिटेंट की भूमिका में महिलाएं अभी भी महज एक चौथाई जगहों पर दिखती हैं. भोजपुरी सिनेमा में महिला कलाकारों को वैसी भूमिकाएं निभानी होती है जिसमें उन्हें कोई पुरुष किरदार मुश्किलों से बाहर निकालता है.

यह ऐसा फ़ॉर्मूला है जो लंबे समय से चला आ रहा है जिसके चलते ही हिरोइनों को अश्लीलता और सजावटी वस्तु की तरह पेश किया जाता है.

क्षेत्रीय सिनेमा कुल मिलाकर हिंदी सिनेमा से ज़्यादा फ़िल्में बनाता है. इन क्षेत्रीय सिनेमाओं में अपनी अपनी संस्कृति और भाषा की छाप भी दिखती है. कथानक में विवाह, दहेज, जातिगत मुद्दे नजर आते हैं.

बॉलीवुड का सिनेमा शहर केंद्रित हो चुका है जबकि क्षेत्रीय सिनेमा में सामाजिक मुद्दों की छाप दिखती है. हालाँकि कई के लिए हिंदी उनकी मातृभाषा भी नहीं है.

अक्षरा सिंह के मुताबिक़ भोजपुरी बिहार सरकार की उपेक्षा की भी शिकार है. बिहार सरकार ने इसे आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं दिया है जिसके चलते भी इसके कलाकारों को उनका हक़ नहीं मिल पाता है. अक्षरा ध्यान दिलाती हैं कि बिहार में आज तक कोई फ़िल्म स्टूडियो नहीं बन पाया है.

अगर बंगाली फिल्मों को देखें तो वहां सत्यजीत राय से लेकर रितुपर्णो घोष तक बंगाली निर्देशकों ने महिलाओं से जुड़े विषयों पर तमाम फिल्में बनाई हैं जिनमें अप्पू ट्रायलॉजी, चारूलता, तीन कन्या, देवी, जलसा घर, घर बाहर जैसी फ़िल्में शामिल हैं.

मगर भोजपुरी फिल्मों में महिला किरदारों को केवल सजावटी तौर पर पेश किया जाता है. समाज में महिलाओं की भूमिका का असर फिल्मी कथानकों में ग़ायब दिखता है.

2017 में प्रकाशित ऑक्सफै़म की रिपोर्ट 'द इरेज़िस्टिबल एंड ओप्रेसिव गेज़ इण्डियन सिनेमा एंड वॉयलेंस एगेंस्ट वीमेन एंड गर्ल्स' में 2012 से 2016 के बीच प्रदर्शित बॉलीवुड फ़िल्मों का आकलन किया गया है कि इन फिल्मों में कैसी भूमिकाएं अभिनेत्रियों को दी गई हैं और वह किस तरह से महिलाओं के प्रति सेक्सिस्ट धारणाओं को बनाए रखने में मदद करती हैं.

इस आकलन में कुछ भोजपुरी और उड़िया फ़िल्मों भी शामिल हैं.

उदाहरण के लिए बॉक्सऑफिस पर हिट फिल्म निरहुआ हिंदुस्तानी में अम्रपाली दुबे ने राधा का किरदार निभाया है.

राधा की युवावस्था में ही उनके पिता की मौत हो जाती है. इसके बाद राधा विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करती है. वो शराब पीती है और अपनी पसंद के कपड़े पहनती है. यह किरदार भी महिलाओं को एक ख़ास नज़रिए से देखने को प्रेरित करता है.

भोजपुरी अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार को एक इंटरव्यू में कहा था, ''भोजपुरी इंडस्ट्री में काम करते हुए मैंने महसूस किया है कि अधिकांश फ़िल्म निर्माता महिला कलाकारों का या तो नाममात्र की भूमिका के लिए फिट समझते हैं या शोपीस की तरह इस्तेमाल करते हैं.''

ऑक्सफैम के अध्ययन के मुताबिक़, सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले सितारे ही शोषण करने वालों में आगे हैं. इसके अलावा भोजपुरी सिनेमा में सेक्स कॉमेडी का दौर शुरू हुआ है जिसमें मानवाधिकार और लैंगिक समानता के सभी मानकों का उल्लंघन हुआ है."

अमूमन अश्लील कंटेंट के लिए जाने जाने वाली भोजपुरी फ़िल्मों को सेंसर बोर्ड से भी व्यस्क फ़िल्म का प्रमाणपत्र मिलता है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है, "ज़्यादातर युवाओं ने महिला अभिनेत्रियों को ग्लैमर, म्यूज़िक और रोमांस से जोड़कर देखा है. कई ने यह भी बताया फ़िल्मों से उनकी यौन इच्छाओं की शुरुआत हुई है. कई ने माना कि फिल्मों में लड़कियों को ज़्यादा आज़ादी मिली हुई है. फ़िल्म संगीत को यौन उत्पीड़न का सर्वव्यापी साधन भी बताया गया."

इस अध्ययन में शामिल 80 प्रतिशत पुरुषों ने माना कि अगर फ़िल्म में हिरोइन नहीं हो तो वे फ़िल्म नहीं देखेंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक, "जब इन लोगों से यह पूछा गया कि क्या वे हिरोइन को देखने के लिए ही फ़िल्म देखने जाते हैं, तब अधिकांश ने कहा कि वे फ़िल्म के कथानक और हीरो के चलते फिल्म देखते हैं. लेकिन साथ ही माना कि कामयाबी के लिए हिरोइन का होना ज़रूरी है क्योंकि हीरोइन को देखने से विजुअल आनंद मिलता है."

अक्षरा सिंह के मुताबिक़ उन्हें फ़िल्मों में नुमाइश के तौर पर पेश किया जाता था और इंडस्ट्री में अलग-थलग नहीं पड़ने के लिए वह इनमें काम करती रहीं. उनके मुताबिक पुरुष सुपरस्टार अपनी अपनी लॉबी चलाते हैं और यह कठिन लड़ाई है.

अक्षरा ने कहा, "मैं हर किसी को चुनौती देती हूं कि वह बिना अभिनेत्री के बॉक्स ऑफिस पर हिट फ़िल्म बनाकर दिखाएं. हमें इंडस्ट्री में गैरज़रूरी ठहराने की कोशिश होती है लेकिन सच्चाई यही है कि हमारे बिना फ़िल्में हिट नहीं हो सकतीं."

अक्षरा सिंह

अक्षरा के एक्टिंग करने का विरोध

अक्षरा ने उन गानों और म्यूज़िक वीडियो में भी काम किया है, जो 'वल्गर' कैटेगरी में आती हैं.

अक्षरा के मुताबिक शुरुआत दौर में भाषाई समझ नहीं होने के चलते डबल मीनिंग वाले गानों के बारे में उन्हें पता नहीं था. लेकिन इसके बाद मातृभाषा के सम्मान के प्रति भावनाएं उबलने लगीं.

अक्षरा के मुताबिक़ भोजपुरी की त्रासदी है कि संपन्न और प्रभावशाली लोगों ने इसे छोड़कर हिंदी को अपना लिया है.

उन्होंने बताया, "मुझे बिहारी और भोजपुरी फ़िल्मों की अभिनेत्री होने पर गर्व है. सबकुछ के बाद भी. हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्रियां जिस तरह के कपड़े पहनती हैं, जिस तरह के आइटम साँग होते हैं, क्या वे वल्गर नहीं हैं?"

अक्षरा उन दिनों को याद करती है जब उनके परिवार को लोगों को उनके फिल्म इंडस्ट्री में काम करने की इच्छा का पता चला था. लोगों ने कहा था कि बिहार के अच्छे घरों की लड़कियां ये काम नहीं करती हैं.

अक्षरा ने बताया, "उन लोगों ने नचनिया और गवैया जैसे शब्द कहे थे लेकिन मेरे माता-पिता ने मेरा उत्साह बढ़ाया. यह बहुत बड़ा अंतर है. अगर हमें सम्मान मिलेगा तो चीज़ें बदलेंगी."

अक्षरा के मुताबिक बिहार सरकार भी भोजपुरी भाषा या भोजपुरी अभिनेताओं के प्रति उदासीन रही है. लकिन वह खु़द अपनी क्षमता के मुताबिक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. भोजपुरी इंडस्ट्री में 10 साल से काम करने के बाद वह बदलाव की कोशिशों में जुटी हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अयोध्या में भूमि पूजन करने वाले थे तब अक्षरा सिंह ने एक म्यूज़िक वीडियो जारी किया.

इस वीडियो में अक्षरा मोटरसाइकिल चला रही हैं उनके पीछे पुरुषों का घेरा है. पुरुषों का नेतृत्व करती दिखती हैं. यह एक तरह से उस गीत संगीत से बदलाव ही है जहां हीरो उनके कमर को पकड़कर उसका माप लेते दिखाई देते थे या अश्लील तरीके से स्तन पर हाथ फेरते नजरे आते थे.

अक्षरा ने कहा, "हमें नियंत्रण हासिल करने की ज़रूरत है. भोजपुरी फ़िल्मों के हीरो बनावटी हैं. बदलाव आ रहा है और हम महिलाएं ये बदलाव करेंगी."

अक्षरा के अपार्टमेंट्स के बाहर निकलते हुए मैंने देखा कि गुब्बारे चारों ओर थे. एक को रास्ता मिला और भाग निकला. बल्कि, उड़ गया. एक गुलाबी गुब्बारा.

बहरहाल, अक्षरा अब ब्रांड्स की शूटिंग और प्रमोशन में व्यस्त हैं. वापस मुंबई में, सिंह को पता है कि उनकी जगह सितारों के बीच है और पहला कदम भोजपुरी सिनेमा में फ़ीमेल लीड के बदले लीड भूमिका निभानी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)