सिनेमा हॉल के लिए कितना बड़ा ख़तरा हैं डिजिटल फ़िल्में

इमेज स्रोत, NIKITA DESHPANDE/BBC
- Author, प्रदीप सरदाना
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार एवं फ़िल्म समीक्षक
एक ही दिन में दो-तीन बड़ी फ़िल्मों की रिलीज़ के कारण बॉक्स ऑफ़िस पर टकराव की बात तो अक्सर होती रहती थी. लेकिन यह टकराव फ़िल्मों की रिलीज़ को लेकर इतनी जल्दी ओटीटी पर भी हो जाएगा, ऐसा नहीं लगता था.
अभी गत 12 जून को ही ओटीटी पर फीचर फ़िल्मों के डिजिटल रिलीज़ की बड़ी शुरुआत हुई थी. इस बात को अभी करीब डेढ़ महीना ही हुआ है. लेकिन 31 जुलाई को ओटीटी पर एक ही दिन में तीन फ़िल्मों की रिलीज़ से यह संदेश मिल गया है कि ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स मनोरंजन का नया बड़ा अड्डा बनने जा रहे हैं.
साथ ही ये भी कि थिएटर की तरह डिजिटल रिलीज़ में भी फ़िल्मों के परस्पर टकराव होते रहेंगे.
इस 31 जुलाई को जहां विद्या बालन की चर्चित फ़िल्म 'शकुंतला देवी' अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई. तो नवाजुदीन सिद्दीकी, राधिका आप्टे की 'रात अकेली है' नेटफ्लिक्स पर और कुणाल खेमू की 'लूटकेस' हॉटस्टार पर.
इससे पहले सुशांत सिंह राजपूत की अंतिम फ़िल्म 'दिल बेचारा' को डिज़नी हॉटस्टार पर जिस तरह का दर्शकों का बम्पर रिस्पॉंस मिला है, उसे देख तो सभी हैरत में हैं.

इमेज स्रोत, Hotstar
गत 24 जुलाई शाम को 'दिल बेचारा' की पहली स्ट्रीमिंग के बाद ही दर्शकों ने इस फ़िल्म को देखने में जिस तरह अपनी दिलचस्पी दिखाई, वह बताता है कि फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़, थिएटर रिलीज़ से भी ज्यादा लोकप्रियता पा सकती है.
कोरोना काल में सभी थिएटर्स के बंद होने से देश में अब डिजिटल फ़िल्मों का एक नया युग शुरू हो गया है जिसकी पहली बड़ी शुरुआत गत 12 जून को अमिताभ बच्चन, आयुष्मान खुराना की फ़िल्म 'गुलाबो सिताबो' से हुई थी.

इमेज स्रोत, Amazon Prime
इस कड़ी में 'दिल बेचारा' ऐसी दूसरी प्रमुख फ़िल्म थी जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हुई.
ओटीटी पर रिलीज़ इन दोनों फ़िल्मों ने तो अच्छी लोकप्रियता पाई ही. साथ ही 31 जुलाई को रिलीज़ तीनों फ़िल्मों में भी दर्शकों की अच्छी दिलचस्पी दिखी. इससे यह साफ़ हो गया कि अभी तक जो ओटीटी अपनी वेब सीरीज के लिए ही चर्चित थे अब वहाँ भी फीचर फ़िल्मों का दबदबा होने जा रहा है.
फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ से फ़िल्मकारों को तो फायदा होगा लेकिन यह थिएटर के वर्चस्व पर भी हमला है.
ओटीटी पर फ़िल्मों की बाढ़
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर अब फीचर फ़िल्मों की बाढ़ आने वाली है, इस बात के संकेत तभी मिल गए थे जब गत 29 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार ने अपने यहाँ सात बड़ी और चर्चित फिल्में रिलीज़ करने की घोषणा करके सभी को चौंका दिया.
इन सात फ़िल्मों में 'दिल बेचारा' और 'लूटकेस' तो अब रिलीज़ हो गयी हैं. बाकी 5 फ़िल्में भी आगामी अक्तूबर तक रिलीज़ हो जाएंगी.
इन 5 फ़िल्मों में तीन तो बड़ी फिल्में हैं. जैसे अक्षय कुमार, कियारा आडवाणी की 'लक्ष्मी बॉम्ब', अजय देवगन, संजय दत्त और सोनाक्षी सिन्हा की 'भुज- द प्राइड ऑफ़ इंडिया', महेश भट्ट के निर्देशन में बनी 'सड़क-2' जिसमें आलिया भट्ट, पूजा भट्ट, संजय दत्त, आदित्य रॉय कपूर हैं.

इमेज स्रोत, डिज्नी प्लस हॉटस्टार
इन फ़िल्मों में अभिषेक बच्चन, इलियाना डी क्रूज और निकिता दत्ता की 'द बिग बुल' भी अहम है. साथ ही विद्युत जामवाल की 'खुदा हाफ़िज़' भी रिलीज़ से पहले सुर्खियां बटोर रही है.
उधर हॉट स्टार के बाद ओटीटी के एक और बड़े प्लेटफ़ॉर्म नेट्फ़्लिक्स ने भी अपने यहाँ कई फ़िल्मों को रिलीज़ करने की तैयारी कर ली है. नेट्फ़्लिक्स जो फ़िल्में दिखाएगा उनमें अभिषेक बच्चन, राजकुमार राव और फातिमा शेख की 'लूडो' है तो संजय दत्त की 'तोरबाज' भी.
साथ ही अनिल कपूर की 'एके वर्सेज़ एक', शबाना आज़मी की 'काली खुही', बॉबी देओल की 'क्लास ऑफ़ 83', नवाजुद्दीन सिद्दीकी और श्वेता प्रसाद की 'सीरियस मैन', यामी गौतम और विक्रम मैसी की 'गिन्नी वेड्स सन्नी' और काजोल की 'त्रिभंगा'.
जबकि जाहन्वी कपूर की चर्चित फ़िल्म 'गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल' को रिलीज़ करने की घोषणा तो नेट्फ़्लिक्स पहले ही कर चुका है.

इमेज स्रोत, Netflix
इन फ़िल्मों के अलावा कुछ और भी अहम फ़िल्मों के अन्य ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स पर रिलीज़ होने की चर्चाएं जोरों पर हैं. जिनमें ज़ी-5 तो पहले से ही अहम है. इधर फ़िल्म क्षेत्र में अपना विशेष दबदबा रखने वाले शेमारू ने भी 31 जुलाई से 'शेमारूमी बॉक्स ऑफ़िस' के नाम से एक अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म शुरू किया है.
यह सब बताता है कि सिनेमा के रुपहले बड़े पर्दे और टीवी के छोटे पर्दे के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म भी सिनेमा और मनोरंजन के तीसरे पर्दे के रूप में तेजी से उभर रहा है.
असल में गत मार्च के बाद कोरोना के लंबे संकट को देखते हुए उन सभी फ़िल्मकारों को दिन में तारे दिखाई देना स्वाभाविक था, जिनकी फिल्में प्रदर्शन के लिए तैयार थीं. लेकिन उनके रिलीज़ न होने से उन फ़िल्मों की लागत बढ़ती जा रही थी.
ऐसे में कुछ फ़िल्मकारों को जब उनकी फ़िल्में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर रिलीज़ करने का प्रस्ताव मिला तो कुछ फ़िल्मकारों ने इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाई. देखते-देखते अब कई फ़िल्मकार थिएटर के लिए बनीं अपनी फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ के लिए तैयार हो गए हैं.
हालांकि शुरू में फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ भी एक चुनौती थी कि यह नया प्रयोग सफल होगा या नहीं. अमिताभ बच्चन की 'गुलाबो सिताबो' जब इस प्रयोग के रूप में सबसे पहले ओटीटी पर आई तो उन्होंने भी एक ट्विट कर लिखा था- "फ़िल्म इंडस्ट्री में प्रवेश 1969 और अब 2020 में हो गए 51 वर्ष. इन सालों में कई बदलाव और चुनौतियाँ देखीं. अब एक और चुनौती. डिजिटल रिलीज़. मेरी फ़िल्म 'गुलाबो सिताबो."

इमेज स्रोत, Twitter/@SrBachchan
इधर अब फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ की सफलता को देख आए दिन किसी न किसी फ़िल्म की ओटीटी पर रिलीज़ होने की घोषणा हो रही है. कोई बड़ी बात नहीं आगे चलकर बड़े बजट की बड़ी फ़िल्में भी डिजिटल सिनेमा के नए अवतार को ही अपनी पहली पसंद बना लें. यदि ऐसा हुआ तो आने वाले दिनों में डिजिटल सिनेमा अपना एक बड़ा साम्राज्य स्थापित कर लेगा.
लेकिन क्या सच में ऐसा होगा. या फिर डिजिटल सिनेमा की लोकप्रियता सिर्फ़ तब तक ही है, जब तक थिएटर खुल नहीं जाते. मतलब जैसे ही कोविड 19 का कहर ख़त्म होगा, दर्शक फिर से पहले की तरह थिएटर की ओर लौट आएंगे.
डिजिटल सिनेमा आगे चलकर क्या रंग लेगा और कैसा होगा इसका भविष्य? यह जानने के लिए हमने डिजिटल प्लेटफॉर्म और फ़िल्म-टीवी इंडस्ट्री के कुछ दिग्गजों से भी एक्सक्लूसिव बात की.

इमेज स्रोत, Reuters
'थिएटर और डिजिटल दोनों चलेंगे'
स्टार और डिज्नी इंडिया के चेयरमैन उदय शंकर, जो 'द वाल्ट डिज्नी कंपनी' के एशिया पेसिफिक के भी प्रेसिडेंट हैं. इस कारण देश के सबसे बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म हॉट स्टार की कमान भी इन्हीं के हाथ में है.
उदय शंकर कहते हैं, "मेरा मानना है कि इस संकटकाल में फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ एक स्वागत योग्य शुरुआत है. ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स से फ़िल्म इंडस्ट्री को बहुत फायदा होगा. क्योंकि हमारे पास स्क्रीन्स की कमी है. पूरा साल जल्द ही बुक हो जाता है. जिससे कई फ़िल्मों को रिलीज़ के लिए साल भर काफी संघर्ष करना पड़ता है. लेकिन अब ओटीटी फ़िल्मों की विर्चुअल थियेटरिकल रिलीज़ का माध्यम भी है और एक अच्छा मौका भी."
"इससे लंबे समय में तो बहुत फायदा होगा. जिन फ़िल्मों को थिएटर नहीं मिलते आगे चलकर वे फिल्में ओटीटी पर रिलीज़ हो सकेंगी. इससे बड़ी तादाद में कलाकारों, निर्माताओं, निर्देशकों और लेखकों आदि सभी को लाभ होगा. क्योंकि फ़िल्मों को डिजिटल प्लेटफॉर्म मिल जाने से हमारे यहाँ और भी ज़्यादा फ़िल्में बननी शुरू हो जाएंगी."

इमेज स्रोत, Reuters
लेकिन थिएटर्स वाले फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ से काफ़ी परेशान हैं. उन्हें लगता है कि इससे लोग थिएटर जाना ही बंद कर देंगे क्योंकि जो फ़िल्म वह थिएटर में देखते थे अब वह उन्हें घर में ही देखने को मिल जाएगी. इस स्थिति का क्या होगा?
इस पर उदय शंकर कहते हैं, "लोग थिएटर जाना बंद नहीं करेंगे. जब हालात बदलेंगे,थिएटर सुरक्षित होगा तब वो थिएटर भी जाएँगे. पर हर फ़िल्म के लिए दर्शक थिएटर में जाना भी नहीं चाहते और जा भी नहीं सकते क्योंकि इसमें समय भी लगता है और पैसा भी, इसलिए हफ्ते में एक फ़िल्म घर पर बैठकर ही देखी जा सकती है तो इसमें दर्शकों का भी फायदा है और क्रिएटिव कम्यूनिटी का भी. इसमें थिएटर का भी कोई नुकसान नहीं है क्योंकि अगर फ़िल्म्स की खपत और दर्शक बढ़ेंगे तो ओवरऑल फ़िल्म इंडस्ट्री बूस्ट करेगी."
क्या बड़े बजट की फ़िल्मों की भी डिजिटल रिलीज़ की संभावना है? इस पर उदय का जवाब था, "अभी शायद यह ना हो पर आगे आने वाले समय में बड़े बजट की फ़िल्मों की भी डिजिटल रिलीज़ हो सकती है. मेरा मानना है कि आने वाले समय में फ़िल्मों का डिजिटल रिलीज़ भी लोकप्रिय होगा और लोग सिनेमा घर में जाकर भी फिल्में देखेंगे. ठीक ऐसे ही जैसे आज क्रिकेट मैच का लाइव टेलिकास्ट भी लोग घर से भी देखते हैं. इससे चैनल्स की टीआरपी भी बहुत ऊपर जाती है. साथ ही स्टेडियम भी हाउस फुल जाते हैं. ऐसा नहीं कि टीवी पर क्रिकेट के प्रसारण से लोगों ने स्टेडियम में जाना छोड़ दिया."

इमेज स्रोत, Amazon Prime
'बेहतर विकल्प है डिजिटल रिलीज़'
उधर सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ एन पी सिंह वर्तमान परिस्थियों में ओटीटी पर फ़िल्मों की रिलीज़ को एक बेहतर विकल्प मानते हैं. सोनी का जहां अपना प्रसिद्द डिजिटल प्लेटफॉर्म सोनी लिव है. वहाँ सोनी पिक्चर्स की अपनी फ़िल्म 'शकुंतला देवी' भी अमेज़न प्राइम वीडियो पर 31 जुलाई को रिलीज़ होने पर काफी पसंद की गयी. विद्द्या बालन स्टारर यह फ़िल्म जानी मानी गणितज्ञ शकुंतला देवी की बायोपिक है.
एन पी सिंह बताते हैं, "जो फ़िल्में बनकर तैयार थीं और पिछले महीनों में रिलीज़ होने वाली थीं लेकिन वे कोरोना के कारण नहीं हो सकीं. उनके लिए यह समय और भी ज़्यादा मुश्किल है. ऐसे फ़िल्ममेकर्स की जहां बड़ी लागत इन फ़िल्मों में फंसी हुई है, वहाँ दर्शकों में भी इन फ़िल्मों को देखने की उत्सुकता है. ऐसे में इन फ़िल्मों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्मस एक बहुत अच्छा माध्यम है. इससे तैयार फिल्में दर्शकों तक आसानी से पहुँच जाएंगी."
सिंह कहते हैं, "असल में अभी जो हालात हैं, उनमें आगे क्या होगा, यह कहना मुश्किल है. जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक यह खत्म तो नहीं हो पाएगा. फिर जब तक कोरोना के केस कम नहीं होते, तब तक थिएटर्स खुलने की संभावना भी कम है. यदि कहीं थिएटर्स खुल भी गए तब भी लोगों यदि सुरक्षित नहीं लगेगा तो लोग थिएटर्स नहीं जाएँगे या बहुत कम लोग ही जाएँगे. इसलिए इस समय लागत को मोनोटाइज़ कर लिया जाये तो यही ठीक है."
क्या बड़े बजट की फ़िल्मों के लिए भी ओटीटी अच्छा प्लेटफॉर्म हो सकता है? इस पर वे कहते हैं, "अभी डिजिटल पर मिड बजट की फिल्में ही रिलीज़ हो रही हैं. कुछ निर्माता अपने बड़े बजट की फ़िल्मों पर फंसे हुए फंड्स को देखते हुए कुछ समझोता करने का भी निर्णय ले सकते हैं."
ओटीटी का भविष्य और इसकी ग्रोथ को आप किस रूप में देखते हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा, "ओटीटी की ग्रोथ और इसका भविष्य भारत में पहले से अच्छा था. लेकिन अब लॉकडाउन में इसकी ग्रोथ और ज्यादा हो गयी है. पर इस महामारी से बाहर निकलने पर यह ग्रोथ और इसके बढ़े हुए दर्शक बरकरार रहते हैं या नहीं यह तभी पता लगेगा."

इमेज स्रोत, Hotstar
ओटीटी का कारोबार दोगुने से ज़्यादा हो जाएगा
इसमें कोई शक नहीं कि वेब सीरीज के कारण ही भारत में ओटीटी की ग्रोथ पहले से ही अच्छी थी. लेकिन अब फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ से ओटीटी का कारोबार कितना बढ़ सकता है? यह सवाल हमने तरुण कटियाल से पूछा.
तरुण कटियाल भी मनोरंजन उद्योग से लंबे समय से जुड़े हैं. इस समय वह देश के गिने चुने प्रमुख ओटीटी में से एक ज़ी-5 के सीईओ हैं.
तरुण कहते हैं, "आने वाले दो साल में ओटीटी का राजस्व दो गुने से ज्यादा हो जाएगा. इस समय यह 3 हज़ार करोड़ रुपए के आसपास है. लेकिन 2022 में यह 7 से 8 हज़ार करोड़ रुपए हो जाएगा."
तरुण कटियाल कहते हैं, "अभी कोरोना के समय में जो डायरेक्ट टू डिजिटल फिल्में आ रही हैं, उससे इस प्लेटफॉर्म को और भी लोकप्रियता मिली है. पर हम पहले से ही अपनी डायरेक्ट तो डिजिटल फिल्में बना रहे हैं. पिछले साल भी हमने 6 फिल्में बनाई और इस साल भी 8 से 10 फिल्में बना रहे हैं. इधर हमारी कुछ अन्य बड़ी फ़िल्मों की रिलीज़ के लिए भी बातचीत चल रही है."
थिएटर खुलने के बाद ओटीटी का जादू क्या ऐसे ही बरकरार रहेगा? यह पूछने पर तरुण बताते हैं, "थिएटर खुलने के बाद भी कुछ हद तक फीचर फिल्में ओटीटी पर रिलीज़ होंगी. क्योंकि कुछ फिल्में थिएटर के लिए नहीं ओटीटी के लिए ही ज्यादा सूटेबल होंगी. जैसे आइडिया बेस्ड फ़िल्मों के लिए ओटीटी एक अच्छा माध्यम है. लेकिन बड़े बजट की फ़िल्मों के लिए थिएटर रिलीज़ जरूरी है."
ओटीटी प्लेटफॉर्म एक निर्धारित राशि लेकर एक निर्धारित अवधि के लिए दर्शकों को अपना ग्राहक बनाते हैं.
उस अवधि में जिन भी फ़िल्मों या वेब सीरीज आदि की स्ट्रीमिंग होती है उसे उस प्लेटफॉर्म के ग्राहक देख सकते हैं. लेकिन यदि बड़ी या लोकप्रिय फ़िल्मों की स्ट्रीमिंग ओटीटी पर होती है तो क्या उसके लिए पहले एक दो दिन के लिए ओटीटी पर ग्राहकों से कुछ अतिरिक्त राशि लेने का भी चलन शुरू हो सकता है.
जब यह सवाल हमने तरुण कटियाल से किया तो वे बोले, "यह ठीक विचार है. ऐसा हो सकता है कि जब किसी बड़ी फ़िल्म की रिलीज़ हो तो पहले कुछ घंटों या एक दो दिन के लिए ग्राहकों से अलग से चार्ज लिया जा सकता है."
थिएटर रहेंगे पहली पसंद!
सन 1970 से 1990 के दशक में बतौर अभिनेता पराया धन, आँखों-आँखों में, खेल खेल में, आपके दीवाने, खूबसूरत और आखिर क्यों जैसी फ़िल्मों से रोमांटिक हीरो के रूप में राकेश रोशन ने अपनी एक अलग पहचान बनाई.
बाद में वह निर्माता-निर्देशक भी बन गए और अपने बैनर से खून भरी मांग, करण अर्जुन, कहो न प्यार है, कोई मिल गया और कृष जैसी कई फ़िल्में राकेश ने बनाई थीं.
राकेश रोशन से हमने फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ पर बात की तो वे बोले, "असल में कम बजट की जो फ़िल्में रिलीज़ के लिए तैयार थीं, वही फ़िल्में ओटीटी पर जा रही हैं. लेकिन सिनेमा थिएटर ही हमेशा दर्शकों की पहली पसंद रहेंगे. अभी भी इस महामारी के रुकने के बाद ऐसा ही होगा."

इमेज स्रोत, Twitter/Ranveer Singh
फ़िल्म दर्शकों तक पहुंचनी चाहिए
उधर एक और जाने माने फ़िल्मकार बोनी कपूर फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ को आज के दौर की एक जरूरत मानते हैं. बोनी बतौर निर्माता वो सात दिन, मिस्टर इंडिया, जुदाई, पुकार, नो एंट्री, वांटेड और मॉम जैसी कई हिट फिल्में बना चुके हैं.
वहीं उनके भाई अनिल कपूर से लेकर बेटा अर्जुन और बेटी जाहन्वी तक उनका लगभग पूरा परिवार फ़िल्मों में है. उनकी पत्नी श्रीदेवी तो सिनेमा की चाँदनी थीं हीं. उधर जाहन्वी की चर्चित फ़िल्म 'गुंजन सक्सेना-कारगिल गर्ल' भी अब थिएटर की जगह नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ होने जा रही है.
बोनी का मानना है, "पिछले 4 महीनों से थिएटर बंद होने से रिलीज़ होने वाली फ़िल्मों का अंबार लग गया है. अभी कब थिएटर खुलेंगे, खुलेंगे तो वहाँ कितने लोग जाएँगे. यह कुछ पता नहीं है. इसलिए कितने ही प्रोड्यूसर्स का पैसा फंसा हुआ है. इसलिए यदि उनको किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म से प्रस्ताव मिलता है तो वे अपनी फ़िल्म वहाँ रिलीज़ करेंगे. इससे पैसे आएंगे तो मनी फलो चालू हो जाएगा."
आपकी बेटी जाहन्वी अपनी इस फ़िल्म को लेकर काफ़ी उत्साहित थी. उसकी यह दूसरी फ़िल्म है. ऐसे में आप या जाहन्वी कुछ मायूस हुए होंगे कि 'गुंजन सक्सेना' की थिएटर की जगह डिजिटल रिलीज़ हो रही है?
इसके जवाब में बोनी ने कहा, "मायूस क्या, यह फ़िल्म रिलीज़ हो रही यही क्या कम है. इस समय 50 से ज्यादा फ़िल्में रिलीज़ के इंतज़ार में हैं. लेकिन ओटीटी पर अभी 15-20 फ़िल्मों को ही रिलीज़ का मौका मिल रहा है."
"थिएटर खुलेंगे तो तब उनकी पहली प्राथमिकता सूर्यवंशी, 83, राधे, कुली नंबर वन और शमशेरा जैसी और कई फ़िल्में रहेंगी. इसलिए 'गुंजन सक्सेना' डिजिटल के माध्यम से ही दर्शकों तक पहुँच रही है, यही बड़ी बात है."
बोनी कपूर हक़ीक़त को समझते हैं. हालात ऐसे हैं कि थिएटर खुल भी जाएँ तो इस साल कोई भी फ़िल्म अपनी पूर्व निर्धारित तिथि पर प्रदर्शित नहीं हो सकेगी.
जो फ़िल्में दिवाली, क्रिसमस पर रिलीज़ होने वाली थीं, उनकी शूटिंग अधर में लटकी हुई है.
इसलिए अब तो फ़िल्म ओटीटी पर ही रिलीज़ हो जाये, यह गनीमत है क्योंकि ओटीटी भी सभी फ़िल्मों को रिलीज़ नहीं कर सकता.

थिएटर का एकाधिकार खत्म होगा
फ़िल्म निर्माताओं की संस्था 'इंडियन मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन' के अध्यक्ष टीपी अग्रवाल भी फ़िल्मों के लिए डिजिटल का एक और माध्यम मिलने से खुश हैं.
अग्रवाल कहते हैं, "फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ से फ़िल्मकारों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी. अभी तक थिएटर वालों का फ़िल्मों की रिलीज़ पर एकाधिकार था. थिएटर में फ़िल्मों के प्रोमो दिखाने के लिए, पोस्टर डिस्प्ले तक के लिए थिएटर वाले अलग से चार्ज करते थे. किस फ़िल्म को स्क्रीन मिलेगी, किसको नहीं इसका फैसला भी उनका होता था. लेकिन अब डिजिटल रिलीज़ से उनका एकाधिकार नहीं रहेगा."
अग्रवाल यह भी कहते हैं, "फ़िल्मों कि रिलीज़ से पहले निर्माता काफी तनाव में रहते हैं. रिलीज़ के लिए अच्छी तारीख मिलेगी या नहीं. फिर फ़िल्म का प्रचार कैसे करें. फ़िल्म चलेगी या नहीं. लेकिन अब जहां निर्माता का रिलीज़ से पहले प्रचार पर करोड़ों का जो खर्चा होता वह बच जाएगा. साथ ही फ़िल्म के न चलने आदि का कोई तनाव भी नहीं रहेगा. निर्माता को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फ़िल्म को देते ही साफ हो जाएगा कि उसे कितना मुनाफा मिल रहा है."
यह सब बताता है कि डिजिटल सिनेमा अपने शुरुआती चंद दिनों में ही सफलता की कई सीढ़ियाँ चढ़ गया है.
कोरोना काल के बाद भी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर फ़िल्मों की रिलीज़ चलती रहेगी. इससे निश्चय ही थिएटर्स का एकाधिकार तो खत्म होगा ही और फ़िल्मकारों के अपनी फ़िल्म की रिलीज़ को लेकर तनाव भी कुछ कम होंगे.
साथ ही अब नए किस्म और नए नए अंदाज़ की फ़िल्में पहले से भी ज्यादा बनने लगेंगी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














