कोरोना: फ़िल्मों और सीरियल की शूटिंग शुरू मगर डरे हुए हैं कलाकार
इमेज स्रोत, Raza Murad
....में
Author, मधु पाल
पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, मुंबई से
भारत में बढ़ते कोरोना वायरस के ख़तरे और पूरे देश में लॉकडाउन की वजह से मनोरंजन जगत बुरी तरह प्रभावित हुआ है. फ़िल्में, टेलीविज़न और वेब सीरीज़ की शूटिंग रुकी हुई हैं.
शूटिंग बंद हुए दो महीने से ज़्यादा का वक़्त हो गया है, लेकिन अब महाराष्ट्र सरकार ने कुछ नए नियमों और शर्तों के साथ शूटिंग करने की इजाज़त दे दी है.
नए नियमों में कई बदलाव किये गए है. सबसे बड़ा बदलाव है कलाकारों के अभिनय करने की उम्र तय करना. अब 65 साल की उम्र के कलाकारों के लिए मनोरंजन जगत में काम करना मुश्किल हो रहा है.
नए नियम-कायदों से सब सहमत हैं लेकिन अपत्ति है तो बस इतनी की कलकारों को उम्र के दायरे में नहीं बंधा जाना चाहिए.
'वरिष्ठ नेता संसद जा सकते हैं तो कलाकार काम क्यों नहीं कर सकते?'
अभिनेता रज़ा मुराद ने बीबीसी से कहा कि वरिष्ठ कलाकारों के काम पर रोक लगाने का कोई मतलब नहीं है.
वो कहते हैं, ''हम किसी एथलीट या स्पोर्ट्समैन की तरह नहीं हैं कि एक उम्र के बाद हमारे काम में ढलान आता है और हम रिटायर हो जाएं. बड़े-बड़े खिलाड़ी 40 साल में रिटायर हो जाते हैं, लेकिन कलाकारों के साथ ये नहीं हैं. वो तो हर गुज़रते साल के साथ परिपक्व होते हैं. उनके काम में और निखार आता है. जहां तक सवाल है सीनियर होने का तो अमिताभ बच्चन 77 वर्ष के हैं और पूरी तरह से फ़िट हैं. ऐसे कई कलाकार हैं जैसे मैं, प्रेम चोपड़ा, किरण कुमार, रणजीत, शक्ति कपूर, अनुपम खेर, शबाना आज़मी हम सबके सब माशाल्लाह कितने फ़िट हैं."
इमेज स्रोत, Raza Murad
वो कहते हैं, "ये सवाल नहीं उठेगा कि जो 65 और उससे अधिक उम्र के सांसद हैं, वो अगले सत्र में न आएं. वो भी तो सीनियर सिटिज़न हैं. उन पर तो रोक नहीं लगी संसद में आने की. तो हम पर ये रोक क्यों लग रही है? हमें भी अपनी रोज़ी-रोटी कमाने का हक़ है. हम सिर्फ़ पैसों के लिए काम नहीं करते है. ये हमारा जुनून है. हमारे अंदर एक आग होती है काम करने की, तब तक जलती रहेगी जब तक हम ज़िंदा हैं."
'रोज़ी-रोटीकमाने का हक़ ना छीनें'
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता रज़ा मुराद कहते हैं, "जितने भी लोग इस वायरस से संक्रमित हुए हैं वो बच्चें हैं, नौजवान हैं और बुज़र्ग भी है और कई बुज़ुर्ग तो ठीक हो गए हैं. तो बजाय इसके कि आप हमें काम करने से रोकें, आप हमसे फ़िटनेस सर्टिफिकेट मांगिए, अगर फिटनेस सर्टिफ़िकेट एक सर्टिफ़ाइड डॉक्टर जारी कर देता है तो आप हमें काम करने दें."
रज़ा मुराद कहते हैं, " मैं दरख़्वास्त करूँगा हर किसी को अपनी रोज़ी-रोटी कमाने का हक़ है, हमें भी है. हम भी चार महीने से घर मैं बैठे हैं. हम ख़र्च करते जा रहे हैं, लेकिन हमारे पास कुछ आ नहीं रहा है. बात सिर्फ़ पैसों की नहीं है, बात काम करते रहने के हक़ की है. मैं यही दरख़्वास्त करूँगा कि इस फ़ैसले पर महाराष्ट्र सरकार फिर से सोचे."
इमेज स्रोत, Himani Shivpuri
'शूटिंग शुरू होने की ख़बर ने डरा दिया है'
अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी बताती हैं, ''हाल ही में जब मुझे मेरे प्रोड्यूसर का फ़ोन आया शूटिंग के लिए तो मैंने हाँ कह दिया था. मैं इस वक़्त एक पॉपुलर शो "हप्पू की उल्टन पल्टन" के साथ जुड़ी हूँ. लेकिन दो महीने बाद जब शूटिंग शुरू होने जा रही है तो अब मुझे थोड़ा सा डर लगने लगा है. मुंबई के आंकड़े बढ़ रहे हैं और शूटिंग में बाकी लोग तो मास्क पहनते हैं. लेकिन हम एक्टर लोग तो एक्टिंग करते वक़्त मास्क नहीं लगाते. ये सोचकर दिल धक-धक सा हो रहा है. ऐसे में महाराष्ट्र सरकार ने ये नियम जारी किया है तो कुछ सोच-समझकर ही ज़ारी किया होगा.''
इमेज स्रोत, Himani Shivpuri
'कलाकरों पर रोक नहीं, उनका बीमा होना चाहिए'
हिमानी शिवपुरी मानती हैं कि सरकार को कलाकारों की उम्र पर ध्यान ना देते हुए बल्कि इस बात पर ज़ोर देना चाहिए कि कलाकरों का बीमा हो, जैसे विदेशों में होता है.
वो कहती हैं, 'हमारा जो कॉन्ट्रैक्ट है, हमेशा एक्टर और प्रोडक्शन चैनल के बीच एकतरफ़ा है. उसमें साफ़ लिखा होता है कि अगर आप बीमार पड़ गए या किसी दुर्घटना का शिकार हो गए तो ये उनकी ज़िम्मेदारी नहीं है. हाँ, अगर आपकी वजह से शूटिंग में कुछ हुआ तो आपको इतना करोड़ देना पड़ेगा. तो मुझे लगता है की सबसे पहले कलाकारों का बीमा होना चाहिए क्योंकि काम करते वक़्त अगर उन्हें चोट लगी तो वो जिस प्रोडक्शन हाउस या चैनल में काम कर रहा है, उसका फ़र्ज़ बनता है कि देखरेख करे.''
इमेज स्रोत, Himani Shivpuri
'कलाकारों को समय पर सैलरी मिले ये ज़रूरी है'
हिमानी शिवपुरी कलाकारों को समय पर पैसे ना मिलने का मुद्दा उठाती हैं.
वो कहती हैं, ''मुझे लगता है कि एक्टर्स को रॉयल्टी मिलनी चाहिए जैसे विदेशों में मिलती है. मैं हमेशा कहती हूँ कि कलाकार महिमामंडित बंधुआ मज़दूर हैं. वो काम करते हैं तो ही पैसे मिलते हैं. सलमान खान, शाहरुख़ खान या अक्षय कुमार ये अलग कैटेगरी है. हम जैसे जो नार्मल आर्टिस्ट हैं, हम जब काम करते हैं तभी हमको पैसे मिलते हैं. कुछ सालों से नियम बनाया है कि 90 दिनों के बाद मिलेगा और वो 90 दिन नहीं रहता है तो बढ़कर कभी 120 हो जाता है तो कभी 180 दिन हो जाता है. सीरियल जब बंद हो जाता है तब तो डर से आधे टाइम तो प्रोड्यूसर आपको पैसे नहीं देते और फिर देते भी हैं तो काटकर देते हैं. ये सब बदलना चाहिए. कलाकारों को समय पर सैलरी मिले ये ज़रूरी है."
इमेज स्रोत, Anoop Jalota
'पैसे ख़त्म हो रहे हैं, सबका यही हाल है'
जाने-माने भजन गायक और अभिनेता अनूप जलोटा कहते हैं कि कलाकारों को किसी उम्र के दायरे में नहीं बाँधा जा सकता है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, ''ये काम ऐसा है कि इसमें उम्र के हिसाब से रोल तय होते हैं. स्क्रिप्ट में कोई 80 साल का आदमी दिखाना है तो वो नैचुरल तभी होता है जब वो उस उम्र के आसपास का व्यक्ति हो. इस तरह की बंदिश लगाना मेरे हिसाब से ठीक नहीं है. आप ये कह दीजिये कि भाई घूमने-फिरने बाहर मत निकलो और मॉल में मत जाओ. ये चीज़ें तो समझ में आती हैं लेकिन जहां पर एक फ़िल्म का काम हो तो उसे तो नहीं रोका जाना चाहिए.''
वो कहते हैं, "लॉकडाउन की वजह से पर्सनली मुझे बहुत नुकसान हुआ है. मैं पहले जो कमा रहा था वो एकदम ज़ीरो हो गया है. लेकिन ये सिर्फ मेरे साथ नहीं सबके साथ हुआ है. मैं केवल अपना रोना क्यों रोऊँ. समय के साथ सब ठीक होगा उम्मीद है. स्क्रिप्ट की मांग है बड़े उम्र वाले कलाकरों की तो वो कैसे पूरी होगी? इसलिए हमें काम करने दिया जाना चाहिए. "
'सरकार के इस फैसले पर फिर से विचार करने को कहेंगे'
महाराष्ट्र सरकार ने एसोसिएशन और मेकर्स से बात करके कड़ी शर्तों के साथ जून महीने के आखिर तक काम करने की शूटिंग शुरू करने का आदेश दे दिया है.
इसमें महाराष्ट्र सरकार, प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और फ़ेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज़ (एफडब्ल्यूआईसी) ने मिलकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
इस मुद्दे पर एफडब्ल्यूआईसी के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने बीबीसी हिंदी से कहा, "जो नए नियम हैं, उनके तहत 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले लोगों को सेट से दूर रहना होगा. इस उम्र वाले कलाकारों और टेक्नीशियंस की सेहत और सुरक्षा को देखते हुए यह फ़ैसला लिया जा रहा है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है."
उन्होंने कहा कि वो इस फ़ैसले को लेकर सरकार से एक बार और विचार करने को कहेंगे.
उन्होंने कहा, ''अगर कोई व्यक्ति स्वस्थ है तो उसे काम करने की इजाज़त दी जाए. अगर सरकार उन्हें काम करने अनुमति दे तो हम उनसे आठ घंटे काम न कराकर सिर्फ चार घंटे ही काम कराने पर ज़ोर देंगे."
इमेज स्रोत, BN Tiwari
'मेकअप आर्टिस्ट पीपीई किट पहनेंगे'
शूटिंग की तारीख़ के बारे में बीएन तिवारी ने बताया कि सरकार ने जून आख़िर से काम शुरू करने की अनुमति दी है.
65 साल की उम्र के अलावा कुछ और नियम हैं. जैसे सेट पर 33 फ़ीसदी क्रू मेंबर्स के साथ ही शूटिंग होगी, मेकअप आर्टिस्ट पीपीई किट पहनकर मेकअप करेंगे. और शूटिंग के दौरान साफ़ सफाई को बहुत ज़्यादा महत्व दिया जाएगा.
फ़िल्म या टीवी शो के मुख्य कलाकारों को कम नहीं किया जा सकता है लेकिन क्रू-मेम्बर्स की संख्या 33 प्रतिशत तक कम करने की आवश्यकता है और सेट पर बाकी गतिविधियों को दूर से वीडियो कॉन्फ्ऱेंसिंग के माध्यम से किया जाएगा और कलाकारों की कास्टिंग भी अब ज़ूम या स्काइप के माध्यम से ही होगी.
बिना दर्शकों के शूटिंग
महाराष्ट्र सरकार ने नॉन कंटेनमेंट ज़ोन में शर्तों के साथ शूटिंग की इजाजत दी है और कहा है कि नियम तोड़े तो काम रोक दिया जाएगा. सरकार की ओर से शूटिंग फिर से शुरू करने के लिए नियमों की 16 पन्नों की गाइडलाइन जारी की गई है, जिनमें कुछ और नियम बनाए गए हैं जैसे सेट पर फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग के सभी नियमों का भी पालन करना होगा.
सेट पर डॉक्टरों और नर्सों का रहना अनिवार्य रहेगा. गर्भवती कर्मचारियों और गर्भवती कलाकारों को सेट पर जाने की अनुमति नहीं होगी. शूटिंग के दौरान भीड़ इकट्ठा होने की इजाजत नहीं दी जाएगी, फिक्शन और नॉन-फिक्शन शो की शूटिंग बिना दर्शकों के होगी. जैसे द कपिल शर्मा शो को दर्शकों के बिना शूट करना होगा. यानी पहले की तरह कई शो में ऑडियंस दिखाई जाती थी, अब उन्हें सेट पर आने की अनुमति नहीं होगी.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.