स्पाइडर मैन को गढ़ने वाले स्टेन ली नहीं रहे

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अमरीकी लेखक और मार्वेल कॉमिक्स के पूर्व अध्यक्ष स्टेन ली का निधन हो गया है.
काफ़ी समय से बीमार चल रहे 95 साल के स्टेन ली का निधन स्थानीय समयानुसार सोमवार सुबह हुआ.
स्टेन ली ने मार्वेल के लिए कई कॉमिक्स कहानियां लिखीं और असाधारण शक्तियों वाले कई पात्र रचे. उन्होंने अपने काम से प्रशंसकों को हैरान कर दिया.
स्पाइडर मैन, आयरन मैन, हल्क, डेयरडेविल और फैंटेस्टिक फॉर जैसी सभी कॉमिक्स बुक के सुपर हीरो स्टेन ली की कल्पना की उपज थे जिन्हें उन्होंने अलग-अलग रूप दिए.
भारत के साथ-साथ दुनियाभर में स्टेन ली के प्रशंसक मौजूद थे. इनके किरदारों पर कई फ़िल्में भी बनीं.
उनका जन्म 1922 में एक यहूदी परिवार में हुआ था जो रोमानिया से पलायन करके आया था. स्टेन लीबरमैन को टाइमली पब्लिकेशन में नौकरी मिली.
यह उनके रिश्तेदार की कंपनी थी जो आगे मार्वेल कॉमिक्स बन गई.

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भारत के लिए भी किया काम
उन्हें कॉमिक्स विभाग सौंपा गया जहां उनकी सोच को पंख मिले. 18 साल की उम्र में ही वह संपादक बन गए.
स्टेन ली ने 1961 में मार्वेल कॉमिक्स के लिए 'द फैंटेस्टिक फोर' बनाई. बाद में इसमें स्पाइडर मैन, एक्स मैन, हल्क, आयरन मैन, ब्लैक पैंथर, थोर, डॉक्टर स्टैंज और कैप्टन अमेरिका जैसे किरदार शामिल किए गए.
2013 में शरद देवरंजन और गौतम चोपड़ा ने स्टेन ली के साथ मिलकर एक भारतीय सुपरहीरो फ़िल्म 'चक्र' भी बनाई. यह एक एनिमेशन फ़िल्म थी जिसे कार्टून नेटवर्क के भारतीय संस्करण पर लॉन्च किया गया था. इस फ़िल्म के लिए स्टेन ली ने ग्राफ़िक इंडिया के साथ मिलकर काम किया था.
20 सालों तक वह कॉमिक्स की दुनिया पर छाए रहे. उन्होंने अपराध और डरावनी दुनिया आदि की ऐसी कहानियां लिखीं जो उनके किशोर प्रशंसकों के उत्साह की भूख को शांत करे.
उनके किरदार या तो बहुत अच्छे होते थे या बहुत बुरे. वह कभी भी अपने किरदारों को बीच में नहीं रखते थे.
जब उन्होंने लिखना शुरू किया तो वह अपने लेखन से घबराए हुए थे तो उन्होंने इसमें अपने असली नाम की जगह स्टेन ली का इस्तेमाल किया. बाद में उन्होंने इस नाम को क़ानूनी तौर पर अपना लिया.

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40 साल की उम्र में उन्हें लगने लगा की वह कॉमिक्स के लिए काफ़ी बूढ़े हो चुके हैं. तब उनकी ब्रिटिश मूल की पत्नी जॉआन ने उन्हें सलाह दी कि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है तो इसलिए उन्हें ऐसे किरदार रचने चाहिए जो वह चाहते हैं.
ताक़तवर हैं तो भी समस्या होती है
इसके बाद उन्होंने 1961 में 'द फ़ैंटेस्टिक फ़ोर' लिखी थी, जो काफ़ी प्रचलित हुई. इसी तरह स्पाइडर मैन आदि का जन्म हुआ, जिसको मकड़ी के काटने के बाद उसमें मकड़ी जैसी शक्तियां आ जाती हैं.
स्पाइडर मैन उर्फ़ पीटर पार्कर ने लोगों का ध्यान अपनी और खींचा. उसके पास शक्तियां थीं लेकिन उसको अपने काम पर, घर में और प्रेमिका के साथ समस्याओं का भी सामना करना पड़ता था.
इन समस्याओं पर स्टेन ली ने बीबीसी को कहा था कि वो केवल एक हीरो है और उसके पास शक्तियां हैं, इसका मतलब ये नहीं कि उसे कोई समस्या नहीं होती होगी.
इनके अलावा स्टेन ली के द हल्क, द माइटी थोर, आयरन मैन जैसे कई किरदारों के साथ भी समस्याएं थीं. कोई नशीली दवाओं के दुरुपयोग तो कोई सामाजिक असमानता जैसी समस्याओं से पीड़ित था.
कंपनी के उफ़ान के समय मार्वेल हर साल पांच करोड़ प्रतियां बेच रहा था. 1971 में रिटायर होने तक स्टेन ली ने मार्वेल के कवर पेज के लिए कई कहानियां लिखीं.
1999 में उनके स्टेन ली मीडिया वेंचर ने कॉमिक्स को इंटरनेट से जोड़ना चाहा, जिसके कारण वह दिवालिया घोषित हो गए. उनके बिज़नेस पार्टनर को धोखाधड़ी के लिए जेल जाना पड़ा.

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2001 में उन्होंने POW!(परवियर्स ऑफ वंडर) एंटरटेनमेंट नाम की एक नई कंपनी शुरू की, जो फ़िल्म और टीवी प्रोग्राम बनाती थी.
आधी सदी पहली उनके द्वारा रचे गए एक्स मैन, फैंटेस्टिक फॉर, हल्क, डेयरडेविल, आयरन मैन और आयरनमैन जैसे किरदरार आज भी काफ़ी प्रचलित हैं.
2002 में स्पाइडरमैन फ़िल्म आई और 2004 में उसका रीमैक आया इन फ़िल्मों ने कुल मिलाकर पूरी दुनिया में 1.6 अरब डॉलर की कमाई की.
मार्वेल की अब तक की लगभग हर फिल्म में स्टेन ली ने कैमियो रोल किया, जिसे काफ़ी प्रशंसा मिली.
ली ने ग्राफ़िक नोवेल में भी हाथ आज़माया. 2012 में वह रोमियो एंड जुलिएट के सह-लेखक थे, जिसे न्यू यॉर्क टाइम्स ने बेस्ट सेलर की लिस्ट में जगह दी.
2016 में कॉमिक-कॉन में उन्होंने अपने डिजिटल ग्राफ़िक उपन्यास स्टेन लीस गॉड वोक को पेश किया, जिसके प्रिंट संस्करण ने 2017 में इंडिपेंडेंट पब्लिशर बुक अवॉर्ड्स जीता.
बाद में उनकी आंखों ने उनका साथ नहीं दिया और उन्हें ठीक से दिखना बंद हो गया. जिसका साफ़ मतलब था कि वह अब कॉमिक बुक्स नहीं पढ़ सकते जिन्होंने उन्हें पहचान दिलाई.
उन्होंने 2016 में रेडियो टाइम्स को बताया कि वह पढ़ने को बहुत याद करते हैं.
उन्होंने कहा, "जब भी मैं किसी कॉमिक्स बुक सम्मेलन में जाता हूं कम से कम एक प्रशंसक मुझसे ज़रूर पूछता है, 'सभी की सबसे बड़ी शक्ति क्या है?' और मैं हमेशा कहता हूं कि किस्मत सबसे बड़ी शक्ति है, क्योंकि यदि आपके पास अच्छी किस्मत है तो सब कुछ आपके हिसाब से होता है."
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