मेरी फ़िल्म में न सेक्स न हिंसा फिर सीन क्यों काटेः निहलानी

    • Author, सुप्रिया सोगले
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी के लिए

सेंसर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी अपनी आगामी फ़िल्म 'रंगीला राजा' में 20 कट लगाए जाने से बेहद नाराज़ हैं.

केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफ़सी यानी सेंसर बोर्ड) के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का कहना है कि उनकी फ़िल्म में लगाए कट बिलकुल बेबुनियाद हैं.

पहलाज निहलानी की रंगीला राजा में गोविंदा डबल रोल में नज़र आएंगे. इस फ़िल्म में शक्ति कपूर, बिजेंद्र काला भी अहम भूमिकाओं में हैं.

बीबीसी से बात करते हुए निहलानी ने कहा, "फ़िल्म में लगाए गए कट सीबीएफ़सी के दिशा-निर्देशों के अनुसार नहीं हैं. उन्हें मुझे तंग करना था और उन्होंने मुझे तंग कर दिया."

निहलानी कहते हैं, "जब मैं सेंसर बोर्ड में था तब मंत्रालय की बात भी नहीं मानता था. आज संजय लीला भंसाली की फ़िल्म चुनावों की वजह से रोकी गई है. मंत्रालय हमेशा से इस तरह की दख़ल देता रहा है. मैं इस दख़ल को स्वीकार नहीं करता था क्योंकि मैं फ़िल्म इंडस्ट्री से हूं और इसी का रहूंगा."

निहलानी कहते हैं कि एक फ़िल्मकार के तौर पर इससे पहले उन्हें सेंसर बोर्ड से कभी कोई परेशानी नहीं हुई थी. वो कहते हैं, "मेरी फ़िल्म में सेक्स, हिंसा, बाल शोषण और बेहुदापन नहीं है, बावजूद इसके 20 कट लगाए गए हैं."

निहलानी कहती हैं कि आज भले ही केंद्र में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति कर रही हो लेकिन उनकी फ़िल्म में राम से जुड़े एक सीन को ही काट दिया गया है.

वो कहते हैं, "जब-जब सीता का हरण रावण करेगा तब-तब राम की मदद के लिए हनुमान आएगा, इस डायलॉग को भी काट दिया गया है. मैं समझ नहीं पा रहा हूं इसमें किस दिशानिर्देश का उल्लंघन है."

वो कहते है कि, "हमने फ़िल्म की शुरुआत में ही डिस्क्लेमर दे दिया था की ये फ़िल्म काल्पनिक है और किसी व्यक्ति के जीवन पर आधारित नहीं है बावजूद इसके सीबीएफ़सी को चार-पांच डिस्क्लेमर और चाहिए."

सीबीएफ़सी के रवैये से नाराज़ हुए पहलाज निहलानी ने फिलहाल मुंबई हाइकोर्ट में याचिका दायर की है और फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं.

16 नवंबर को रिलीज़ होने वाली 'रंगीला राजा' पहले 8 नवंबर को दिवाली के अवसर पर रिलीज़ होनी थी पर सर्टिफिकेट ना मिलने की वजह से उन्हें अपनी रिलीज़ डेट एक हफ़्ते आगे बढ़ानी पड़ी है.

निहलानी ने सेंसर बोर्ड के मौजूदा अध्यक्ष प्रसून जोशी पर भी पक्षपाती रवैया अपनाने के आरोप लगाए हैं.

उनका कहना है कि बोर्ड के पास उनकी फ़िल्म 'ठग्स ऑफ़ हिंदोस्तान' से पहले भेजी गई थी लेकिन बोर्ड ने पहले 'ठग्स ऑफ़ हिंदोस्तान' फ़िल्म देखी.

निहलानी कहते हैं कि आमिर ख़ान और प्रसून जोशी 'तारे ज़मीन पर हैं' के समय से ही अच्छे दोस्त हैं और जोशी ने आमिर की फ़िल्म को पहले पास करके यही दोस्ती निभायी है.

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