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अनु मलिक इंडियन आइडल से निकले या निकाले गए?
'तू मुंबई आ रहा है. तू मुंबई आ रहा है.' सोनी टीवी पर इंडियन आइडल के जज अनु मलिक की ये लाइन अब आप नहीं सुन पाएंगे. अनु मलिक अब बतौर इंडियन आइडल जज नज़र नहीं आएंगे.
#MeToo अभियान में अनु मलिक पर सिंगर सोना महापात्रा और श्वेता पंडित ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं.
इन आरोपों के बाद सोनी टीवी ने एक बयान जारी कर अनु मलिक को इंडियन आइडल के जूरी पैनल से हटा दिया है.
सोनी टीवी के बयान के मुताबिक़, ''अनु मलिक अब इंडियन आइडल जूरी पैनल में नहीं हैं. शो पहले की तरह चलता रहेगा. हम शो में भारतीय संगीत के कई बड़े नामों को बतौर मेहमान बुलाएंगे. ये लोग विशाल और नेहा के साथ मिलकर इंडियन आइडल-10 के प्रतिभाशाली प्रतियोगियों को जज करेंगे.''
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, अनु मलिक ने एक बयान में कहा, ''मैंने इंडियन आइडल से ब्रेक लेने का फ़ैसला किया है. चूंकि मैं अपने काम में ध्यान नहीं लगा पा रहा था. चैनल मेरी इस बात से सहमत है.''
अनु मलिक इंडियन आइडल शो के साथ साल 2004 से जुड़े हुए थे.
क्या है पूरा मामला?
#MeToo यानी महिलाओं का अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की कहानी साझा करने का अभियान.
इसी अभियान के तहत सिंगर श्वेता पंडित ने अपना अनुभव ट्विटर पर पोस्ट किया था.
श्वेता ने लिखा था, ''साल 2000 में 'मोहब्बतें' फ़िल्म के साथ मेरे करियर की शुरुआत हुई. मैं नए अच्छे गानों की तलाश में थी ताकि सफलता को कायम रख सकूं. मुझे उस वक़्त अनु मलिक के मैनेजर की तरफ़ से फ़ोन आया. 2001 में मुझे अंधेरी के एंपायर स्टूडियो में बुलाया गया. किसी भी दूसरे सिंगर की तरह मैं जोश से भरी हुई थी. एक केबिन में सिर्फ़ मैं और अनु मलिक थे. अनु ने बिना संगीत के मुझसे गाने के लिए कहा. गाना सुनकर अनु ने कहा- मैं तुम्हें शान और सुनिधि के साथ एक गाना दूंगा, लेकिन पहले मुझे किस करो. ये कहकर अनु मुस्कुरा रहे थे, मेरी याद में ये बेहद बुरी मुस्कान थी. मैं तब सिर्फ़ 15 साल की थी. स्कूल जाती थी. कोई कल्पना नहीं कर सकता कि वो कैसा पल था?''
सोना महापात्रा ने भी अनु मलिक पर गंभीर आरोप लगाए थे.
सोना ने लिखा था, ''जो भी लड़कियां अपने अनुभव साझा कर रही हैं, वो अकेली नहीं हैं. इस इंडस्ट्री में और भी अनु मलिक हैं. मैं 18 घंटे काम करती हूं, इसलिए ऐसे हर इंसान के बारे में ट्वीट नहीं कर सकती.''
यौन उत्पीड़न के आरोपों पर अनु मलिक के वक़ीलों की ओर से सफ़ाई पेश की गई.
वक़ीलों के बयान के मुताबिक़, ''अनु मलिक पर लगाए आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं. अनु मलिक मी-टू अभियान का सम्मान करते हैं, लेकिन इस अभियान का इस्तेमाल किसी के चरित्र हनन के लिए करना ग़लत है.''
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