पाई डे: भारत के 5 महान गणितज्ञ

आर्यभट

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इमेज कैप्शन, यूनेस्को हेडक्वार्टर में आर्यभट की मूर्ति लगाई गई है

14 मार्च को वर्ल्ड पाई डे के नाम से मनाया जाता है. इस पाई को खाने वाला व्यंजन ना समझें, ये गणित वाला पाई है.

जियोमेट्री यानी ज्यामिति पढ़ने वाले इससे अच्छी तरह वाकिफ़ होंगे. इस मौके पर जानते हैं कि भारत में कौन से ऐसे लोग हुए जिन्हें गणित ने कभी परेशान नहीं किया बल्कि इसके उलट वे गणित की संख्याओं से दिल खोलकर खेले और बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं.

आर्यभट

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आर्यभट

भारत में सबसे पहला गणितज्ञ आर्यभट को माना जाता है.

ऐसा माना जाता है कि 5वीं सदी में उन्होंने ही ये सिद्धांत दिया था कि धरती गोल है और सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है और ऐसा करने में उसे 365 दिन का वक्त लगता है.

उनके नाम पर ही भारत के पहले उपग्रह का भी नाम रखा गया था.

श्रीनिवास रामानुजन

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श्रीनिवास रामानुजन

रामानुजन जब अंग्रेज़ी विषय में फेल हुए तो उन्होंने स्कूल छोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने गणित सीखा और दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई.

उन्होंने गणित की 120 थ्योरम्स दी, जिनके लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से उन्हें निमंत्रण मिला.

उन्होंने एनालिटिकल थ्योरी ऑफ़ नंबर्स, एलिप्टिकल फंक्शन और इनफाइनाइट सिरिज़ पर काफ़ी काम किया.

शकुंतला देवी

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शकुंतला देवी

भारत की अब तक की सबसे प्रसिद्ध महिला गणितज्ञ शकुंतला देवी को माना जाता है.

उन्हें 'मानव कंप्यूटर' भी कहा जाता है क्योंकि वो बिना किसी केलकुलेटर के गणित की केलकुलेशन कर लेती थीं.

महज़ 6 साल की उम्र में ही वह भारत के बड़े विश्वविद्यालयों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने लगीं थीं.

उनके नाम कई विश्व रिकॉर्ड हैं. मसलन, उन्होंने दुनिया के सबसे तेज़ कंप्यूटर से भी पहले सिर्फ 50 सेकंड में 201 का 23वां रूट निकाला था और रिकॉर्ड अपने नाम किया था.

सी आर राव

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सी आर राव

सी आर राव अपनी 'थ्योरी ऑफ़ इस्टीमेशन' के लिए जाने जाते हैं.

कर्नाटक में पैदा हुए सी आर राव अपने 10 भाई-बहनों में आठवें थे.

आंध्र विश्वविद्यालय से उन्होंने मैथेमेटिक्स में एम.ए की डिग्री ली और कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्टेटिस्टिक्स में भी एम.ए डिग्री में गोल्ड हासिल किया.

उन्होंने 14 किताबें लिखी हैं और बड़े जर्नल्स में उनके 350 रिसर्च पेपर छपे है. उनकी कुछ किताबों का कई यूरोपीय, चीनी और जापानी भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है.

18 देशों के विश्वविद्यालयों से उन्हें डॉक्टरेट डिग्रियां मिली हैं.

सी एस शेषाद्री

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सी एस शेषाद्री

सी एस शेषाद्री ने एलजेबरिक जओमिट्री में बहुत काम किया.

मद्रास विश्वविद्यालय से गणित में ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री ली.

उसके अलावा उन्होंने शेषाद्री कॉन्सटेंट और नराईशम-शेषाद्री कॉन्सटेंट की खोज की.

साल 2009 में उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया.

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