फ़िल्म इंडस्ट्री से पहले, समाज की जड़ों में है रंगभेद: नवाज़ुद्दीन

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी

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    • Author, सुप्रिया सोगले
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी के लिए

'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर', 'बदलापुर', 'माझी-द माउंटेन मैन' जैसी फ़िल्मों से फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने वाले नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने हाल ही में ट्विटर पर रंग भेदभाव पर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया.

उनका मानना है कि ज़िम्मेदार लोगों को रंग गोरा करने का दावा करने वाले उत्पादों का प्रचार नहीं करनी चाहिए.

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "समाज के जड़ों में रंगभेद है, फ़िल्म इंडस्ट्री तो बाद में आती है. काले रंग को अच्छा नहीं माना जाता. जब ज़िम्मेदार लोग फेयरनेस क्रीम का प्रचार करते हैं तो देश के लोगों में हीनता की भावना जागती है और अधिकतर जनता जनार्दन को प्रभावित करती है. ये गलत है. किसी को गलत चीज़ों का प्रचार नहीं करना चाहिए."

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इमेज कैप्शन, हाल में 'मॉम' में नज़र आए थे नवाज़

'पश्चिम में इस रंग को ख़ूबसूरत माना जाता है'

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का ये भी मानना है कि रंग भेदभाव वाली सोच से किसी अभिनेता का अभिनय तय करना गलत होगा और समाज में फैली इस मानसिकता को बदलने में थोड़ा वक़्त लगेगा.

नवाज़ुद्दीन जैसे अभिनेता भी एक समय में अपने रंग के कारण असुरक्षा की भावना रखते थे.

लेकिन जब अपनी फ़िल्मों के लिए वह पश्चिम देशों में गए तो उन्हें एहसास हुआ कि वहां उनके रंग के व्यक्ति को ख़ूबसूरत माना जाता है और इस तरह से उनमें अपने रंग को लेकर एक आत्मविश्वास जागा.

दमदार परफॉर्मेंस से लोगों का दिल जीतने वाले नवाज़ुद्दीन की पिछली फ़िल्म 'मुन्ना माइकल' फ्लॉप रही.

नवाज़ुद्दीन अपनी फ़िल्म के बारे में कहते हैं, "फ़िल्म की ज़रूरत से ज़्यादा आलोचना की गई जिसका असर फ़िल्म पर पड़ा. मुझे ये आलोचना ज़्यादा लगी. कई छोटे शहरों और इलाकों में लोग तर्क देखने नहीं जाते. ऐसी जगह पर ये फ़िल्म लोगों को पसंद आई."

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इमेज कैप्शन, 'फ़िल्म फ्लॉप होने के लिए केवल अभिनेता ज़िम्मेदार नहीं'

अभिनेता सिर्फ़ पुतला होता है

नवाज़ुद्दीन ने साफ़ किया कि फ़्लॉप फ़िल्मों के लिए सिर्फ़ अभिनेताओं को ज़िम्मेदार ठहराना ठीक नहीं क्योंकि अभिनेता सिर्फ़ पुतला होता है. अगर फ़िल्म फ्लॉप होती है तो ज़िम्मेदारी पूरी टीम की होनी चाहिए.

वहीं, बड़े सितारों की फ्लॉप फ़िल्मों पर टिप्पणी करते हुए नवाज़ आगे कहते हैं, "दौर होता है. कुछ समय बाद अच्छी फ़िल्में भी आएंगी. आज अगर बड़े स्टार की फ़िल्में फ्लॉप हुई हैं तो कल बड़ी फ़िल्म आएगी और सब कुछ वसूल हो जाएगा."

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इमेज कैप्शन, 'फ़िल्में फ्लॉप होने का दौर होता है'

नवाज़ुद्दीन पर जल्द आएगी किताब

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के फ़िल्मी करियर के संघर्ष और सफ़लता ने कई लोगों को प्रेरणा दी है.

अब नवाज़ अपने जीवन के शुरुआती दौर को संस्मरण के तौर पर ला रहे हैं जिसमें उनके बचपन से लेकर गैंग्स ऑफ वासेपुर तक के सफ़र का ज़िक्र होगा.

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इमेज कैप्शन, 'बाबूमोशाय बन्दूकबाज़' है नवाज़ की नई फ़िल्म

अपने ऊपर फ़िल्म बनने पर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी कहते हैं कि उन पर बायोग्राफी फ़िल्म फिलहाल ज़ल्दबाज़ी होगी इसलिए अभी सिर्फ संस्मरण काफ़ी है.

नवाज़ुद्दीन जल्द ही देसी कॉन्ट्रैक्ट किलर के रूप में कुषाण नंदी निर्देशित फ़िल्म 'बाबूमोशाय बन्दूकबाज़' में नज़र आएंगे.

फ़िल्म 25 अगस्त को रिलीज़ होगी.

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