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सत्यम को बेचने की अनुमति मिली | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के कंपनी लॉ बोर्ड यानी सीएलबी ने विवादों में घिरी आईटी कंपनी सत्यम कंप्यूटर्स को बेचने की हरी झंडी दे दी है. कई अग्रणी कंपनियाँ सत्यम को ख़रीदने की इच्छा जता चुकी है. सीएलबी ने गुरुवार को अपने फ़ैसले में कहा कि सत्यम का निदेशक मंडल कंपनी की 26 फ़ीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए स्वतंत्र है. फ़ैसले में कहा गया है कि किसी और कंपनी को सत्यम का रणनीतिक साझीदार भी बनाया जा सकता है. हालांकि बोर्ड का कहना है कि साझीदार चुनने के लिए बोली की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की ज़रूरत है. इससे पहले सत्यम ने कहा था कि वह अपने रणनीतिक निवेशकों के चुनाव के लिए सार्वजनिक बोली की प्रक्रिया चालू करना चाहती है. कंपनी ने इसके लिए सीएलबी से मंजूरी मांगी थी. सरकार की ओर से नियुक्त सत्यम के नए बोर्ड ने भी चेतावनी दी थी कि कई प्रमुख ग्राहकों और कर्मचारियों ने कंपनी की खस्ताहाल वित्तीय स्थिति के कारण अनुबंध तोड़ने की धमकी दी है. फिलहाल देश की कई प्रमुख कंपनियाँ इसे ख़रीदने के लिए कतार में है. सबसे पहले महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी इच्छा जताई थी. सत्यम कंप्यूटर्स में इसकी हिस्सेदारी लगभग आठ फ़ीसदी है. इसके बाद लार्सन एंड टुब्रो, स्पाइस समूह जैसी कंपनियों ने भी सत्यम को ख़रीदने की इच्छा जताई है. |
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